
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ पुलिस ने रिटायर्ड अधिकारी से ठगी करने वाले 5 अंतर्राज्यीय आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों ने खुद को पुलिस व सीबीआई अफसर बताकर बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट किया, फिर 37 लाख की ठगी की थी। ठगों के कब्जे से पुलिस ने मोबाइल, लैपटाॅप और बैंक खाते जब्त किए है। साथ ही जांच में 1.40 करोड़ की ठगी की जानकारी पुलिस को मिली है।
रिटायर्ड एसडीओ से साइबर ठगी
दरअसल, विद्युत विभाग के सेवानिवृत्त परिवेक्षक नरेन्द्र ठाकुर केसर परिसर रायगढ़ से 36,97,117 रुपये की ठगी की गई थी। पीड़ित द्वारा 17 फरवरी 2026 को साइबर पुलिस थाना रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने अपराध क्रमांक 02/2026 धारा 308(6), 318(4) भारतीय न्याय संहिता एवं 66(D) आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की।

पीड़ित ने बताया कि जनवरी 2022 में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत परेषण कंपनी से परिवेक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। 14 जनवरी 2026 को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का कॉल आया, खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) से संबंधित बताते हुए बोली कि उनका पहचान पत्र का उपयोग कर जियो कंपनी का मोबाइल नंबर लेकर गलत गतिविधियां की जा रही है। इसके बाद कॉल को फर्जी टेलीकॉम अधिकारी से कनेक्ट कराया गया, जिसने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी।


एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर खुद को आईपीएस अधिकारी नीरज ठाकुर बताया और पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाते हुए कहा कि उसके खिलाफ गंभीर अपराध दर्ज है, जांच में सहयोग करना होगा। ठगों ने पीड़ित से बैंक खाते, संपत्ति व अन्य जानकारी ली।
इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने और जांच पूरी होने पर राशि वापस कर करने का झांसा दिए। ठगों की धमकी और दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच कुल 36,97,117 रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में परिजनों को जानकारी होने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ, जिसके बाद साइबर थाना में शिकायतकर्ता आने पर तत्काल रिपोर्ट करने पर उसी समय साइबर पुलिस रायगढ़ ने पीड़ित के लगभग 2 लाख रुपये होल्ड कराया।
मामले की गहनता से जांच
पीड़ित के रिपोर्ट पर रायगढ़ साइबर थाने द्वारा बैंक खातों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की गई। पीड़ित द्वारा आरोपियों को भेजे गए 4.50 लाख रूपये भीलवाडा राजस्थान के बैंकों में जमा होने की जानकारी मिली। बैंक डिटेल आधार पर आरोपियों का पता लगाया गया।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने विशेष टीम गठित कर भीलवाड़ा राजस्थान रवाना किया। जहां पुलिस टीम द्वारा कैंप कर बंधन बैंक भीलवाड़ा के एम्पलाई राहुल व्यास को हिरासत में लिया, जिससे पूछताछ पर आगे पूरे गैंग का खुलासा हुआ।
पुलिस ने राहुल व्यास से पूछताछ कर उसके गिरोह के आरोपी रविराज सिंह उसकी पत्नी आरती राजपूत आरोपी संजय मीणा और गौरव व्यास को अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर हिरासत में लेकर ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया गया।
आरोपियों का खुलासा
