

CG Ebola Virus Alert: छत्तीसगढ़ के दुर्ग से चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। जहां दुनिया के सबसे जानलेवा वायरसों में से एक इबोला के तीन मामले सामने आए हैं। वायरस के तीन संदिग्ध जिले में मिलने की सूचना के बाद से स्वस्थ विभाग और प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है।
साथ ही कांगो, इथोपिया, और युगांडा से आए इन तीनों लोगों की पहचान की गई है, जिनकी निगरानी के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके साथ ही दुर्ग जिले में कांगो, इथियोपिया और युगांडा से आए 3 अंतर्राष्ट्रीय यात्री निगरानी में रखा गया है, तीनों यात्रियों को 21 दिन के लिए होम आइसोलेशन में रखा गया है।

तीनों संदिग्धों के जिले में आने के पुष्टि
बता दें दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने तीनों संदिग्धों के जिले में आने के पुष्टि की है। साथ ही यह भी बताया है की इंटेरटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम से सूचना मिलने के बाद से ही स्वस्थ विभाग को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वही आला अधिकारियों से कहा गया है की संबंधित व्यक्तियों को तरके कर उनकी स्वस्थ निगरानी सुनिश्चित की जाए साथ ही जरूरत के हिसाब से आइसोलेशन में रखा जाए।


कांगो, इथोपिया, और युगांडा से आए संदिग्ध
मौजूदा जानकारी के मुताबिक इथोपिया और युगांडा से आए दो संदिग्ध अलग-अलग एयरपोर्ट के जरिए सीधे दुर्ग पहुंचे हैं। वहीं कांगो से आया एक व्यक्ति पहले मुंबई पहुंचा और वहां से दुर्ग के लिए रवाना हुआ। तीनों की ट्रैवल हिस्ट्री और स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल तीनों व्यक्तियों में इबोला जैसे गंभीर लक्षण सामने नहीं आए हैं। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश में इबोला संदिग्धों का यह पहला मामला माना जा रहा है, इसलिए प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
क्या है इबोला वायरस?
इबोला एक अत्यंत संक्रामक और जानलेवा वायरस है, जो संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, शरीर के अन्य तरल पदार्थों या संक्रमित वस्तुओं के संपर्क में आने से फैल सकता है। यह बीमारी मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों में देखी गई है और कई बार बड़े प्रकोप का कारण बन चुकी है।
इबोला के प्रमुख लक्षण
- अचानक तेज बुखार
- अत्यधिक कमजोरी
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- सिरदर्द
- गले में खराश
- गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव
विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पहचान और आइसोलेशन से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग तीनों संदिग्धों की लगातार निगरानी कर रहा है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
इबोला कैसे फैलता है
इबोला एक अत्यंत संक्रामक वायरस है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीने, आंसू, बलगम, मूत्र, मल, वीर्य और स्तन के दूध के संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुओं या दूषित सतहों को छूने से भी वायरस फैल सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इबोला कोविड-19 की तरह हवा के जरिए फैलने वाली बीमारी नहीं है। यह मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति या उसके शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। लक्षण विकसित होने से पहले संक्रमित व्यक्ति से संक्रमण फैलने की संभावना काफी कम होती है, लेकिन बीमारी बढ़ने के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
इबोला की पहचान और इलाज कैसे होता है
इबोला की पुष्टि मरीज के यात्रा इतिहास, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क और प्रयोगशाला जांच के आधार पर की जाती है। यदि कोई व्यक्ति इबोला प्रभावित देशों की यात्रा कर चुका है या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया है तो उसे उच्च जोखिम की श्रेणी में रखा जाता है। वर्तमान में इबोला के कुछ स्ट्रेन के इलाज के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी आधारित दवाओं का उपयोग किया जाता है, लेकिन सभी प्रकार के वायरस के लिए प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में मरीजों को सहायक उपचार दिया जाता है, जिसमें IV फ्लूड, ऑक्सीजन सपोर्ट, रक्तचाप नियंत्रण और अन्य जरूरी चिकित्सकीय सहायता शामिल होती है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी कुछ ही दिनों में जानलेवा साबित हो सकती है।
इबोला से बचाव के लिए क्या करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित देशों की यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बार-बार हाथ धोना, सैनिटाइजर का उपयोग करना, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचना और किसी भी प्रकार के शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क में आने से बचना बेहद जरूरी है। यदि प्रभावित क्षेत्र की यात्रा के बाद बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त या रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
रायपुर एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी
दुर्ग में तीन संदिग्धों के पहुंचने की सूचना के बाद रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग और एयरपोर्ट प्रशासन अंतरराष्ट्रीय यात्रा इतिहास वाले यात्रियों पर विशेष नजर रख रहे हैं। प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया पहले से जारी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल स्वास्थ्य जांच और आइसोलेशन की व्यवस्था की जाएगी।
दुनिया में अब तक कितने मामले और मौतें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार इबोला वायरस की खोज 1976 में हुई थी। तब से लेकर अब तक अफ्रीका के कई देशों में इसके कई प्रकोप सामने आ चुके हैं। अब तक दुनिया भर में इबोला के 40 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 16 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
साल 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैले इबोला प्रकोप को इतिहास का सबसे बड़ा प्रकोप माना जाता है, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी। इबोला की मृत्यु दर कई प्रकोपों में 50 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक दर्ज की गई है, इसलिए इसे दुनिया की सबसे घातक वायरल बीमारियों में गिना जाता है।
