



हिमालय की बर्फीली और सुनसान चोटियों पर एक बहुत ही अनोखा और रहस्यमयी ‘डायमंड’ उगता है. ये इतना बड़ा होता है कि इंसान से भी ऊंचा निकल जाता है. सुनने में ये भले ही किसी पौराणिक कहानी जैसा लगे, लेकिन कुदरत का ये करिश्मा कोई पत्थर नहीं, बल्कि एक बेहद कीमती फूल है. इसे ‘हिमालयन डायमंड’ कहा जाता है. समुद्र तल से करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर उगने वाला यह फूल रोज-रोज नजर नहीं आता. ये जमा देने वाली ठंड को 7 से 15 साल तक सहता है और अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ एक ही बार खिलता है. पहाड़ों में ट्रेकिंग करने वालों के लिए इस खिलते हुए फूल को देखना किसी बहुत बड़े सौभाग्य से कम नहीं होता.
‘केनजो’ या ‘पदमचाल’ कैसे खिलता है?
स्थानीय लोग इस अनोखे पौधे को ‘केनजो’ या ‘पदमचाल’ कहते हैं. यह आम रंग-बिरंगे जंगली फूलों जैसा बिल्कुल नहीं दिखता. पहाड़ों के पथरीले ढलानों और ग्लेशियरों के पास उगने वाला ये पौधा बेहद सब्र वाला है.

ये रातों-रात या हर मौसम में नहीं उगता. इसे खिलने में 7 से 15 साल का लंबा वक्त लगता है. इतने सालों तक ये पौधा बर्फीली चट्टानों में खुद को बचाकर रखता है, फिर अपनी जिंदगी में केवल एक बार खिलता है. जैसे ही फूल खिलता है, ये अपने बीज हवा में बिखेर देता है और फिर इसका जीवन खत्म हो जाता है.
इसे क्यों कहते हैं ‘हिमालयन डायमंड’?
- गजब की ताकत: हीरा दुनिया की सबसे सख्त चीज मानी जाती है. ठीक वैसे ही ये फूल धरती के सबसे कठिन मौसम में मुस्कुराता है. इतनी ऊंचाई पर जहां ऑक्सीजन 40 फीसदी तक कम होती है और हाड़-कांपने वाली हवाएं चलती हैं, वहां यह सीना ताने खड़ा रहता है.
- कुदरती शील्ड: इस फूल के चारों तरफ पारदर्शी पत्तियों की एक परत होती है. ये धूप की गर्मी को अंदर सोख लेती है और बर्फीली हवाओं को रोकती है. बर्फ के बीच जब धूप इस पर पड़ती है तो ये बिल्कुल हीरे की तरह जगमगाता है.
अगर आप इस अजूबे को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं तो जुलाई के अंत से सितंबर की शुरुआत का समय सबसे अच्छा माना जाता है. मानसून में जब पहाड़ियों पर हल्की बारिश और धुंध होती है, तब ये पौधे खिलते हैं.
कहां-कहा पाया जाता है ये रहस्यमयी फूल?
- वैली ऑफ फ्लावर्स (उत्तराखंड): यूनेस्को की इस विश्व धरोहर में जुलाई और अगस्त के महीने में यह दुर्लभ पौधा देखा जा सकता है.
- हेमकुंड साहिब और गंगोत्री: हेमकुंड के कठिन रास्तों और गोमुख-तपोवन की घाटियों में जहां का मौसम बेहद सख्त होता है, वहां ये केनजो उगता है.
- नॉर्थ सिक्किम: लाचेन, लाचुंग और जीरो पॉइंट जैसे बेहद ऊंचे इलाकों में भी इसके खिलने की खबरें आती हैं.
- भूटान का हिमालय: हाल ही में माउंट जोमोलहारी के बेस कैंप (4,300 मीटर) पर वैज्ञानिकों ने इसकी शानदार तस्वीरें ली हैं.
हिमालय के वैद्यों और स्थानीय लोगों के लिए ये पौधा किसी वरदान से कम नहीं है. सदियों से इसका इस्तेमाल जड़ी-बूटी के रूप में होता आ रहा है.
- हड्डियों के फ्रैक्चर और गहरे जख्मों को भरने में
- सिरदर्द और शरीर की सूजन कम करने में
- पेट दर्द और बदहजमी से राहत दिलाने में
- खतरे में है ‘हिमालयन डायमंड’
ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते तापमान की वजह से ऊंचे पहाड़ों का बर्फीला माहौल बदल रहा है. इस वजह से ‘हिमालयन डायमंड’ के उगने की जगहें लगातार कम हो रही हैं. इसलिए पर्यावरण विशेषज्ञ पर्यटकों से अपील करते हैं कि अगर वो इस दुर्लभ फूल को देखें तो इसे सिर्फ दूर से निहारें. इसे तोड़ने या नुकसान पहुंचाने की भूल बिल्कुल न करें, क्योंकि इसे उगने में कई साल लगते हैं.
