



रायपुर| छत्तीसगढ़ में संगठन की मशीनरी में नई जान फूंकने और जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह सक्रिय करने के इरादे से भाजपा ने स्मृति ईरानी की बतौर प्रभारी तैनाती की है। यह निर्णय सिर्फ एक रूटीन सांगठनिक बदलाव नहीं है, बल्कि इसके पीछे केंद्रीय नेतृत्व का एक बड़ा राजनीतिक गणित छिपा है।
हालिया आम चुनाव में अमेठी से झटका लगने के बाद स्मृति को छत्तीसगढ़ का जिम्मा सौंपना यह साबित करता है कि हाईकमान को उनकी आक्रामक शैली, संवाद कला और प्रबंधन क्षमता पर पूरा भरोसा है। राज्य के बदलते सियासी माहौल में स्मृति की यह आमद पार्टी के लिए हर लिहाज से एक टर्निंग प्वाइंट मानी जा रही है।

स्मृति ईरानी की राजनीतिक पृष्ठभूमि और अनुभव की पूंजी
स्मृति ईरानी भारतीय राजनीति का ऐसा चर्चित नाम हैं, जिन्होंने बहुत ही कम समय में संगठन से लेकर केंद्रीय सत्ता तक अपनी मजबूत धमक बनाई है। दिल्ली और महाराष्ट्र से शुरुआती संबंध रखने वाली स्मृति ने राष्ट्रीय पटल पर उत्तर प्रदेश के अमेठी क्षेत्र से अपनी पहचान को स्थापित किया, जहाँ उन्होंने एक बेहद मजबूत माने जाने वाले राजनीतिक गढ़ में सेंध लगाकर इतिहास रचा था।
केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने मानव संसाधन विकास, कपड़ा, सूचना एवं प्रसारण और महिला एवं बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाला है। इसके अतिरिक्त वे राज्यसभा में गुजरात का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा महिला मोर्चा का नेतृत्व करने से लेकर गुजरात, गोवा और उत्तर-पूर्वी प्रदेशों में चुनावी मोर्चे पर उनकी सक्रियता का फायदा पार्टी को लगातार मिलता रहा है। उनका यह विस्तृत अनुभव छत्तीसगढ़ में संगठन को एक नई दिशा देने में काफी कारगर साबित होगा।
महिला वोट बैंक पर दोबारा फोकस
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की धमाकेदार जीत में ‘महतारी वंदन योजना’ को एक गेमचेंजर की तरह देखा गया था। इस योजना के तहत राज्य की लाखों महिलाओं के खातों में भेजी गई नियमित वित्तीय मदद ने आधी आबादी को पूरी तरह भाजपा के साथ जोड़ दिया था। चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया कि प्रदेश में सत्ता की चाबी महिला मतदाताओं के पास ही है।
इसी प्रभाव को बनाए रखने और महिला वोट बैंक में अपनी पकड़ को स्थायी रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से भाजपा ने स्मृति ईरानी जैसे प्रखर राष्ट्रीय चेहरे पर दांव लगाया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय संभालने के अपने पूर्व अनुभव के चलते स्मृति महिला मोर्चे में नई ऊर्जा का संचार करेंगी, वहीं सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और निगरानी को भी और अधिक धार मिल सकेगी.
छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाने के राजनीतिक मायने
आदिवासी बाहुल्य और अलग-अलग सामाजिक समीकरणों वाले छत्तीसगढ़ में स्मृति ईरानी की नियुक्ति का सीधा अर्थ यह है कि भाजपा संगठन और सरकार के बीच एक मजबूत तालमेल कायम रखना चाहती है। अपनी बेबाक और हमलावर भाषण शैली के लिए जानी जाने वाली स्मृति विपक्षी खेमे से उठने वाले हर सवाल का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं।
उनके आने से मैदानी स्तर के कैडर में जबरदस्त उत्साह पैदा होगा। महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता से पार्टी का जनाधार और मजबूत होगा। इसके साथ ही, दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व से उनके सीधे संपर्क का लाभ प्रदेश संगठन को अपने फैसलों को तेजी से लागू करने में मिलेगा।
प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ रणनीतिक तालमेल
छत्तीसगढ़ भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन और नवनियुक्त प्रभारी स्मृति ईरानी का समन्वय एक बेहतरीन सांगठनिक तालमेल तैयार करता है। नितिन नबीन बिहार से ताल्लुक रखने वाले एक युवा और अनुशासित नेता हैं, जिन्हें प्रभारी रहते हुए छत्तीसगढ़ के भूगोल और सांगठनिक नेटवर्क की बारीकी से समझ हासिल हो चुकी है।
वहीं दूसरी ओर, स्मृति ईरानी के पास राष्ट्रीय राजनीति का लंबा अनुभव और बड़ा जनसमर्थन मौजूद है। दोनों ही रणनीतिकार परिणाम देने वाली कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। नितिन नबीन की जमीनी कार्यकर्ताओं तक पहुंच और स्मृति का व्यापक अनुभव मिलकर पार्टी को एक अभेद्य ताकत देंगे, जिससे आंतरिक असंतोष खत्म होगा और फैसले त्वरित गति से लिए जा सकेंगे।
सन 2000 से अब तक के प्रभारियों का सफरनामा
वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से ही भाजपा ने हमेशा भारी-भरकम सांगठनिक क्षमता वाले नेताओं को ही यहां का प्रभार सौंपा है। शुरुआती दौर में प्यारेलाल खंडेलवाल और सौदान सिंह जैसे दिग्गजों ने राज्य में पार्टी की जड़ें जमाने का काम किया, जिसके दम पर डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में 15 सालों तक भाजपा का शासन रहा।
इसके बाद जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान, डॉ. अनिल जैन और पिछले चुनावों में ओम माथुर जैसे बड़े रणनीतिकारों ने कमान संभाली। ओम माथुर की सूक्ष्म रणनीति के दम पर ही पार्टी ने 2023 में सत्ता में शानदार वापसी की। यह इतिहास इस बात का गवाह है कि जब भी किसी राष्ट्रीय कद के नेता को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी मिली है, संगठन अनुशासन के साथ मजबूत हुआ है और इसका सीधा फायदा चुनावों में मिला है।
भविष्य की रणनीति और छत्तीसगढ़ भाजपा का नया दौर
स्मृति ईरानी की यह नई जिम्मेदारी यह स्पष्ट संदेश देती है कि भाजपा आगामी पंचायत चुनावों, नगरीय निकायों और 2028 के आम चुनावों के लिए अभी से पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुकी है। उनके आने से कार्यकर्ताओं का मनोबल तो बढ़ा ही है, साथ ही साय सरकार की उपलब्धियों को हर घर तक पहुंचाने और विपक्ष की रणनीति को पछाड़ने का पूरा खाका तैयार हो चुका है। इस नए और अनुभवी मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ भाजपा अब एक नई आक्रामक राजनीतिक दिशा की ओर कदम बढ़ा रही है।
