दुर्ग। जिले के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र में सामने आए संगठित लोन फ्रॉड का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। कम EMI का लालच देकर युवाओं के नाम पर महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराने और बाद में उन्हें अपने कब्जे में लेने के इस मामले में अब पीड़ितों की संख्या बढ़कर करीब 200 हो गई है।

मामले के मुख्य आरोपी ऋषभ शर्मा के आत्मसमर्पण और पुलिस रिमांड के बाद लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इसी मामले को लेकर पीड़ित युवाओं ने दुर्ग कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने अपने नाम पर लिए गए लोन के सेटलमेंट में मदद करने और फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


युवाओं के नाम पर कराया जाता था लोन

पीड़ितों के मुताबिक आरोपियों ने उन्हें कम EMI और आसान किस्तों का झांसा दिया। इसके बाद उनके नाम पर महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए लोन फाइनेंस कराया गया। लोन स्वीकृत होने के बाद सामान आरोपी अपने साथ ले जाते थे।

बताया गया है कि शुरुआत में कुछ किस्तों का भुगतान कर पीड़ितों का भरोसा जीता गया। इसके बाद किस्तें जमा करना बंद कर दिया गया। अब फाइनेंस कंपनियों की ओर से लोन की रकम और किस्तों की वसूली के लिए पीड़ितों से संपर्क किया जा रहा है।

200 लोग ठगी के शिकार

इस मामले में अब तक करीब 200 लोगों के पीड़ित होने की बात सामने आई है। इनमें मूक-बधिर युवक भी शामिल हैं। पीड़ितों का कहना है कि उनके नाम पर लोन कराया गया, लेकिन फाइनेंस कराया गया सामान उन्हें नहीं मिला। अब लोन की किस्त चुकाने का दबाव उन पर है।

पीड़ित जय यादव और हरिओम साहू ने बताया कि वे आरोपियों के झांसे में आ गए थे। उनके नाम पर लोन करा लिया गया और सामान आरोपी लेकर चले गए। अब किस्तों को लेकर वे मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।

कलेक्टर से लोन सेटलमेंट में मदद की मांग

पीड़ितों ने दुर्ग कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि बैंकों और संबंधित फाइनेंस कंपनियों के साथ समन्वय कर उनके नाम पर लिए गए लोन के सेटलमेंट में मदद की जाए। साथ ही इस पूरे मामले में शामिल अन्य आरोपियों और संस्थानों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

मुख्य आरोपी के आत्मसमर्पण के बाद जांच तेज

मामले के मुख्य आरोपी ऋषभ शर्मा के आत्मसमर्पण और पुलिस रिमांड के बाद पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है। पूछताछ और सामने आ रहे नए मामलों के आधार पर पीड़ितों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस कथित लोन फ्रॉड में और कौन-कौन लोग शामिल थे और पीड़ितों के नाम पर लिए गए लोन तथा इलेक्ट्रॉनिक सामान का पूरा नेटवर्क किस तरह संचालित किया जा रहा था। फिलहाल पीड़ितों ने प्रशासन से जल्द राहत दिलाने और मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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