
इतिहास के पन्नों में कानून और व्यवस्था के कई हैरान करने वाले रूप मिलते हैं, जहां संसाधनों की कमी होने पर सजा के लिए बेहद सख्त रास्ते निकाल लिए जाते थे. आज हम आपको अपराधियों के लिए काल रहे एक ऐसे 200 साल पुराने पेड़ के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां अपराधियों को लोहे की जंजीरों में बांधकर सजा दी जाती थी. उन्हें पेड़ से तबतक बांधकर रखा जाता था, जब तक कि शेरिफ यानी स्थानीय पुलिस अधिकारी नहीं आ जाता. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह पेड़ है कहां और ऐसे सजा देने का मकसद क्या था?
ऐसे में बता दें कि अमेरिकी प्रांत एरिजोना के विकेनबर्ग में यह 200 साल पुराना मेसकाइट का पेड़ स्थित है. यह इस बात का गवाह है कि जब किसी शहर के पास अपनी स्थानीय जेल की इमारत नहीं होती थी, तो कुदरत के इन विशाल पेड़ों को ही मुजरिमों के अस्थायी कैदखाने’ में बदल दिया जाता था.

यह कोई काल्पनिक किस्सा नहीं, बल्कि उस दौर की जमीनी हकीकत थी जब पकड़े गए अपराधियों को तब तक इस पेड़ से लोहे की भारी जंजीरों में जकड़कर रखा जाता था, जब तक कि मुख्य शहर फीनिक्स से शेरिफ उन्हें अपनी कस्टडी में लेने के लिए नहीं पहुंच जाता था. विंकलबर्ग उस दौर में सोने की खानों की वजह से तेजी से उभर रहा था, लेकिन कहा जाता है कि यहां सब कुछ था सिवाय चर्च और जेल के.


ऐसे में जब भी कोई अपराधी पकड़ा जाता, तो उसे भारी जंजीरों की मदद से इस पेड़ के मोटे तने से बांध दिया जाता था. अपराधी को वहां तब तक जकड़ कर रखा जाता था, जब तक कि फीनिक्स से शेरिफ उसे लेने के लिए विंकलबर्ग नहीं पहुंच जाता. इस प्रक्रिया में अक्सर दो से पांच दिन का समय लग जाता था और मुजरिम को दिन-रात खुले आसमान के नीचे इसी पेड़ के भरोसे काटनी पड़ती थी.
पर्यटकों के लिए आकर्षण और अनोखा कैदी!
आज यह जेल ट्री विंकलबर्ग के सबसे चर्चित पर्यटक स्थलों में से एक है. पेड़ के पास एक आदमकद मूर्ति लगाई गई है, जो एक उदास कैदी की है, जिसे लोहे की भारी जंग लगी जंजीर से पेड़ से बांधा गया है. यह मूर्ति उस दौर की खौफनाक यादों को जीवंत करती है. पेड़ के पास लगे एक बोर्ड पर लिखा है कि आज तक इस पेड़ रूपी जेल से कोई भी अपराधी भागने में सफल नहीं रहा.
हालांकि, कड़कती धूप और रात के सन्नाटे में जंजीरों से बंधे रहना किसी भी अपराधी के लिए मौत की सजा से कम नहीं रहा होगा. जैसे-जैसे यह कहानी मशहूर हुई, इसके सच होने पर भी सवाल उठने लगे. साल 1930 के दशक में विंकलबर्ग में रहने वाली एक महिला ने दावा किया कि यह पूरी कहानी मनगढ़ंत है.
उनके मुताबिक, उस दौर में माता-पिता अपने बच्चों को डराने और उन्हें अनुशासन में रखने के लिए इस पेड़ की झूठी कहानियां सुनाते थे. उन्होंने एक वेबसाइट पर ईमेल के जरिए बताया कि असल में ऐसी कोई आधिकारिक जेल व्यवस्था नहीं थी और यह सिर्फ एक लोककथा है जो वक्त के साथ ‘सच’ मान ली गई.
भले ही इसे लेकर विवाद हो, लेकिन विंकलबर्ग के लोग आज भी इस पेड़ को अपनी विरासत का हिस्सा मानते हैं. यह पेड़ गवाह है उस दौर का जब कानून व्यवस्था आज जैसी विकसित नहीं थी और सजा देने के तरीके काफी अजीब हुआ करते थे. आज भी यहां आने वाले पर्यटक उस जंजीर को छूकर उस दौर की कल्पना करने की कोशिश करते हैं, जब एक पेड़ ही अपराधियों की आखिरी मंजिल हुआ करता था.
