


कल्पना कीजिए कि आपका पड़ोसी, भाई या पति रात को आपसे बात करके सोने चला गया और सुबह उसका कोई नामोनिशान नहीं मिले. ना फोन, ना मैसेज, ना कोई सुराग. जापान में यह कल्पना नहीं बल्कि हकीकत है. यहां ‘जोहात्सु’ (Johatsu) यानी ‘वाष्पीकरण’ नाम का एक फेनॉमिना दशकों से चल रहा है.
हजारों लोग हर साल जानबूझकर गायब हो जाते हैं और पूरी तरह नई जिंदगी शुरू कर लेते हैं. जापान में ‘जोहात्सु’ उन लोगों को कहा जाता है जो जानबूझकर गायब हो जाते हैं. ये लोग पुलिस को मिसिंग पर्सन के रूप में रिपोर्ट नहीं किए जाते क्योंकि वे स्वेच्छा से गायब होते हैं. 1990 के दशक में जापान के आर्थिक संकट के बाद यह घटना और बढ़ गई.

कर्ज, नौकरी का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, असफल शादी या सामाजिक शर्म से बचने के लिए लोग यह रास्ता चुनते हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जापान में खास ‘नाइट मूविंग’ कंपनियां हैं जो इन लोगों को गायब होने में मदद करती हैं. ये एजेंसियां रात के अंधेरे में सामान शिफ्ट करती हैं, नई जगह पर नया घर ढूंढती हैं और कभी-कभी नई पहचान बनाने में भी सहायता करती हैं.
कैसे काम करती है एजेंसी?
जिस शख्स को गायब होना है वो व्यक्ति एजेंसी से संपर्क करता है. एजेंसी रात में चुपचाप उसका सामान पैक करके ले जाती है. उसे नए शहर में छोटा अपार्टमेंट ढूंढकर बसाती है. पुराने पते और नंबर से संबंध तोड़ने में मदद करती है. कई बार नया फोन नंबर और बैंक अकाउंट भी सुझाती है. ये कंपनियां पूरी गोपनीयता बनाए रखती है. पुलिस भी तब तक कुछ नहीं कर सकती जब तक कोई अपराध ना हो.
परिवार की हालत
जिनके पीछे परिवार छूट जाता है, उनकी जिंदगी सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. मां-बाप, पत्नी और बच्चे सालों तक इंतजार करते रहते हैं. उन्हें पता नहीं होता कि उनका प्रिय व्यक्ति जिंदा है या नहीं. कई परिवार खुद ही तलाश करते फिरते हैं लेकिन जापान के कानून के मुताबिक वयस्क व्यक्ति अगर स्वेच्छा से गया है तो पुलिस लोकेशन नहीं बताती. हर साल जापान में हजारों लोग गायब होते हैं.
मुख्य कारण हैं:
- भारी कर्ज और दिवालियापन
- काम का अत्यधिक दबाव (करoshi)
- पारिवारिक कलह या शादी संबंधी समस्याएं
- सामाजिक अपमान का डर
- मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं
1990 के आर्थिक बुलबुले के फटने के बाद यह संख्या बहुत बढ़ गई. आज भी युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोग इस रास्ते को चुन रहे हैं.
