

गुरुग्राम से बेहद अजीब मामला सामने आया है. यहां के सिल्वर स्ट्रीक मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल में आई एक मरीज की जांच में ऐसी चीज निकली की महिला के होश उड़ गए. 25 साल से पेट के बढ़ने और मोटा होने को सूजन समझती रही महिला की आंखों के सामने जब मेडिकल जांच रिपोर्ट आई तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. उसके पेट में इतने सालों से एक ट्यूमर पल रहा था.
60 साल की महिला के पेट में 7.06 किलोग्राम वजन का ट्यूमर था. इतने साल तक इग्नोर करने के बाद जब ट्यूमर ने उसके शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करना शुरू कर दिया तो एकाएक महिला जांच के लिए अस्पताल आई और इस खतरनाक बीमारी का पता चला. हालांकि 7 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर को डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक निकाल दिया और उन्हें नया जीवन दिया है.

महिला की इस स्थिति पर डॉक्टर भी हैरान थे क्योंकि मरीज करीब 25 वर्षों से इस ट्यूमर के साथ जीवन बिता रही थी और धीरे-धीरे स्थिति गंभीर होती चली गई. अस्पताल पहुंचने तक मरीज लगातार बढ़ती पेट की सूजन, भूख न लगना, पुरानी कब्ज, पीलिया, दोनों पैरों में सूजन और असहनीय शारीरिक परेशानी से जूझ रही थी. ट्यूमर इतना बड़ा हो चुका था कि सामान्य रूप से लेटने तक में उन्हें कठिनाई होने लगी थी.


वहीं जब महिला की जांच अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीकों से की गई तो पता चला कि गर्भाशय से उत्पन्न लगभग 25×30 सेंटीमीटर आकार का यह विशाल ट्यूमर पेट के बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुका था. इसके कारण आसपास के महत्वपूर्ण अंगों पर लगातार दबाव पड़ रहा था. चिकित्सकों के अनुसार ट्यूमर ने कॉमन बाइल डक्ट को दबा दिया था और आंतों की सामान्य स्थिति भी बदल गई थी, जिससे लिवर और किडनी के कार्य प्रभावित होने लगे थे. साथ ही, लिम्फेटिक ड्रेनेज बाधित होने के कारण दोनों पैरों में गंभीर सूजन आ गई थी.
मामले की जटिलता को देखते हुए अस्पताल की विभिन्न विशेषज्ञताओं वाली टीम ने विस्तृत परीक्षण और गहन तैयारी के बाद सर्जरी का निर्णय लिया. लगभग तीन घंटे तक चली इस हाई-रिस्क सर्जरी का नेतृत्व मिनिमल एक्सेस और जीआई सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. उत्कर्ष गुप्ता ने किया. उनके साथ जनरल और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. पारस गुप्ता और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वप्निल अग्रहरी भी शामिल रहे.
डॉ. उत्कर्ष गुप्ता ने बताया कि यह बेहद चुनौतीपूर्ण मामला था क्योंकि कई साल से बढ़ रहा ट्यूमर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करने लगा था. ऐसी परिस्थितियों में सटीक योजना, विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय और उन्नत सर्जिकल तकनीक की जरूरत होती है. टीम ने पूरी सावधानी के साथ ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल लिया और मरीज की हालत भी स्थिर है.
सर्जरी के बाद मरीज को पांच दिनों तक आईसीयू में गहन निगरानी में रखा गया. उपचार के दौरान लीवर और किडनी की कार्यक्षमता में लगातार सुधार देखने को मिला, वहीं पैरों की सूजन भी काफी हद तक कम हो गई. वर्तमान में मरीज स्वस्थ होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और चिकित्सकीय निगरानी में है.
सिल्वरस्ट्रेक हॉस्पिटल्स के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर और वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. वीके गुप्ता ने कहा कि यह मामला बताता है कि किसी भी बीमारी की समय पर जांच और इलाज कितना जरूरी है. उन्होंने कहा कि अस्पताल की आधुनिक सुविधाएं, अनुभवी चिकित्सकों की टीम और बहु-विषयक उपचार पद्धति ने इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
