उत्तरी इथियोपिया के सुदूर अफार डिप्रेशन (Afar Depression) में प्रकृति का एक ऐसा दुर्लभ और अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जो अमूमन लाखों-करोड़ों सालों में घटित होता है. यहां अफ्रीकी महाद्वीप धीरे-धीरे दो हिस्सों में बंट रहा है और एक नए महासागर का जन्म हो रहा है. आमतौर पर नदियों, समुद्रों और पर्वतों के निर्माण जैसी भूगर्भीय प्रक्रियाएं बहुत धीमी गति से होती हैं, लेकिन हॉर्न ऑफ अफ्रीका के पास अफार ट्राएंगल में यह बदलाव बेहद हैरान करने वाली रफ्तार से देखने को मिला है.

सितंबर 2005 में डब्बाहु ज्वालामुखी में हुए विस्फोट और उसके बाद आए तीव्र भूकंपीय झटकों ने पृथ्वी की ऊपरी परत को चीर दिया. इस दौरान जिपर की तरह खुलती हुई लगभग 60 किलोमीटर लंबी और 8 मीटर चौड़ी एक विशाल दरार महज कुछ ही दिनों के भीतर बन गई. यही नहीं, दोनों तरफ की जमीन के बीच का हिस्सा 2 मीटर तक नीचे धंस गया.


इसके बाद के कुछ महीनों में रेगिस्तान की सतह पर सैकड़ों छोटी-बड़ी दरारें उभरीं और जमीन 100 मीटर तक नीचे धंस गई. इसी दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि धरती की गहराइयों से पिघला हुआ मैग्मा ऊपर आ रहा है, जो आगे चलकर बेसाल्टिक समुद्री तल का रूप ले रहा है. भूवैज्ञानिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो लगभग 3 करोड़ साल पहले तक अफ्रीका एक ही बड़ी विवर्तनिक प्लेट (Tectonic Plate) हुआ करता था.

तब पृथ्वी के भीतर से उठे पिघले पत्थरों के तेज बहाव ने अफ्रीकी प्लेट को चीरना शुरू किया, जिससे अरब प्रायद्वीप अफ्रीका से अलग हो गया और लाल सागर का निर्माण हुआ. वर्तमान में इस अफार ट्रिपल जंक्शन पर तीन अलग-अलग प्लेटें मिलती हैं, वो हैं अरेबियन, सोमालियन और अफ्रीकी प्लेट. ये तीनों प्लेटें हर साल लगभग 1 सेंटीमीटर की गति से एक-दूसरे से दूर खिसक रही हैं.

हालिया अध्ययनों से पता चला है कि अफार और तुर्काना रिफ्ट क्षेत्र में पृथ्वी की ऊपरी परत खिंचकर बेहद पतली (लगभग 13 किमी) हो चुकी है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में नेकिंग कहा जाता है. यह इस बात का संकेत है कि महाद्वीप का विभाजन अब तय हो चुका है. जब अरेबियन और अफ्रीकी प्लेट के बीच का यह गैप पर्याप्त बड़ा हो जाएगा, तो लाल सागर और अदन की खाड़ी का पानी इस नए डिप्रेशन में समा जाएगा.

दोनों महासागर आपस में मिलकर एक विशाल नए महासागर का निर्माण करेंगे. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस पूरी प्रक्रिया को मुकम्मल होने में लगभग 50 लाख से 1 करोड़ साल का समय लगेगा. आमतौर पर नए समुद्री तल बनने की प्रक्रिया समुद्र की गहराइयों में छिपी रहती है, लेकिन अफार में यह सब धरती की सतह पर प्रत्यक्ष रूप से हो रहा है, जिससे वैज्ञानिकों को एक नए महासागर के पैदा होने का अध्ययन करने का अनूठा अवसर मिला है.

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