पर्यावरण को बचाने, फिटनेस बढ़ाने और ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के नाम पर चीन में शुरू हुआ बाइक-शेयरिंग का दौर कुछ ही सालों में एक भयानक आफत में बदल गया. आज चीन के कई शहरों के बाहर और खाली मैदानों में लाखों-करोड़ों रंग-बिरंगी साइकिलों के ऐसे विशालकाय पहाड़ खड़े नजर आते हैं, जिन्हें देखकर लगता है मानो किसी ने साइकिलों का कोई बहुत बड़ा कब्रिस्तान बना दिया हो. यहां का मंजर देखने के बाद कोई भी हैरान हो जाए. इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं.

यह खौफनाक और हैरान कर देने वाली कहानी शुरू हुई डॉकलेस बाइक-शेयरिंग के ट्रेंड से. इस व्यवस्था के तहत कोई भी नागरिक अपने स्मार्टफोन ऐप के जरिए सड़क किनारे खड़ी किसी भी साइकिल को अनलॉक करके इस्तेमाल कर सकता था और अपनी मंजिल पर पहुंचकर उसे किसी भी जगह खड़ी करके छोड़ सकता था.


शुरुआत में लोगों को यह किसी वरदान जैसा लगा, क्योंकि इससे वे बेहद कम खर्च में भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक परिवहन से बचकर अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच जाते थे. लेकिन जल्द ही मुनाफा कमाने की होड़ में चीन में 70 से ज्यादा प्राइवेट बाइक-शेयरिंग कंपनियां मैदान में कूद पड़ीं. इन कंपनियों ने चीन की सड़कों पर लगभग 1.6 करोड़ से ज्यादा चमचमाती नई साइकिलें उतार दीं और देखते ही देखते यूजर्स की संख्या 13 करोड़ पार कर गई. सप्लाई इतनी ज्यादा बढ़ गई कि मांग बहुत पीछे छूट गई.

चीन के कई बड़े शहर इस अचानक आई साइकिलों की सुनामी को संभालने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे. नतीजा यह हुआ कि फुटपाथ, सड़कें, पार्किंग लॉट और मेट्रो स्टेशन अवैध रूप से पार्क की गई साइकिलों से भर गए. लोग साइकिल इस्तेमाल करने के बाद उसे कहीं भी फेंक कर चले जाते थे. जगह-जगह टूटी-फूटी और आपस में उलझी हुई साइकिलों के ढेर लगने लगे.

स्थिति तब और ज्यादा भयावह हो गई जब ब्लूगोगो जैसी चीन की सबसे बड़ी बाइक-शेयरिंग कंपनियां रातों-रात दिवालिया होकर बंद हो गईं. उनके ऐप्स ने काम करना बंद कर दिया और वेबसाइट्स ठप पड़ गईं. लाखों की संख्या में साइकिलें सड़ांध और तबाही का शिकार होकर लावारिस सड़कों पर ही छूट गईं. लोगों ने उन्हें नुकसान पहुंचाना और तोड़ना शुरू कर दिया.

स्थानीय प्रशासन और नगर निगमों के पास जब कोई रास्ता नहीं बचा, तो उन्होंने इन लावारिस साइकिलों को जब्त करके शहर के बाहर बड़े-बड़े मैदानों में डंप करना शुरू कर दिया. दक्षिण-पूर्वी चीन के शियामेन शहर जैसे कई इलाकों में इन साइकिलों का अंबार 30 से 40 फीट ऊंचे पहाड़ जैसा दिखने लगा.

आसमान से देखने पर रंग-बिरंगे कबाड़ के ये ढेर किसी जादुई कलाकृति जैसे लगते हैं, लेकिन असल में यह इंसानी लालच और बेलगाम कॉर्पोरेट होड़ का एक खौफनाक स्मारक हैं. अब चीनी प्रशासन, आम जनता और बची हुई कंपनियां इस भारी तबाही से सबक सीखकर नियमों को कड़ा कर रही हैं, ताकि दोबारा कभी ऐसा साइकिलों का कब्रिस्तान न बन सके. इतना ही नहीं, 2018 के मुकाबले अब इन कबाड़ों को धीरे-धीरे करके हटाया भी जा रहा है, जिससे काफी संख्या में साइकिल के मलबे कम हो चुके हैं.

Share on

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *