धरती पर नदियों और समुद्रों के अलावा लाखों झीलें भी मौजूद हैं. कुछ झीलें इतनी छोटी हैं कि उन्हें आसानी से नजरअंदाज किया जा सकता है, तो कुछ का आकार इतना बड़ा है कि उन्हें देखकर समुद्र होने का भ्रम होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी झील का नाम कैस्पियन सागर है? नाम में भले ही ‘सागर’ जुड़ा हो, लेकिन इसे दुनिया की सबसे बड़ी झील माना जाता है.

इसकी विशालता, खारा पानी और इसके आसपास बसे देशों की वजह से यह झील बाकी झीलों से बिल्कुल अलग है. कैस्पियन सागर दुनिया की सबसे बड़ी झील है और यह 3 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैली हुई है. इसका आकार इतना बड़ा है कि कई देशों के क्षेत्रफल से इसकी तुलना की जा सकती है.


यह यूरोप और एशिया के बीच स्थित है और इसका फैलाव देखकर पहली नजर में इसे समुद्र समझना बिल्कुल स्वाभाविक है. इसकी सीमा पांच देशों से लगती है. इनमें रूस, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ईरान और अजरबैजान शामिल हैं. यानी कैस्पियन सागर सिर्फ एक बड़ी झील ही नहीं, बल्कि कई देशों के लिए भौगोलिक और आर्थिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है.

नाम में सागर, फिर भी झील क्यों?

कैस्पियन सागर को लेकर सबसे दिलचस्प बात यही है कि इसके नाम में सागर है, लेकिन इसे झील माना जाता है. इसका मुख्य कारण यह है कि यह किसी महासागर से सीधे जुड़ा हुआ नहीं है. यह एक बंद जल निकाय(Water body) है, यानी इसका पानी सीधे किसी महासागर में नहीं जाता. हालांकि, यह कोई सामान्य झील नहीं है. इसका आकार बहुत बड़ा है और इसका पानी भी मीठा नहीं, बल्कि खारा है.

यही वजह है कि इसका नाम और इसकी पहचान लोगों को हमेशा भ्रमित करती है. कैस्पियन सागर में कई नदियां आकर मिलती हैं, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा पानी वोल्गा नदी से आता है. माना जाता है कि कैस्पियन सागर में आने वाले पानी का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा वोल्गा नदी से आता है.

इतनी बड़ी नदी से पानी आने के बावजूद कैस्पियन सागर का पानी खारा है. इसकी वजह इसका बंद जल निकाय होना और पानी का बाहर निकलने का प्राकृतिक रास्ता नहीं होना है. पानी के वाष्पीकरण(Evaporation) के कारण इसमें मौजूद नमक और दूसरे खनिज पीछे रह जाते हैं.

1000 मीटर से भी ज्यादा गहरा है दक्षिणी हिस्सा

कैस्पियन सागर सिर्फ क्षेत्रफल के मामले में ही विशाल नहीं है, बल्कि इसकी गहराई भी काफी ज्यादा है. इसका दक्षिणी हिस्सा(Southern part) 1,000 मीटर से भी ज्यादा गहरा बताया जाता है. कैस्पियन सागर के अलग-अलग हिस्सों में गहराई काफी अलग है. इसका उत्तरी हिस्सा(Northern part)अपेक्षाकृत उथला है, जबकि दक्षिणी हिस्से में पानी काफी गहरा है. यही भौगोलिक विविधता इसे और भी खास बना देती है.

यहां रहती है अनोखी कैस्पियन सील

कैस्पियन सागर में कई ऐसी जीव-जंतुओं की प्रजातियां पाई जाती हैं, जो दुनिया के दूसरे हिस्सों में नहीं मिलतीं. इनमें सबसे खास कैस्पियन सील है. कैस्पियन सील को दुनिया की एकमात्र सील प्रजाति माना जाता है जो पूरी तरह एक अंदरूनी जल क्षेत्र में रहती है. यह प्रजाति कैस्पियन सागर के पर्यावरण के लिए बेहद खास है.

इसके अलावा यहां कई तरह की मछलियां और दूसरे जीव भी पाए जाते हैं. कैस्पियन सागर के उत्तरी हिस्से में वोल्गा नदी का डेल्टा भी काफी खास है. यह इलाका कई तरह के प्रवासी पक्षियों और मछलियों के लिए महत्वपूर्ण जगह है. डेल्टा के आसपास की जमीन में नमी काफी ज्यादा रहती है.

इस वजह से यहां कई जीवों के लिए रहने और प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बनता है. हर साल कई प्रवासी पक्षी भी इस क्षेत्र में पहुंचते हैं. हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञ इस पूरे क्षेत्र को लेकर चिंतित भी हैं. जलवायु परिवर्तन का असर यहां के पानी, जीव-जंतुओं और आसपास के प्राकृतिक वातावरण पर पड़ सकता है.

तेल और गैस के बड़े भंडार भी हैं

कैस्पियन सागर सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता और जीव-जंतुओं के कारण ही खास नहीं है. इसके नीचे तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार भी मौजूद हैं. इसी वजह से कैस्पियन सागर आर्थिक और रणनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है. इसके आसपास मौजूद देश लंबे समय से यहां मौजूद प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करते रहे हैं. तेल और गैस के अलावा समुद्र की सीमाओं और संसाधनों को लेकर भी इन देशों के बीच बातचीत होती रही है. आखिरकार, इतनी बड़ी जलराशि और उसके नीचे मौजूद संसाधनों पर अधिकार कई देशों के लिए बेहद अहम हैं.

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