


दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जहां प्राचीन मंदिरों के निशान मिले हैं. कई देशों में तो बड़े-बड़े मंदिर भी हैं. लेकिन एक ऐसा देश है, जहां एक भी मंदिर नहीं है. हिंदुओं को अपने भगवान को घर के अंदर ही याद करने और उनकी पूजा करने की अनुमति है. ये देश है सऊदी अरब.
भारत में आप किसी भी जगह चले जाइये, आपको मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा मिल जाएगा. इस हिंदू प्रधान देश में हर धर्म को अपने भगवान को याद करने की इजाजत है. भारत में तो मुस्लिम सड़कों पर भी नमाज अदा करते नजर आ जाते हैं. लेकिन इस्लाम की पवित्र भूमि कहे जाने वाले सऊदी अरब में एक भी हिंदू मंदिर, चर्च या किसी अन्य गैर-मुस्लिम पूजा स्थल का अस्तित्व नहीं है.

लाखों भारतीय हिंदू यहां काम करते हैं लेकिन उन्हें अपने भगवान को याद करने के लिए सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित रहना पड़ता है. पब्लिक में कोई भी धार्मिक गतिविधि, मूर्ति पूजा या आस्था प्रदर्शन सख्ती से वर्जित है. विकिपीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार सऊदी अरब इस्लामिक थियोक्रेसी है जहां इस्लाम राज्य धर्म है. गैर-मुस्लिमों को सार्वजनिक रूप से पूजा करने की अनुमति नहीं है. हिंदू, ईसाई, सिख या अन्य किसी भी समुदाय के लिए मंदिर, चर्च या गुरुद्वारा बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. केवल निजी घरों में चुपचाप पूजा की जा सकती है, वह भी तब जब किसी की नजर ना पड़े.
कैसे पूजा करते हैं हिंदू?
देश में करीब 7 लाख से ज्यादा हिंदू हैं जो मुख्य रूप से निर्माण, आईटी और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं. ये लोग त्योहार मनाते समय भी सावधानी बरतते हैं. दीवाली, होली या शिवरात्रि जैसे पर्व घर के अंदर ही सीमित रह जाते हैं. कई बार धार्मिक किताबें या मूर्तियां रखने पर भी मुश्किलें आ जाती हैं. सऊदी सरकार का कहना है कि देश दो पवित्र मस्जिदों (मक्का और मदीना) का संरक्षक है इसलिए यहां सिर्फ इस्लाम का प्रभुत्व रहेगा.
गैर-मुस्लिमों द्वारा प्रोस्लाइटाइजिंग (धर्म परिवर्तन करवाना) या सार्वजनिक पूजा पर भारी सजा का प्रावधान है. धार्मिक पुलिस (मुतावा) कभी-कभी निजी पूजा पर भी छापा मार देती है. दुनिया में कई देशों में प्राचीन हिंदू मंदिरों के अवशेष मिले हैं. इंडोनेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड जैसे देशों में भव्य मंदिर हैं. लेकिन सऊदी अरब में ऐसा कुछ नहीं है.
यहां तक कि पुरातात्विक खुदाई में भी इस्लाम से पहले के किसी मंदिर का जिक्र बहुत कम या संवेदनशील माना जाता है. हिंदू समुदाय के लोग बताते हैं कि वे छोटी-छोटी मूर्तियां घर में रखकर पूजा करते हैं. कुछ लोग वीडियो कॉल के जरिए भारत में परिवार के साथ पूजा में शामिल होते हैं. लेकिन खुले में भजन-कीर्तन या हवन करना असंभव है.
सिर्फ इस्लाम को महत्व
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट्स में सऊदी अरब को बार-बार ‘Country of Particular Concern’ माना गया है. यूएस स्टेट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट्स भी कहती हैं कि गैर-मुस्लिमों के लिए धार्मिक आजादी बेहद सीमित है. कोई भी सार्वजनिक पूजा स्थल बनाने की अनुमति नहीं दी जाती. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कुछ सुधार हुए हैं.
महिलाओं को ड्राइविंग का अधिकार, सिनेमा हॉल खुलने जैसे बदलाव आए हैं लेकिन धार्मिक नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा है. अब भी गैर-मुस्लिम पूजा स्थलों पर पूर्ण प्रतिबंध है. भारत से सऊदी अरब जाने वाले हिंदू युवा पहले से ही इस हकीकत से वाकिफ रहते हैं. वे वहां जाकर सिर्फ कमाने और वापस लौटने का प्लान बनाते हैं. लेकिन लंबे समय तक रहने वाले परिवारों के लिए त्योहार और धार्मिक अनुष्ठान करना चुनौती भरा होता है. कुछ देशों जैसे यूएई, बहरीन और ओमान में हिंदू मंदिर बन चुके हैं और हिंदू समुदाय को पूजा की छूट है. लेकिन सऊदी अरब में अभी भी सख्त नियम लागू है.
