
छत्तीसगढ़ में आज भी दशकों पुरानी परंपराएं निभाई जाती हैं. रायगढ़ जिले में विवाह से जुड़ी एक ऐसी ही अनोखी परंपरा चली आ रही है. यहां राठिया परिवार में जब कोई दुल्हन आती है, तो उसे पति के साथ जलते हुए अंगारों पर चलना पड़ता है. यह अग्निपरीक्षा परिवार की पहचान बन चुकी है. जिले के भूपदेवपुर स्थित बिलासपुर गांव में राठिया परिवार रहता है.
कुछ दिनों पहले बिलासपुर के जयप्रकाश राठिया की शादी हुई थी. बाड़ादरहा गांव में उनकी शादी हुई. बारात जब घर लौटी, तो इस अनूठी रस्म का आयोजन किया गया. नवदंपति को घर में प्रवेश से पहले जलते अंगारों पर सात फेरे लेने पड़े. यह रस्म देखने के लिए ज्यादातर गांववाले वहां मौजूद रहे थे.

दूल्हे जयप्रकाश के पिता मेहत्तर राठिया ने इस परंपरा के बारे में बताते हुए कहा कि दुल्हन के घर आने से पहले पूरा परिवार व्रत रखता है. इस व्रत में परिजन पानी तक नहीं पीते हैं. गांव पहुंचने पर नवदंपति का स्वागत किया जाता है. उन्हें नए वस्त्र, आभूषण आदि भेंट किए जाते हैं. इसके बाद हमारी दशकों पुरानी परंपरा की तैयारी की जाती है. मंडप को सभी तरफ से ढक दिया जाता है.


अवतरित हुए देवता
परंपरा की प्रक्रिया शुरू होते ही मेहत्तर राठिया पर देवता अवतरित हुए. उन्होंने चूल्हे से जलते हुए अंगार लाकर मंडप के चारों ओर बिछा दिए. वह खुद दहकते अंगारों पर नृत्य करने लगे. इसके बाद नवदंपति ने एक-दूसरे का हाथ थामकर अंगारों पर चलते हुए सात फेरे लिए.
रस्म के पीछे गहरी आस्था
मेहत्तर राठिया ने कहा कि उनके परिवार की इस रस्म के पीछे गहरी आस्था है. यह अग्निपरीक्षा नवदंपति के शुरू हो रहे नए रिश्ते और पवित्रता की मजबूत नींव मानी जाती है. वहीं परिवार के लोग इसे देवी-देवता की कृपा पाने से भी जोड़ते हैं. ऐसा माना जाता है कि नवदंपति अग्नि पर चल जीवन की मुश्किलों को सहने और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ निभाने का संकल्प लेते हैं.
रस्म में जोखिम
राठिया परिवार की यह अनूठी रस्म पीढ़ी दर पीढ़ी निभाई जा रही है और आज भी युवा इसे निभाने में जरा भी नहीं हिचकिचाते हैं. हालांकि इस तरह की रस्मों में जोखिम भी होता है लेकिन परिवारों के लिए यह उनकी पहचान और संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुकी है, जिसके आगे जोखिम छोटा शब्द नजर आता है.
