
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग के अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर अब सख्ती बढ़ने वाली है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने प्रदेश के सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को कड़ा पत्र जारी कर ऐसे शासकीय सेवकों के खिलाफ प्रभावी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
DPI द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 14 मई 2024 को जारी परिपत्र के अनुसार अनाधिकृत अनुपस्थिति और कर्तव्य विमुखता को गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा। इसके तहत मूलभूत नियम-18 और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-7 के अनुसार तत्काल कार्रवाई करना अनिवार्य होगा।

पत्र में कहा गया है कि ऐसे शासकीय सेवक जो बिना अनुमति एक माह या उससे अधिक अवधि तक अनुपस्थित रहते हैं, उनकी अनुपस्थिति की अवधि को सेवा में व्यवधान माना जाएगा। यह व्यवधान पेंशन, उपादान और अन्य सेवा लाभों पर भी प्रभाव डालेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कर्मचारियों को किसी प्रकार का अवकाश भी स्वीकृत नहीं किया जाएगा।


DPI ने निर्देश दिए हैं कि एक माह से अधिक समय तक अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत “दीर्घ शास्ति” की कार्रवाई शुरू की जाए। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित कर्मचारी को सेवा से हटाने अथवा पदच्युत करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग ने यह भी कहा है कि अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित कर्मचारियों को उनके अंतिम ज्ञात पते और अवकाश काल के पते पर नोटिस भेजा जाए। नोटिस में 15 दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने कहा जाएगा कि उनकी अनुपस्थिति को सेवा में व्यवधान मानते हुए सेवा पुस्तिका में दर्ज क्यों न किया जाए। विभाग ने साफ किया है कि सेवा में व्यवधान का अर्थ पेंशन सहित पूर्व सेवाओं के लाभों पर भी असर पड़ना होगा।
तीन वर्ष से अधिक अवधि तक लगातार अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के संबंध में भी DPI ने कड़ा रुख अपनाया है। पत्र में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2010 और मूलभूत नियम-18 का हवाला देते हुए कहा गया है कि तीन वर्ष से अधिक लगातार अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारी को सेवा से त्यागपत्र दिया हुआ माना जा सकता है, जब तक कि राज्यपाल विशेष परिस्थितियों में अन्यथा निर्णय न लें।
DPI ने यह भी स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच के दौरान ऐसे कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से निलंबित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि बाद में वे निलंबन भत्ते की मांग करते हैं। इसके बजाय सीधे विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। संचालनालय ने संभागीय संयुक्त संचालकों को निर्देश दिया है कि वे अपने स्तर पर सभी प्रस्तावों का सूक्ष्म परीक्षण कर तथ्यात्मक जानकारी और स्पष्ट अभिमत के साथ संचालनालय को भेजें।
साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि शासन के निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित कार्यालय प्रमुख और पर्यवेक्षक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। DPI ने सभी जिलों और संभागों को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्र में अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित कर्मचारियों की समीक्षा कर जल्द प्रतिवेदन संचालनालय को भेजें।
पत्र में यह भी कहा गया है कि ऐसी स्थिति न आए कि संचालनालय को दोबारा स्मरण पत्र जारी करना पड़े। शिक्षा विभाग के इस सख्त रुख के बाद प्रदेशभर के अधिकारियों और कर्मचारियों में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विभाग में अनुपस्थित और कर्तव्य विमुख कर्मचारियों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई देखने को मिल सकती है।


