



जंगल की दुनिया बाहर से जितनी शांत दिखाई देती है, अंदर से उतनी ही दिलचस्प होती है. यहां हर जानवर का अपना इलाका और अपना अंदाज होता है. कोई जमीन पर दौड़ता है, कोई पानी में रहता है तो कोई पेड़ों को ही अपना घर बना लेता है. इन्हीं में एक ऐसा बंदर भी है, जो जंगल के पेड़ों पर इधर-उधर घूमता रहता है और अपनी तेज आवाज से दूर तक अपनी मौजूदगी का एहसास कराता है.
ऐसा लगता है जैसे वह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक घूमते हुए पूरे जंगल पर अपनी नजर रख रहा हो. इस बंदर को हॉलर मंकी (Howler Monkey) कहा जाता है. इसकी सबसे बड़ी पहचान इसका शरीर नहीं, बल्कि इसकी बेहद तेज और गहरी आवाज है. शांत जंगल में जब यह बंदर जोर से आवाज लगाता है तो उसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दे सकती है. कई बार इसकी आवाज सुनकर ऐसा लगता है जैसे जंगल में कोई बड़ा जानवर दहाड़ रहा हो.

आवाज से लगता है जैसे जंगल पर इसका राज हो
हॉलर मंकी की आवाज इतनी अलग और तेज होती है कि जब यह जोर से पुकारता है तो आसपास का पूरा जंगल उसकी आवाज से गूंज उठता है. खासकर शांत वातावरण में इसकी आवाज काफी दूर तक पहुंच सकती है. कई बार एक समूह के बंदर एक साथ आवाज लगाने लगते हैं. ऐसे में जंगल में चारों तरफ से गहरी और तेज आवाज सुनाई देती है.
दूर से सुनने पर ऐसा लग सकता है कि कोई बड़ा और खतरनाक जानवर जंगल में घूम रहा है, जबकि असल में आवाज पेड़ पर बैठे छोटे से बंदर की होती है. हॉलर मंकी को उसकी तेज आवाज के कारण ही यह नाम मिला है. ‘Howler’ का मतलब ही जोर से आवाज करने वाला होता है. इसकी आवाज शांत परिस्थितियों में कई किलोमीटर तक सुनाई दे सकती है और कुछ रिपोर्टों में इसकी आवाज करीब 5 किलोमीटर तक पहुंचने की बात कही जाती है. हालांकि आवाज कितनी दूर तक जाएगी, यह जंगल की बनावट, हवा और आसपास के शोर जैसी परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है
आखिर इतनी तेज आवाज निकालने की जरूरत क्यों पड़ती है?
हॉलर मंकी की तेज आवाज सिर्फ शोर मचाने के लिए नहीं होती. यह उसके लिए बातचीत करने का एक तरीका है. जंगल में अलग-अलग समूहों के बंदर एक-दूसरे से काफी दूरी पर रह सकते हैं. ऐसे में हर बार उनके लिए पास जाकर संपर्क करना आसान नहीं होता. इसलिए वो तेज आवाज के जरिए दूसरे समूहों तक अपना संदेश पहुंचाते हैं.
इससे उन्हें यह पता लगाने में भी मदद मिल सकती है कि आसपास दूसरे बंदरों का कोई समूह मौजूद है या नहीं. हॉलर मंकी की आवाज का संबंध उसके इलाके से भी होता है. जब कोई समूह जोर-जोर से आवाज लगाता है तो यह दूसरे समूहों को अपनी मौजूदगी का संकेत दे सकता है. सीधे शब्दों में कहें तो यह आवाज एक तरह से बताती है कि इस इलाके में पहले से एक समूह मौजूद है. इस तरह दूर रहने वाले समूह बिना एक-दूसरे के पास आए भी अपनी मौजूदगी का पता लगा सकते हैं.
छोटे शरीर में इतनी ताकतवर आवाज कैसे?
हॉलर मंकी की सबसे हैरान करने वाली बात यही है कि उसका शरीर किसी बड़े शिकारी जानवर जैसा नहीं होता, फिर भी उसकी आवाज बहुत गहरी और तेज होती है. इसके गले और आवाज पैदा करने वाली शारीरिक बनावट इसमें बड़ी भूमिका निभाती है. हॉलर मंकी में बढ़ी हुई हायॉइड हड्डी और खास वोकल संरचना होती है. यह उसकी आवाज को ज्यादा गहरा और गूंजदार बनाने में मदद करती है. यानी प्रकृति ने इस बंदर को बिना बड़ा शरीर दिए ही ऐसी आवाज दी है, जिससे उसकी मौजूदगी दूर तक महसूस हो जाती है.
पत्तियां और फल खाकर रहता है पेड़ों पर
हॉलर मंकी का जीवन पूरी तरह पेड़ों से जुड़ा हुआ है. यह पेड़ों की पत्तियां, फल और दूसरी वनस्पतियां(Vegetation) खाता है. पेड़ों की शाखाओं पर ही वह आराम करता है, घूमता है और अपने समूह के साथ समय बिताता है. इसी कारण जंगल में पेड़ों की कमी इनके लिए बड़ी समस्या बन सकती है. जंगल कटने पर इन्हें रहने की जगह के साथ-साथ भोजन की भी परेशानी हो सकती है.
दिखाई न दे, फिर भी आवाज से पता चल जाता है
हॉलर मंकी की सबसे खास पहचान उसकी आवाज ही है। जंगल में अगर यह पेड़ों के बीच छिपा हुआ हो, तब भी उसकी जोरदार पुकार से उसकी मौजूदगी का अंदाजा लगाया जा सकता है. एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक घूमते हुए और लगातार अपने समूह के साथ संपर्क बनाए रखते हुए यह बंदर जंगल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाए रखता है. आकार में सामान्य दिखने वाला यह बंदर जब जोर से आवाज लगाता है, तो उसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है. यही वजह है कि हॉलर मंकी को जंगल के सबसे अनोखे और तेज आवाज वाले बंदरों में गिना जाता है.
