



रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है। गिरफ्तारी के बाद ED की टीम रामगोपाल अग्रवाल को कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड की मांग करेगी। वहीं, गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उनसे मिलने कोर्ट पहुंचे।
मालूम हो कि 3 साल से फरार रामगोपाल अग्रवाल आठ जुलाई को ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचकर सरेंडर किये थे। ईओडब्ल्यू ने उनका मेडिकल कराकर उन्हें कोर्ट में पेश किया था, जहां से 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया था। इसके बाद रिमांड पूरी होन पर उन्हें 5 अगस्त तक ईओडब्ल्यू की रिमांड पर सौंपा गया था।

कार्रवाई को लेकर EOW ने जारी किया था प्रेसनॉट
8 जुलाई को ईओडब्ल्यू द्वारा प्रेसनोट जारी कर बताया गया कि कोयला लेवी प्रकरण में कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रकरण की विवेचना के दौरान प्राप्त तथ्यों, दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, जब्त डायरी एवं अन्य उपलब्ध सामग्री के संबंध में उनसे पूछताछ की जा रही है। रामगोपाल अग्रवाल पिछले काफी समय से विवेचना हेतु उपलब्ध नहीं हो रहे थे। उनके विरुद्ध माननीय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम न्यायालय से स्थायी वारंट भी जारी किया गया था।
ईओडब्ल्यू ने बताया कि कोयला लेवी प्रकरण की विवेचना के दौरान सूर्यकांत तिवारी के पास से जब्त डायरी में कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये की एंट्री प्राप्त हुई है। अब तक की विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि उक्त राशि रामगोपाल अग्रवाल द्वारा कांग्रेस भवन में प्राप्त की गई थी। इस संबंध में डायरी एंट्री, धनराशि के स्रोत, राशि पहुंचाने वाले व्यक्तियों, प्राप्तकर्ता एवं उपयोग से संबंधित बिंदुओं पर रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ की जा रही है।
अब उनके ईओडब्ल्यू हिरासत में आने के बाद कोयला लेवी प्रकरण में उनकी भूमिका, संबंधित व्यक्तियों से उनके संपर्क, वित्तीय लेन-देन, समन्वय एवं प्रकरण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है। कोयला लेवी प्रकरण के अतिरिक्त रामगोपाल अग्रवाल से शराब प्रकरण, धान से जुड़े प्रकरण तथा अन्य संबंधित मामलों में भी आवश्यक पूछताछ की जाएगी। इन मामलों में जांच के दौरान सामने आए तथ्यों, दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों एवं अन्य उपलब्ध सामग्री के आधार पर उनसे जवाब-तलब किया जाएगा।
शराब प्रकरण में भी अब तक की विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि अनवर ढेबर एवं उसके लोगों द्वारा करोड़ों रुपये कांग्रेस भवन में रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए गए थे। इस संबंध में राशि की डिलीवरी, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका, प्राप्त राशि के उपयोग एवं अन्य जुड़े हुए बिंदुओं पर भी उनसे पूछताछ की जाएगी।
इसी प्रकार धान से जुड़े प्रकरण में भी रोशन चंद्राकर द्वारा करोड़ों रुपये कांग्रेस भवन में रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए जाने संबंधी तथ्य विवेचना में सामने आए हैं। इस संबंध में राशि के संग्रहण, परिवहन, प्राप्ति, उपयोग एवं संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ की जाएगी।
इसी क्रम में रामगोपाल अग्रवाल के पुत्र वैभव अग्रवाल से भी ईओडब्ल्यू द्वारा पिछले दो दिनों से पूछताछ की गई थी। ईओडब्ल्यू द्वारा संबंधित प्रकरणों में विवेचना गंभीरता से की जा रही है। पूछताछ उपरांत प्राप्त तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
जानिए क्या लगा है आरोप
आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन अवैध वसूली की गई थी। करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध लेवी वसूली गई थी। चर्चित कोयला घोटला में ईओडब्ल्यू-एसीबी ने 35 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ ईडी के पास मौजूद साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है। एफआईआर के अनुसार कोयला घोटाला में सबसे ज्यादा 52 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल को दिया गया था। इसके बाद सर्वाधिक 36 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री सचिवालय की तत्कालीन उप सचिव को दिया गया था।
कोयला और शराब घोटाला को लेकर छत्तीसगढ़ में 2 अलग-अलग एफआईआर दर्ज किया गया है। यह एफआईआर भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करने वाली राज्य सरकार की एजेंसी एसीबी- ईओडब्ल्यू ने दर्ज किया है।
रामगोपाल अग्रवाल का निजी सहायक देवेन्द्र डड़सेना रिसीवर
बता दें कि कोल लेवी घोटाले में आरोपी देवेन्द्र डड़सेना कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल का निजी सहायक था। अवैध कोल लेवी वसूली से प्राप्त बड़ी मात्रा में नगद राशि का वास्तविक रिसीवर एवं मध्यस्थ भी था। कांग्रेस भवन रायपुर में “भवन” नाम से दर्ज प्रविष्टियाँ उसी के माध्यम से संचालित अवैध लेन-देन की पुष्टि करती है। आरोपी डड़सेना अपराध की पूरी श्रृंखला में एक अनिवार्य कड़ी रहा, जिसने न केवल अवैध धनराशि को भौतिक रूप से प्राप्त किया बल्कि उसे आगे कोल स्कैम में संलिप्त आरोपियों तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी निभाई थी।
