



बिलासपुर/ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से मवेशियों की मौत का मामला सामने आया है। सीपत क्षेत्र के झलमला गांव में बनाए गए अस्थायी गौठान में दो दिनों के भीतर बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत होने का दावा ग्रामीणों ने किया है। इस घटना के बाद गांव में चिंता का माहौल है और गौठान की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, अस्थायी गौठान में रखे गए मवेशियों की हालत अचानक खराब हुई और देखते ही देखते कई पशुओं ने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले दो दिनों में 20 से ज्यादा मवेशियों की मौत हुई है। इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की मौत के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

झलमला गांव के सरपंच धनलाल साहू ने 14 मवेशियों की मौत होने की बात कही है। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थिति का जायजा लिया गया। हालांकि, ग्रामीणों और सरपंच के आंकड़ों में अंतर सामने आ रहा है, जिसके चलते मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
घटना के बाद गौठान में मौजूद व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा, पानी और देखभाल की व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी हो सकती है। हालांकि, मवेशियों की मौत के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मृत मवेशियों का पोस्टमार्टम कराया जाए, ताकि मौत की वजह सामने आ सके।
इसके अलावा गौठान में रह रहे अन्य पशुओं की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग भी की गई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। अधिकारियों की ओर से घटना की जांच और स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है। पशु चिकित्सा विभाग की टीम भी मामले की जांच कर सकती है।
गौरतलब है कि प्रदेश में गौठान व्यवस्था को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में झलमला गांव की घटना ने एक बार फिर मवेशियों की देखरेख और गौठानों की व्यवस्थाओं पर चर्चा शुरू कर दी है। फिलहाल प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि मवेशियों की मौत किन कारणों से हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। वहीं ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों पर कार्रवाई के साथ-साथ गौठान में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि आगे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
