बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में दो नाबालिग बहनों के अपहरण और दुष्कर्म से जुड़े दो मामलों में न्यायालय ने आरोपी सनत साहू को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास सहित अलग-अलग धाराओं में कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोनों मामलों में पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत भी दोषसिद्धि हुई है।

न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को पीड़िताओं को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने का आदेश भी दिया है। दोषी की पहचान सनत साहू पिता गोकुल साहू, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम कचलोन, थाना सिमगा, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के रूप में हुई है।


वर्ष 2022 में दर्ज हुई थी पहली गुमशुदगी

पुलिस के अनुसार, थाना सिमगा में वर्ष 2022 में एक नाबालिग बालिका की गुमशुदगी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर बालिका को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और उसका दैहिक शोषण किया। इसके बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब अगस्त 2024 में आरोपी पर पीड़िता की छोटी बहन को भी झांसे में लेकर अपने साथ ले जाने का आरोप सामने आया। दोनों पीड़िताओं के अनुसूचित जाति वर्ग से होने के कारण प्रकरणों में पॉक्सो एक्ट के साथ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं।

महाराष्ट्र में दबिश देकर बालिकाओं को किया बरामद

मामले दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी और बालिकाओं की तलाश तेज की। पुलिस टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर से मिली सूचनाओं के आधार पर महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में दबिश दी। पुलिस के मुताबिक योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाकर दोनों बालिकाओं को सुरक्षित बरामद किया गया और बाद में उन्हें परिजनों के सुपुर्द किया गया।

उम्र साबित करने में स्कूल रिकॉर्ड बना अहम साक्ष्य

मामले की विवेचना में पीड़िताओं की उम्र का निर्धारण महत्वपूर्ण था। पुलिस विवेचकों ने स्कूल के मूल दाखिल-खारिज यानी प्रवेश रजिस्टर और शैक्षणिक प्रगति पत्रों को जब्त कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इन दस्तावेजों को अदालत में उम्र से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में पेश किया गया।

पुलिस के मुताबिक पीड़िताओं का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और आवश्यक नमूने एकत्र करने सहित अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद निर्धारित समयावधि में अभियोग पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। विशेष लोक अभियोजक संजय बाजपेयी के साथ समन्वय करते हुए अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से जुड़े साक्ष्य अदालत में पेश किए गए।

पहले मामले में आजीवन कारावास

विशेष प्रकरण क्रमांक 71/2024, जो थाना सिमगा के अपराध क्रमांक 443/2022 से संबंधित है, में आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 और 376(2)(n), पॉक्सो एक्ट की धारा 5(L)/6 तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत दोषी ठहराया गया।

न्यायालय ने एससी/एसटी एक्ट के तहत आजीवन कारावास और पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 366 के तहत पांच वर्ष और धारा 363 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास सहित अर्थदंड लगाया गया। आदेश के अनुसार सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

दूसरे मामले में भी उम्रकैद की सजा

विशेष प्रकरण क्रमांक 72/2024, थाना सिमगा के अपराध क्रमांक 293/2024 में आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87 और 65(1), पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत दोषी ठहराया गया।

इस मामले में भी एससी/एसटी एक्ट के तहत आजीवन कारावास और पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास सुनाया गया। बीएनएस की धारा 87 के तहत पांच वर्ष और धारा 137(2) के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास एवं अर्थदंड लगाया गया। ये सजाएं भी साथ-साथ चलेंगी।

पीड़िताओं को क्षतिपूर्ति देने का आदेश

न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत दोनों पीड़िताओं को नियमानुसार क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने का आदेश दिया है। बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने आम नागरिकों और अभिभावकों से बच्चों की सुरक्षा एवं गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि किसी बच्चे के लापता होने या संकट में होने की स्थिति में तत्काल नजदीकी पुलिस थाने अथवा डायल-112 को सूचना दी जाए।

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