Heaven Lake Mystery: दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जो अपने अंदर गहरे रहस्य समेटे हुए हैं. ऐसी ही एक अद्भुत जगह हेवन लेक है. यह चीन और नॉर्थ कोरिया के बॉर्डर पर मौजूद एक बेहद खूबसूरत क्रेटर लेक है. यह माउंट चांगबाईशान ज्वालामुखी के बिल्कुल टॉप पर स्थित है. यह ज्वालामुखी पिछले 26 लाख सालों में हुए कई विस्फोटों के बाद बना था.

यूनेस्को के अनुसार यह नॉर्थ ईस्ट एशिया की सबसे ऊंची और बड़ी क्रेटर लेक है. मार्च में पब्लिश हुई एक स्टडी के मुताबिक, यह चीन की सबसे गहरी झील भी है. यह लेक करीब 7200 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है. इसका कुल एरिया 9.2 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है. इस झील की अधिकतम गहराई 1224 फीट दर्ज की गई है. हेवन लेक को चीन में तियांची के नाम से जाना जाता है. यह लेक माउंट चांगबाईशान की 16 पहाड़ियों से पूरी तरह घिरी हुई है.


ज्वालामुखी के बड़े धमाके से कैसे बनी थी यह रहस्यमय झील?

यह झील एक काल्डेरा में बनी है जो पुराने ज्वालामुखी विस्फोटों से बना था. इसमें सबसे बड़ा धमाका 946 ईस्वी में हुआ था. इसे ‘मिलेनियम इरप्शन’ कहा जाता है और यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े विस्फोटों में से एक है. प्रागैतिहासिक काल में तियानवेनफेंग विस्फोट के बाद इस पहाड़ की चोटी पर पानी जमा होना शुरू हुआ था.

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह घटना 70 हजार से 40 हजार साल पहले हुई थी. तब से हेवन लेक का पानी कई बार खाली हुआ और फिर भर गया. ऐसा बारिश और बर्फ पिघलने के कारण होता है. इसके अलावा ज्वालामुखी के नीचे एक एक्टिव जियोथर्मल सिस्टम भी मौजूद है. यह सिस्टम फॉल्ट लाइन के जरिए पानी को काफी तेजी से ऊपर धकेलता है.

क्या इस गहरी झील के अंदर सच में कोई खूंखार दानव रहता है?

साल 2000 के दशक की शुरुआत में इस झील को लेकर कई बड़े दावे किए गए थे. सैकड़ों रिपोर्ट्स में कहा गया था कि इस पानी में एक अजीब जानवर रहता है. लोगों का दावा था कि इस जीव का सिर घोड़े के आकार का है. लेकिन वैज्ञानिकों ने इन दावों पर हमेशा अपना शक जताया है. उनका मानना है कि हेवन लेक जैसी जगह पर किसी भी बड़े जीव का जिंदा रहना लगभग नामुमकिन है.

यूनेस्को के मुताबिक, माउंट चांगबाईशान दुनिया के सबसे अच्छे संरक्षित स्ट्रैटोवोल्केनो में से एक है. इसे ‘ओपन एयर क्लासरूम’ भी कहा जाता है क्योंकि यहां कई विस्फोटों के अलग-अलग चरणों की डिटेल मौजूद है.

इस झील को लेकर चीन और नॉर्थ कोरिया के बीच क्यों हुआ था विवाद?

नॉर्थ कोरिया में माउंट चांगबाईशान को माउंट पेक्टू के नाम से भी जाना जाता है. इसका मतलब सफेद चोटी वाला पहाड़ होता है. वहीं इसके चीनी नाम का अर्थ हमेशा सफेद रहने वाला पहाड़ है. अतीत में इस ज्वालामुखी को लेकर चीन और नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच विवाद हो चुके हैं. यह पहाड़ इन तीनों देशों के लिए सांस्कृतिक और जियोपॉलिटिकल महत्व रखता है.

साल 1962 और 1964 में चीन और नॉर्थ कोरिया के बीच दो बॉर्डर ट्रीटी हुई थीं. इन संधियों ने ज्वालामुखी और हेवन लेक को लगभग बीच से बांट दिया था. इससे नॉर्थ कोरिया को झील का 54.5 प्रतिशत हिस्सा मिल गया था. बाद में चीन ने इस इलाके का विकास शुरू कर दिया. चीन ने देश के बाकी हिस्सों से इसे जोड़ने के लिए एयरपोर्ट और रेलवे लाइन भी शुरू कर दी.

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