
दुनिया का सबसे निडर और बहादुर जानवर है– हनी बैजर, जिसे हिंदी में बिज्जू या रेटल भी कहा जाता है. Guinness World Records ने इसे आधिकारिक रूप से दुनिया का सबसे निडर जानवर घोषित किया है. ये छोटा सा जीव अपने से कई गुना बड़े जानवरों से बिना झिझके भिड़ जाता है. हनी बैजर की लंबाई सिर्फ 60 से 70 सेंटीमीटर होती है और वजन 9 से 16 किलो के बीच. लेकिन इसकी हिम्मत देखकर बड़े-बड़े शिकारी भी डर जाते हैं.
नहीं लगता किसी से डर
इसका वैज्ञानिक नाम Mellivora capensis है. ये अफ्रीका, दक्षिण-पश्चिम एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है. भारत में इसे मुख्य रूप से मध्य और पश्चिमी राज्यों के जंगलों में देखा जाता है, जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कुछ हिस्सों में. इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसकी मोटी और ढीली त्वचा.

त्वचा की मोटाई लगभग 6 मिलीमीटर होती है, जो इतनी लचीली है कि शेर के दांत, सांप का डंक या बिच्छू का विष भी आसानी से अंदर नहीं घुस पाता. अगर कोई सांप काट भी ले तो जहर का असर इस पर बहुत कम होता है. कई बार ये कोबरा या पफ एडर जैसे जहरीले सांपों से लड़ते हुए बेहोश हो जाता है, लेकिन कुछ घंटों बाद उठकर फिर से हमला बोल देता है और सांप को अपना शिकार बना लेता है.


बिज्जू का आहार बेहद विविध है. ये शहद, मधुमक्खियों के लार्वा, चूहे, पक्षी, अंडे, जड़ें और फल खाता है. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि ये बिच्छू को नाश्ते की तरह खा जाता है. जहरीले बिच्छू का डंक लगने पर भी ये घबराता नहीं है. साथ ही ये कोबरा सांपों का शिकार करता है. नेशनल ज्योग्राफिक और अन्य वाइल्डलाइफ डॉक्यूमेंट्री में कई बार दिखाया गया है कि हनी बैजर कोबरा से लड़ रहा है और आखिरकार जीत हासिल कर रहा है.
शेर भी डरते हैं इससे
हनी बैजर शेरों के झुंड को भी भगा देता है. शेर भी इसकी बहादुरी देखकर पीछे हट जाते हैं. मगरमच्छ तक से इसकी लड़ाई की कहानियां मशहूर है. ये मगरमच्छ के घोंसले में घुसकर अंडे खा लेता है और कभी-कभी मगरमच्छ से भी दो-दो हाथ कर लेता है. भारत में बिज्जू को कब्र बिज्जू भी कहा जाता है क्योंकि ये कभी-कभी मृत जानवरों को भी खा लेता है. ये रात में सक्रिय रहता है और मजबूत पंजों की मदद से 20-30 फीट लंबे बिल खोद लेता है.
इसकी त्वचा इतनी लचीली है कि अगर कोई जानवर इसे पकड़ ले तो ये अपनी त्वचा को मोड़कर आसानी से निकल भागता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार हनी बैजर की निडर प्रकृति एक survival mechanism है. अफ्रीकी सवाना जैसे कठिन इलाकों में छोटे आकार के कारण इसे बड़े शिकारियों से बचना पड़ता है, इसलिए इसने हिम्मत और आक्रामकता को अपना हथियार बनाया है. इसकी त्वचा ना सिर्फ डंक और काट से बचाती है बल्कि जहर के प्रति आंशिक प्रतिरोधक क्षमता भी पैदा करती है.
