
दुर्ग – देश में लोक अदालतों का एक अलग महत्व है, इसके माध्यम से सालों से चल रहे बड़े से बड़े मामले भी आपसी रजामंदी के साथ हल कर लिए जाते हैं , जिससे अदालतों का भी समय बचता है और आम लोगों का भी। कुछ ऐसी ही प्रक्रिया महिला थानों के परिवार परामर्श केंद्र में भी अपनाई जाती है , जहां पर पति-पत्नी के बीच होने वाले विवादों का निराकरण दोनों ही पक्षों को समझा बुझाकर किया जाता है । शासन एवं प्रशासन द्वारा बनाई गई इस व्यवस्था को और इसकी प्रक्रिया को समझ कर आमजन इस सुविधा का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठा सकते हैं ।
विगत 15 वर्षों से भी ज्यादा समय से परिवार परामर्श केंद्र में काउंसलिंग कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता शाहाना कुरैशी ने बताया कि बीते तीन वर्षों में कुल 4237 मामले परिवार परामर्श केंद्र में आ चुके हैं , जिनमे वर्ष 2023 में 1598 आवेदन , 2024 में 1349 और 2025 में 1290 आवेदन आए हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश मामलों को आपसी सुलह के माध्यम से निराकरण भी किया जा चुका है।

एडवोकेट शाहाना कुरैशी ने यह भी बताया कि इसी कड़ी में सीनियर सिटीजंस की समस्याओं का निराकरण भी परिवार परामर्श केंद्र में किया जा रहा है । आजकल परिवार में सीनियर सिटिजन अपने बच्चों से भी कई तरह की परेशानियां झेल रहे हैं , इसके अलावा उनके साथ जमीन की खरीदी बिक्री या अन्य किसी भी तरह के सौदेबाजी में धोखेबाजी होने पर वे परिवार परामर्श केंद्र में अपनी समस्याएं लेकर आ रहे हैं , परिवार परामर्श केंद्र में पदस्थ अनुभवी काउंसलरों की टीम सीनियर सिटीजंस की समस्याओं का निराकरण करने के लिए उनकी मदद करने यथासंभव प्रयास करती है ।


