लोग नए और अनोखे अनुभवों की तलाश में अलग-अलग देशों की संस्कृति को करीब से समझने के लिए अलग-अलग जगह घूमने जाता है. लेकिन हाल के समय में एक ऐसा अनोखा और थोड़ा हैरान करने वाला ट्रेंड सामने आया है, जिसमें लोग पैसे देकर जेल का जीवन जीने का अनुभव ले रहे हैं. सुनने में यह अजीब जरूर लगता है, लेकिन भारत के कुछ जेल प्रशासन ने पुराने और खाली पड़े हिस्सों को इस तरह विकसित किया है कि आम लोग वहां जाकर एक दिन के लिए “कैदी जैसा जीवन” महसूस कर सकें.

इस अनोखे प्रयोग में कुछ चुनिंदा जेलों में लोगों को अस्थायी रूप से कैदी की तरह रहने का मौका दिया जाता है. इसके लिए उन्हें एक तय शुल्क देना होता है. बदले में उन्हें जेल जैसा माहौल, कपड़े, खाना और दिनचर्या दी जाती है. हालांकि वे असली कैदी नहीं होते, लेकिन उन्हें वही अनुभव देने की कोशिश की जाती है जैसा एक कैदी को जेल में महसूस कराया जाता है.


हल्द्वानी जेल में अनोखा अनुभव

उत्तराखंड की हल्द्वानी जेल (Haldwani Jail) इस प्रयोग के लिए काफी चर्चा में रही है. यहां जेल के पुराने और खाली हिस्से को इस तरह तैयार किया गया है कि आम लोग एक दिन के लिए वहां रुक सकें. आने वाले लोगों को अलग-अलग सेल(Shell) में रखा जाता है, उन्हें जेल जैसी ड्रेस पहनाई जाती है और भोजन भी जेल की रसोई से ही मिलता है. पूरा वातावरण ऐसा बनाया जाता है कि व्यक्ति को असली जेल जैसा अनुभव हो सके. इस सुविधा का उद्देश्य लोगों को एक नया अनुभव देना बताया जाता है.

कितनी है एंट्री फीस?

हल्द्वानी के इस जेल में एक दिन रुकने के लिए करीब 500 रुपये लिया जाता है. इस पहल का उद्देश्य लोगों को एक अनोखा अनुभव देना है. इसे अक्सर “डमी जेल एक्सपीरियंस” भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें व्यक्ति असली कैदी नहीं होता, लेकिन उसे जेल जैसा ही माहौल और दिनचर्या महसूस कराई जाती है.

तेलंगाना की संगारेड्डी जेल का “Feel the Jail” प्रोग्राम

तेलंगाना के मेदक जिले की संगारेड्डी जेल भी इसी तरह के एक खास प्रयोग के लिए प्रसिद्ध है. यहां पुराने केंद्रीय जेल को म्यूजियम में बदलकर “Feel the Jail” नाम का कार्यक्रम शुरू किया गया है. इसमें लोग 24 घंटे तक जेल का जीवन जी सकते हैं. इस अनुभव में लोगों को खादी के जेल यूनिफॉर्म दिए जाते हैं, स्टील की प्लेट और बिस्तर उपलब्ध कराए जाते हैं और उन्हें जेल की रोजमर्रा की दिनचर्या अपनानी होती है. लोग बैरक साफ करते हैं, पौधे लगाते हैं और तय समय पर ही खाना खाते हैं. इससे उन्हें असली जेल जैसा ही सब कुछ लगता है.दिल्ली की तिहाड़ जेल में भी पहले कुछ समय के लिए ऐसा प्रयोग किया गया था, जहां कुछ हिस्सों को “टूरिस्ट सेल” के रूप में इस्तेमाल किया गया. इसका उद्देश्य लोगों को जेल के जीवन के बारे में बताने का था.

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