ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने और मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने के लिए वैज्ञानिक सालों से शोध कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी धरती पर ही एक ऐसी रहस्यमयी जगह मौजूद है, जो हूबहू मंगल ग्रह जैसी दिखाई देती है? कनाडा के आर्कटिक द्वीप समूह का हिस्सा और बाफिन खाड़ी में स्थित ‘डेवोन आइलैंड’ को दुनिया का सबसे बड़ा निर्जन द्वीप माना जाता है, जहां कोई इंसान नहीं रहता है.

इस द्वीप पर जीवन की परिस्थितियां इतनी कठिन हैं कि यहां पैर रखते ही ऐसा महसूस होता है मानो आप पृथ्वी छोड़कर किसी दूसरे ग्रह पर आ गए हों. यही कारण है कि यह बंजर और अत्यधिक ठंडा द्वीप अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण प्रयोगशाला बन चुका है.


डेवोन आइलैंड की भौगोलिक स्थिति और जलवायु इसे इंसानों के रहने के लिए पूरी तरह अयोग्य बनाती है. यहां की जमीन साल के लगभग बारह महीने बर्फ से जमी रहती है. इस आइलैंड का पूर्वी छोर का एक-तिहाई हिस्सा स्थायी रूप से 500 से 700 मीटर मोटी बर्फ की चादर से ढका हुआ है.

पूरे साल में केवल गर्मियों के दौरान मात्र 45 से 50 दिनों के लिए ही यहां से बर्फ हटती है, जब तापमान मुश्किल से 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच पाता है. यहां का औसत वार्षिक तापमान शून्य से नीचे यानी -16 डिग्री सेल्सियस रहता है. अत्यधिक ठंड और पथरीली बंजर जमीन के कारण यहां वनस्पतियों और जीवों का नामोनिशान न के बराबर है, जो इसे बिल्कुल मंगल ग्रह जैसा रेगिस्तानी माहौल देता है.

साल 2001 से यह आइलैंड एक इंटरनेशनल रिसर्च प्रोजेक्ट का केंद्र बना हुआ है, जिसे ‘हॉटन मार्स प्रोजेक्ट’ कहा जाता है. इससे जुड़े पोस्ट वायरल हो रहे हैं. वायरल पोस्ट के मुताबिक, नासा के वैज्ञानिक और दुनिया भर के शोधकर्ता यहां आकर यह अध्ययन करते हैं कि भविष्य में अंतरिक्ष यात्री मंगल ग्रह जैसे प्रतिकूल वातावरण में कैसे जीवित रहेंगे और काम करेंगे.

नासा के अनुसार, डेवोन आइलैंड का अकेलापन, बेहद कम तापमान, सुदूर भौगोलिक स्थिति और सीमित संचार व्यवस्था अंतरिक्ष यात्रियों को लंबी दूरी की अंतरिक्ष उड़ानों के दौरान आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करती है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य केंद्र फ्लैशलाइन मार्स आर्कटिक रिसर्च स्टेशन (FMARS) है, जो हॉटन इम्पैक्ट क्रेटर के ठीक पास एक पहाड़ी पर स्थित है.

यह विशाल क्रेटर करीब 3.9 करोड़ साल पहले एक बड़े उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण बना था, जिसकी चौड़ाई 23 किलोमीटर है. यह टक्कर इतनी भीषण थी कि जमीन के 1.7 किलोमीटर नीचे की चट्टानें सतह पर आ गई थीं. इस क्रेटर की भूगर्भीय संरचनाएं आज भी वैसी ही हैं जैसी मंगल ग्रह के गड्ढों की होती हैं.

हालांकि, इस ठंडे द्वीप के एक हिस्से में जीवन की थोड़ी झलक भी देखने को मिलती है. गर्मियों के 50 दिनों में यहां जमी बर्फ पिघलती है, जिससे उगने वाली काई को खाकर मस्क-ऑक्सिन (एक प्रकार का जंगली मवेशी) पूरे साल जीवित रहते हैं. यहां की गीली मिट्टी में कुछ कीड़े-मकोड़े और पक्षियों की आबादी भी पाई जाती है.

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