गैंग का मास्टर माइंड राहुल व्यास (वर्तमान में बंधन बैंक, भीलवाड़ा राजस्थान का कर्मचारी) ने बताया कि 2007 से मनिकेलाल वर्मा शासकीय महाविद्यालय भीलवाड़ा में पढ़ाई के दौरान आरती राजपूत से जान-पहचान थी। आरती राजपूत क्वालिटी एनालिस्ट व ऑनलाईन वेबसाईट बनाने का काम करती थी। करीब 3 साल पहले +44 मोबाइल नंबर से आरती और रविराज के खाते में संदिग्ध रूपये आने लगे। इन लोगों ने साइबर ठगों से संपर्क किया, जब इनके खातों में मोटी रकम आने लगी तो ये पैसे नहीं लौटाकर खुद साइबर ठगी करने और रूपये कमाने का प्लान बनाये।
आरोपियों ने विभिन्न वेबसाइट गूगल के माध्यम से वीडियो देखकर साइबर ठगी सीखना बताये। आरोपियों ने रायगढ़ के एक व्यकित (पीड़ित नरेन्द्र ठाकुर) से 36.97 लाख की साइबर ठगी में इनका खाता इस्तेमाल होना स्वीकार किये। आरोपी राहुल ने उसके एचडीएफसी बैंक एकाउंट तथा बैंक आफ बड़ौदा के बैंक अकाउंट में कुल 4 लाख 50 हजार रूपये आने की बात स्वीकारी और जिसके दो लाख पचास हजार रूपये संजय मीणा निवासी भीलवाड़ा को आरती राजपूत के कहने पर दिया था।
प्रतिशत में ठगी की रकम का बंटवारा
आरोपियों के मोबाईल के व्हाटसअप में विभिन्न कॉल रिकार्डिंग व व्हाटसअप चैटिंग कर घटना को अंजाम देने की बातों पर चैटिंग उपलबध हैं। ठगी से जो रूपये मिलते हैं उनमें कुल रूपयों का पाँच प्रतिशत राशि राहुल व्यास लेता था और रविराज को दो प्रतिशत व आरती राजपूत को पाँच प्रतिशत, गौरव व्यास निवासी प्रज्ञा सर्किल के पास भीलवाड़ा को चार प्रतिशत देते थे। आरोपी आरोपी संजय मीणा को दो प्रतिशत और अपने गिरोह के और साथियों में 2-2 प्रतिशत रकम का बटवारा किये थे। सभी 5 आरोपियों के बैंक डिटेल की जानकारी ली गई ।
करोड़ों की ठगी
आरोपियों गौरव व्यास के बैंक खाते में 60 लाख ठगी के पाया गया। वहीं अन्य आरोपियों के खाते में भी संदिग्ध रकम मिली है । इन सभी आरोपियों का बैंक खाता सीज कराया गया है । आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल, 1 लैपटॉप की जप्ती की गई है । इस गैंग द्वारा पूरे देश में करीब 1,40,77,300 की ठगी की जानकारी मिली है, पुलिस टीम ने इस रकम के एटीएम जमा पर्ची जप्त किया गया है। प्रकरण में और भी आरोपियों की संलिप्तता के सबूत मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है ।
एसएसपी शशि मोहन के दिशा निर्देश पर एडिशनल एसपी अनिल सोनी, सीएसपी मयंक मिश्रा, डीएसपी साइबर उन्नति ठाकुर के सतत पर्यवेक्षण में पूरे मामले का पतासाजी कर खुलासा करने में थाना प्रभारी साइबर निरीक्षक विजय चेलक, सहायक उप निरीक्षक ज्योत्सना शर्मा, प्रधान आरक्षक करूणेश राय, आरक्षक पुष्पेंद्र जाटवर, मनोज पटनायक और समस्त साइबर स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
गिरफ्तार आरोपी
1. राहुल व्यास पिता मकेश कुमार व्यास सदर बाजार गणेश मंदिर के पास नहरी रायपुर, भीलवाडा राजस्थान
2. रविराज सिंह पिता राजू सिंह, उम्र-27 वर्ष निवासी सिरोदनिया थाना देवगढ़ जिला राजसमन राजस्थान हा.गु. शारदा 2 ड्रीम सिटी-सी-127, थाना गंगरोप, जिला भीलवाड़ा राजस्थान
3. संजय मीणा पिता खेमराज मीणा उम्र-27 वर्ष निवासी 10 एस-11 पटेल नगर थाना प्रतापनगर, जिला भीलवाड़ा राजस्थान
4. आरती राजपूत पति रविराज चव्हाण उम्र 26 वर्ष, निवासी, सिरोदनिया थाना देवगढ़ जिला राजसमन राजस्थान हा. मु.शारदा ड्रीम सिटी-सी-127, थाना गंगरोप, जिला भीलवाड़ा राजस्थान
5. गौरव व्यास पिता ब्रम्हानंद व्यास उम्र 24 वर्ष, निवासी 351/10, आई-सेक्टर, आजाद नगर थाना प्रतापनंगर जिला भीलवाड़ा राजस्थान
