



लद्दाख के ऊंचे पहाड़ों के बीच बसा एक छोटा सा गांव भारतीय सेना के साथ अपने गहरे रिश्ते के लिए जाना जाता है. इस गांव में देश की सेवा की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. यहां करीब-करीब हर घर का कोई न कोई युवक भारतीय सेना में शामिल है. कई जवान आज भी देश की सीमाओं पर तैनात हैं. यही वजह है कि इस गांव की पहचान सिर्फ इसके खूबसूरत पहाड़ों से नहीं, बल्कि सेना के साथ इसके गहरे रिश्ते से भी होती है.
दरअसल, हम जिस गांव के बारे में बात कर रहे हैं, उसका नाम चूशोत है. लद्दाख के इस गांव में करीब 63 घर हैं. छोटा सा यह गांव भारतीय सेना से लंबे समय से जुड़ा हुआ है. यहां के युवा बड़ी संख्या में सेना में भर्ती होते हैं. कई जवान फिलहाल लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC के पास फॉरवर्ड इलाकों में तैनात हैं. चूशोत के युवाओं के लिए सेना में जाना कोई नई बात नहीं है. कई दशकों से यहां की पीढ़ियां लद्दाख स्काउट्स में शामिल होकर देश की सेवा करती आ रही हैं. यही परंपरा आज भी आगे बढ़ रही है.

पीढ़ियों से सेना में जा रहे गांव के युवा
चूशोत के जवानों को शांत और विनम्र स्वभाव के साथ-साथ मुश्किल परिस्थितियों में मजबूती से डटे रहने वाले सैनिकों के तौर पर जाना जाता है. गांव के कई परिवारों में दादा या पिता के बाद बेटे भी सेना में शामिल हुए हैं. गांव में बड़ी संख्या में पुरुषों के सेना में होने की वजह से यहां महिलाओं, छोटे बच्चों और सेना से रिटायर हो चुके पूर्व सैनिकों की संख्या ज्यादा दिखाई देती है. परिवारों के लिए सेना में जाना गर्व की बात है, लेकिन जवानों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंताएं भी रहती हैं.
परिवार वालों को रहती है चिंता
चूशोत के कई घरों से लोग देश की सेवा के लिए भारतीय सेना का हिस्सा हैं। यहां अगर परिवार में पिता सेना में रह चुके हैं, तो उनके बेटे भी सेना में जाने की तैयारी करते हैं. परिवार के लोग अपने बच्चों के इस फैसले से खुश होते हैं और उन्हें देश की सेवा करते देखकर गर्व महसूस करते हैं. हालांकि, उनके मन में अपने जवानों की चिंता भी बनी रहती है.
फिलहाल गांव के कई जवान LAC के पास फॉरवर्ड इलाकों में तैनात हैं. मौजूदा परिस्थितियों में फोन नेटवर्क की समस्या के कारण परिवार के लोगों की उनसे आसानी से बात नहीं हो पाती। इसके अलावा, जवानों को भी मौजूदा हालात की वजह से फोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. ऐसे में परिवारों को अपने जवानों की कुशलता की जानकारी मिलने का इंतजार रहता है. यही वजह है कि जवानों के परिवारों के मन में उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है.
गांव में शिक्षा की कमी बड़ी चिंता
चूशोत की महिलाओं का कहना है कि गांव में बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा की व्यवस्था नहीं है. ज्यादातर लड़कियां हाई स्कूल के बाद अपनी पढ़ाई आगे नहीं बढ़ा पातीं. वहीं कई लड़के भी 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद सेना में भर्ती होने की तैयारी शुरू कर देते हैं. गांव के लोगों का कहना है कि अगर अच्छी शिक्षा मिलती तो बच्चों के पास सेना के अलावा दूसरे रास्ते भी खुल सकते हैं.
बेटियों को भी सेना में जाने का मौका चाहिए
चूशोत की कई महिलाएं मानती हैं कि अगर उन्हें मौका मिले तो वो भी सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहेंगी. गांव में सेना के प्रति सम्मान सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है. यहां की महिलाएं और पूर्व सैनिक दोनों मानते हैं कि लड़के हों या लड़कियां, सभी के लिए अच्छी शिक्षा जरूरी है. उनका मानना है कि शिक्षा ही गांव के बच्चों को बेहतर भविष्य और आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर दे सकती है.
देशसेवा की परंपरा के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद
चूशोत की कहानी सिर्फ सेना में भर्ती होने वाले युवाओं की नहीं है. यह उस गांव की कहानी है जहां पीढ़ियों से देशसेवा की परंपरा चली आ रही है. गांव के कई जवान देश की सीमाओं पर तैनात हैं, जबकि उनके परिवार पीछे रहकर उनका इंतजार करते हैं. अब चूशोत के लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद बेहतर शिक्षा को लेकर है. वो चाहते हैं कि गांव के बच्चों को ऐसी सुविधाएं मिलें, जिससे वे अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और देश की सेवा करने के साथ-साथ अपने लिए भी बेहतर भविष्य बना सकें.
