



प्रकृति जब अपने रौद्र रूप में आती है, तो इंसानी सभ्यता और बड़े से बड़े शहर पल भर में तिनके की तरह बिखर जाते हैं. ऐसा ही एक खौफनाक नजारा 2 मई 2008 की सुबह दक्षिण अमेरिकी देश चिली में देखने को मिला. चिली के चैतेन (Chaiten) शहर से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक ज्वालामुखी लगभग 10,000 सालों की गहरी नींद के बाद अचानक भड़क उठा.
इस भयंकर विस्फोट से आसमान में 17 किलोमीटर ऊपर तक राख का विशाल गुबार उठने लगा, जिसने देखते ही देखते पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले लिया. उस समय शहर में करीब 4,000 लोग रहते थे, जिन्हें आनन-फानन में सुरक्षित बाहर निकाला गया. ज्वालामुखी का यह तांडव अगले कई दिनों तक जारी रहा और राख का गुबार 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया.

राख की यह मोटी परत चिली, अर्जेंटीना से होती हुई अटलांटिक महासागर तक फैल गई. शुरुआत में शहर को सीधा नुकसान नहीं पहुंचा था, लेकिन इसके बाद हुई मूसलाधार बारिश ने तबाही की पूरी पटकथा लिख दी. बारिश का पानी ज्वालामुखी के मुहाने पर जमा राख और कीचड़ को बहाकर चैतेन नदी में ले आया. कीचड़ के जमाव (लाहार) के कारण नदी का जलस्तर भर गया और 12 मई को नदी के तटबंध टूट गए.
तटबंध टूटते ही उफनती नदी ने अपना पुराना रास्ता छोड़कर सीधे शहर के बीचों-बीच नया रास्ता बना लिया. कीचड़, राख और पानी का यह सैलाब अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को निगलता चला गया. देखते ही देखते पूरा शहर कीचड़ के मलबे में समा गया, इमारतें ढह गईं, सड़कें धंस गईं और गाड़ियां ताश के पत्तों की तरह बह गईं.
राहत की बात यह रही कि पूरे शहर को पहले ही खाली करा लिया गया था, जिसकी वजह से किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई. आपदा के सालों बाद भी चैतेन शहर का एक हिस्सा कीचड़ की मोटी परत के नीचे दबा हुआ है. हालांकि, इस तबाही के बाद एक बेहद हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला.
आपदा में बचे हुए हिस्से में रहने वाले लोगों ने इस बर्बाद और छोड़ दिए गए हिस्से को ही अपनी कमाई का जरिया बना लिया. आज दुनिया भर से पर्यटक इस ‘दफन हुए शहर’ का नजारा देखने आते हैं, जिससे यहां का पर्यटन उद्योग फल-फूल रहा है. सरकार ने शुरुआत में इस शहर को किसी दूसरी जगह बसाने का प्लान बनाया था, लेकिन स्थानीय लोगों ने अपनी जगह छोड़ने से इनकार कर दिया.
आज नया चैतेन शहर उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है, लेकिन खतरा अभी भी टला नहीं है. नया बसाया जा रहा हिस्सा असल में ज्वालामुखी के और ज्यादा करीब है. फरवरी 2009 और साल 2011 में इस ज्वालामुखी में दोबारा छोटे-बड़े विस्फोट हुए थे, जो आज भी हल्के झटकों के साथ लोगों को आने वाले खतरे की चेतावनी दे रहे हैं.
