


भारत में एक ऐसा सांप भी मौजूद है, जो कोबरा से भी कई गुना ज्यादा खतरनाक माना जाता है? इस सांप का नाम है कॉमन करैत (Common Krait). इसे “साइलेंट किलर”(Silent Killer) यानी चुपचाप हमला करने वाला सांप कहा जाता है, क्योंकि इसका काटना कई बार इंसान को दर्द तो नहीं देता, लेकिन इसका जहर शरीर के अंदर तेजी से असर दिखाना शुरू कर देता है.
बारिश का मौसम शुरू होते ही देश के कई हिस्सों में कॉमन करैत का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. यह सांप अक्सर खेतों, गांवों और घरों के आसपास दिखाई देने लगता है. सबसे डरावनी बात यह है कि यह रात में ज्यादा सक्रिय (Active) रहता है और सो रहे लोगों के करीब तक पहुंच जाता है.

क्यों इतना खतरनाक माना जाता है कॉमन करैत?
कॉमन करैत भारत के सबसे जहरीले सांपों में से एक है. इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है, यानी यह सीधे इंसान के नर्वस सिस्टम(Nervous System) पर हमला करता है. कई बार इसके काटने पर न दर्द होता है, न सूजन और न ही कोई बड़ा निशान दिखाई देता है. यही वजह है कि लोग शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लेते. लेकिन कुछ घंटों बाद ही शरीर में जहर फैलने लगता है. पीड़ित को पेट दर्द, उल्टी, कमजोरी और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. अगर समय पर इलाज न मिले तो सांस रुकने से मौत भी हो सकती है.
रात में ज्यादा एक्टिव रहता है यह सांप
कॉमन करैत दिन के मुकाबले रात में ज्यादा सक्रिय होता है. यह चुपके से घरों, खेतों और बस्तियों में घुस जाता है. कई बार यह बिस्तर, चटाई या फर्श पर सो रहे लोगों के पास पहुंच जाता है. इसका काटना इतना हल्का होता है कि कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें सांप ने काट लिया है. सुबह तक जहर शरीर में काफी फैल चुका होता है और तब तक हालत गंभीर हो सकती है.
यही कारण है कि इसे “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है. मानसून यानी बारीश के मौसम के दौरान खेतों और बिलों में पानी भर जाता है. ऐसे में करैत जैसे सांप सूखी और सुरक्षित जगहों की तलाश में घरों और गोदामों की तरफ आने लगते हैं.
इस मौसम में चूहे और छोटे जीव भी ज्यादा बाहर निकलते हैं, जो करैत का मुख्य भोजन होते हैं. इसी वजह से यह इंसानों के आसपास ज्यादा दिखाई देने लगता है. मध्य प्रदेश, बिहार और भी भारत के कई गांवों में बारिश के दौरान यह सांप घरों, लकड़ी के ढेर, टूटे-फूटे सामान, गमलों और दीवारों की दरारों में छिपा हुआ मिल जाता है.
दिखने में कैसा होता है कॉमन करैत?
कॉमन करैत का रंग आमतौर पर काला या गहरा नीला होता है. इसके शरीर पर पतली सफेद धारियां बनी होती हैं. यह करीब 3 से 5 फीट लंबा हो सकता है. रात के समय इसका रंग आसानी से नजर नहीं आता, इसलिए लोग कई बार इसे पहचान नहीं पाते. कॉमन करैत भारत के “बिग फोर” जहरीले सांपों में शामिल है. इस सूची में कोबरा, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर भी आते हैं. भारत में सांप के काटने से होने वाली ज्यादातर मौतों के लिए यही चार सांप जिम्मेदार माने जाते हैं.
कैसे करें बचाव?
बारिश के मौसम में कुछ सावधानियां अपनाकर करैत के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें. घर के आसपास कूड़ा-कचरा जमा न होने दें और दीवारों की दरारें बंद करवा दें. खेतों या अंधेरी जगहों पर जाते समय हमेशा जूते पहनें. सोने से पहले बिस्तर और आसपास की जगह को अच्छी तरह जांच लें.
अगर किसी को करैत काट ले तो घबराने के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचना सबसे जरूरी होता है. इसका इलाज सिर्फ एंटी-वेनम इंजेक्शन से ही संभव है. सांप काटने के बाद झाड़-फूंक या घरेलू इलाज पर भरोसा नहीं करना चाहिए. काटे गए हिस्से को रस्सी से कसकर बांधने या जहर चूसने जैसी गलतियां बिल्कुल भी न करें. मरीज को शांत रखें और जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर तक पहुंचाएं.
