



Weight Loss History: आजकल मोटापा घटाने के लिए लोग जिम जाते हैं, कीटो डाइट करते हैं, इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाते हैं या Ozempic जैसी दवाएं लेते हैं. लेकिन सौ साल पहले, खासकर 19वीं सदी के विक्टोरियन युग में, खूबसूरत और पतली दिखने की चाहत में महिलाएं अपनी जान दांव पर लगा देती थीं.
वजन घटाने का उनका तरीका इतना खतरनाक था कि इससे उनकी जान भी जा सकती थी. उनका तरीका था– टेपवर्म (Tapeworm) के अंडे निगलना. जी हां, विक्टोरियन काल में पतली कमर को आइडियल माना जाता था. महिलाएं corset (कसावट वाले कपड़े) पहनकर कमर को 18-20 इंच तक कस लेती थीं, लेकिन जब यह भी काफी नहीं होता तो वे टेपवर्म डाइट अपनाती थी.

वे कैप्सूल या गोलियों के रूप में टेपवर्म के अंडे निगल लेती थी. पेट में अंडे से लार्वा निकलता और कीड़ा बड़ा होने लगता था. यह टेपवर्म (Taenia saginata या Taenia solium) इंसान के आंतों में रहकर मेजबान का पोषण चूसता था. नतीजा– भूख कम लगती, पोषक तत्व कम अवशोषित होते और वजन तेजी से घटता था. एक कीड़ा 30 फीट (लगभग 9 मीटर) तक लंबा हो सकता था.
कैसे काम करता था यह तरीका?
टेपवर्म आंतों की दीवार से चिपक जाता था और मेजबान के खाए गए भोजन का पोषण सोख लेता था. महिलाएं कम खाती थीं लेकिन कीड़ा बड़ा होता जाता था. कुछ महिलाएं दावा करती थीं कि इससे उनकी कमर पतली हो गई और वे आकर्षक दिखने लगीं थी. लेकिन ये तरीका काफी खतरनाक और दुष्परिणाम से भरा होता था.
बेहद खतरनाक था तरीका
वजन घटाने का ये तरीका काफी खतरनाक था. इससे महिलाओं में गंभीर कुपोषण हो जाता था. इसके अलावा आंतों में ब्लॉकेज हो जाती थी. कई बार मस्तिष्क में संक्रमण तक हो जाता था. एनीमिया, कमजोरी, उल्टी, दस्त आदि इसके कॉमन साइड इफेक्ट्स थे. कई मामलों में महिला की मौत भी हो जाती थी. लेकिन आकर्षक फिगर की चाहत में कई महिलाएं ये रिस्क लेती थीं.
विक्टोरियन युग का सौंदर्य मानक
उस समय पतली काया को स्टेटस सिंबल माना जाता था. अमीर महिलाएं फैशन के चक्कर में अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रही थीं. अखबारों और विज्ञापनों में टेपवर्म कैप्सूल बेचे जाते थे. कुछ कंपनियां इन्हें “Sanitary Tapeworm” के नाम से बेचती थीं. आज यह तरीका पूरी तरह गैरकानूनी और खतरनाक माना जाता है. डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि पैरासाइट्स से वजन घटाना जानलेवा हो सकता है. WHO भी टेपवर्म संक्रमण को गंभीर समस्या मानता है.
