


दुनिया के ज्यादातर देश महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा मानते हैं. उनकी सुरक्षा के लिए कई प्लान्स बनाए जाते हैं और कदम भी उठाए जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में वो कौन सा देश है, जहां पुरुष भी असुरक्षित हैं. हम बात कर रहे हैं यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका की, जहां 1 लाख में 12.3 प्रतिशत मर्द असॉल्ट का सामना करते हैं.
जब बात सुरक्षा की आती है तो ज्यादातर देशों में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है. कानून, योजनाएं और अभियान सब महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का एक ऐसा विकसित देश भी है जहां पुरुष खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं और अपनी पीड़ा छुपाकर रखते हैं? यह देश है अमेरिका.

अमेरिका में पुरुषों पर होने वाले यौनिक हमले, घरेलू हिंसा और शारीरिक असॉल्ट के मामले कम नहीं हैं, लेकिन रिपोर्टिंग दर बेहद कम है. शर्म, समाज के दबाव और “मर्द कभी रोता नहीं” वाली सोच के कारण ज्यादातर पुरुष पुलिस में शिकायत दर्ज ही नहीं कराते. नतीजा? वे चुपचाप अपना दर्द सहते रहते हैं और खून के आंसू रोते हैं.
चौंकाने वाले आंकड़े
विभिन्न अध्ययनों के अनुसार अमेरिका में पुरुषों पर यौनिक हिंसा के मामले रिपोर्टेड तो कम होते हैं, लेकिन वास्तविक संख्या काफी ज्यादा है. लाइफटाइम में कई पुरुष किसी ना किसी रूप में शारीरिक या यौनिक हिंसा का शिकार होते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुष पीड़ितों में से सिर्फ 10-20% ही अपनी घटना रिपोर्ट करते हैं. बाकी चुप रह जाते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि लोग उनकी मर्दानगी पर सवाल उठाएंगे. अमेरिका में घरेलू हिंसा के मामलों में भी पुरुष पीड़ितों की संख्या नजरअंदाज नहीं की जा सकती है. कई मामलों में पुरुष अपनी पत्नी या पार्टनर द्वारा शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न सहते हैं, लेकिन शर्म के मारे चुप रहते हैं.
क्यों नहीं करते कंप्लेन?
मर्दानगी का बोझ: समाज पुरुषों से हमेशा मजबूत रहने की उम्मीद रखता है. अगर कोई पुरुष पीड़ित बन जाता है तो उसे कमजोर समझा जाता है.
पुलिस और समाज का रवैया: कई बार पुलिस भी पुरुष शिकायतकर्ता को गंभीरता से नहीं लेती. लोग मजाक उड़ाते हैं.
स्टिग्मा: यौनिक शोषण का शिकार पुरुष होने पर पुरुषों को और ज्यादा शर्मिंदगी महसूस होती है.
डर: परिवार, दोस्तों और समाज के सामने इज्जत खोने का डर.
दुनिया के अन्य देशों की स्थिति
अमेरिका के अलावा कुछ अन्य देशों में भी पुरुषों की स्थिति चिंताजनक बताई जाती है, लेकिन विकसित देश होने के कारण अमेरिका में रिपोर्टिंग गैप ज्यादा चर्चा में रहता है. कई यूरोपीय देशों में भी पुरुष घरेलू हिंसा के शिकार होते हैं, लेकिन कानूनी और सामाजिक समर्थन महिलाओं की तुलना में कम मिलता है. विशेषज्ञों का कहना है कि हिंसा किसी की भी हो, उसे गंभीरता से लेना चाहिए. पुरुष पीड़ितों के लिए भी हेल्पलाइन, काउंसलिंग और सपोर्ट ग्रुप्स की जरूरत है. कुछ संगठन जैसे SAVE (Stop Abusive and Violent Environments) पुरुषों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं. अमेरिका जैसे देश में जहां महिला सुरक्षा पर करोड़ों खर्च होते हैं, वहीं पुरुषों की सुरक्षा और उनकी पीड़ा को भी उसी महत्व के साथ देखना चाहिए.
