



जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में 32 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर थाना पुलिस ने मध्य प्रदेश के इंदौर से दो आरोपियों सौम्य जैसवार और देवराज अमकरे को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर CBI और टेलीकॉम अधिकारी बनकर एक बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने का डर दिखाकर ठगी करने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बुजुर्ग को 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर अपने नियंत्रण में रखा। इस दौरान उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और पुलिस से सेटिंग कराने के नाम पर डराया गया। इसी बहाने आरोपियों ने कथित तौर पर 32 लाख रुपये की ठगी की।
CBI और टेलीकॉम अधिकारी बनकर बनाया दबाव
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, ठगों ने खुद को जांच एजेंसी और टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को विश्वास में लिया। इसके बाद कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे रकम ऐंठी। डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का ऐसा तरीका है, जिसमें ठग वीडियो कॉल या फोन के जरिए गिरफ्तारी का झूठा डर दिखाकर पीड़ित को लगातार अपने संपर्क में रखते हैं और पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाते हैं।

मोबाइल और दस्तावेज जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, आधार कार्ड और पैन कार्ड जब्त किए हैं। इन दस्तावेजों के जरिए ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और अन्य संभावित कड़ियों की जांच की जा रही है। इस मामले में पुलिस पहले ही पंजाब से एक आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है।
अब इंदौर से दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ठगी के पूरे नेटवर्क और रकम के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। साइबर थाना पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पुलिस की जांच में आगे यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर की गई और इस वारदात में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
