



कल्पना कीजिए कि किसी इमारत को बनाने के लिए मजदूर नीचे से ऊपर जाने के बजाय ऊपर से नीचे की तरफ काम कर रहे हों. सुनने में यह थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन दुनिया में ऐसी इमारतें वास्तव में मौजूद हैं. स्पेन की राजधानी मैड्रिड में बनी एक मशहूर इमारत इसी अनोखे तरीके से तैयार की गई थी.
मैड्रिड के प्लाजा दे कोलोन (Plaza de Colón) में खड़ी दो जुड़वां इमारतों को स्थानीय लोग प्यार से ‘El Enchufe’ यानी ‘The Plug’ कहते हैं. इसकी बनावट देखने पर सच में ऐसा लगता है जैसे कोई बहुत बड़ा बिजली का प्लग आसमान में लटका हुआ हो. इसका ऑफिसियल नाम टोरेस डे कोलोन (Torres de Colón) यानी Columbus Towers है.

यह इमारत मैड्रिड की पहचान बन चुकी है. साल 1976 में तैयार हुई यह इमारत शहर के स्काईलाइन का हिस्सा है. हालांकि, इसकी खूबसूरती को लेकर लोगों की राय हमेशा एक जैसी नहीं रही. कुछ लोग इसे मैड्रिड की सबसे बदसूरत इमारतों में से एक तक कहते हैं. इसके ऊपर बना हरे रंग का आर्ट डेको शैली वाला हिस्सा और कॉपर और स्मोक्ड ग्लास से बनी बाहरी दीवारें इसे बाकी इमारतों से बिल्कुल अलग बनाती हैं. लेकिन इसकी असली खासियत इसका बाहरी डिजाइन नहीं, बल्कि इसे बनाने का तरीका था.
नीचे से नहीं, ऊपर से शुरू हुआ था निर्माण
आमतौर पर किसी भी ऊंची इमारत का निर्माण जमीन से शुरू होता है. पहले नींव तैयार की जाती है और फिर एक-एक करके मंजिलें ऊपर जाती हैं. लेकिन टोरेस डे कोलोन में तरीका बिल्कुल उल्टा था. सबसे पहले जमीन पर दो मजबूत खंभे बनाए गए. इसके बाद सबसे ऊपर वाली मंजिल तैयार की गई और उसे स्टील की मजबूत केबलों की मदद से ऊपर लटका दिया गया.
फिर उसके नीचे अगली मंजिल बनाई गई और उसे भी ऊपर की ओर लगाया गया. इसी तरह धीरे-धीरे बाकी मंजिलें भी तैयार होती गईं. यानी इमारत का निर्माण ऊपर से नीचे की तरफ होता गया. हालांकि, इमारत के निचले हिस्से की कुछ मंजिलों और बेसमेंट का निर्माण सामान्य तरीके यानी नीचे से ऊपर की तरफ किया गया था.
‘प्लग’ नाम क्यों पड़ा?
टोरेस डे कोलोन की सबसे खास पहचान इसका ऊपरी हिस्सा है. इमारत के ऊपर मौजूद संरचना और दो लंबे केंद्रीय खंभों का संयोजन इसे देखने में एक विशाल इलेक्ट्रिक प्लग जैसा बनाता है. यही वजह है कि स्थानीय लोगों ने इसे ‘प्लग’, नाम दे दिया गया. बाद में इसके ऊपरी हिस्से में जो प्लग जैसा ढांचा दिखाई देता है, उसने इसकी पहचान को और मजबूत कर दिया.
ऐसी तकनीक सिर्फ मैड्रिड तक सीमित नहीं
ऊपर से नीचे की तरफ इमारत बनाना कोई आम तरीका नहीं है, लेकिन टोरेस डे कोलोन दुनिया की अकेली ऐसी इमारत नहीं है. आयरलैंड के डबलिन में Central Bank of Ireland और दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में Standard Bank Centre भी इसी तरीके से बनाए गए थे. पोलैंड में भी ऐसी इमारतें हैं. इनमें Wrocław की Trzonolinowiec खास है. इसे 1961 से 1967 के बीच बनाया गया था और लोग इसे कभी-कभी ‘Hanging Man’ भी कहते हैं.
इसके अलावा पोलैंड के Gdańsk और Katowice में भी इस तरह की इमारतें हैं. बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में भी 1970 के दशक में इसी तकनीक से एक इमारत बनाई गई थी. वहीं, 1959 में रूस के Magnitogorsk शहर में एक अलग तरीका आजमाया गया. इसमें मंजिलों को केबल से लटकाने के बजाय पहले से तैयार मंजिलों को जैक की मदद से ऊपर उठाया जाता था और फिर उन्हें उनकी जगह पर लगाया जाता था.
इसका फायदा यह था कि भारी सामान को बार-बार ऊपर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी. इसी तरह की सोच से नीदरलैंड में ‘Jackblock’ नाम की तकनीक विकसित हुई. इसमें सबसे पहले सबसे ऊपर वाली मंजिल को जमीन पर बनाया जाता है. फिर जैक की मदद से उसे ऊपर उठाया जाता है और उसके नीचे अगली मंजिल बनाई जाती है. इसके बाद दोनों मंजिलों को ऊपर उठाकर उनके नीचे तीसरी मंजिल बनाई जाती है. यह काम बार-बार दोहराया जाता है और धीरे-धीरे पूरी इमारत तैयार हो जाती है.
मंजिल-दर-मंजिल पूरी होती जाती है इमारत
मान लीजिए पहली मंजिल तैयार हो गई. उसे जैक से ऊपर उठाया जाता है. फिर उसके नीचे दूसरी मंजिल बनाई जाती है. अब दोनों मंजिलों को एक साथ ऊपर उठाया जाता है और उनके नीचे तीसरी मंजिल तैयार होती है. इसी तरह पूरी इमारत धीरे-धीरे ऊपर उठती जाती है और नीचे नई मंजिलें जुड़ती जाती हैं.
जब इमारत अपनी तय ऊंचाई तक पहुंच जाती है, तो उसे उसकी नींव से मजबूती से जोड़ दिया जाता है. यानी जिस काम को आमतौर पर नीचे से ऊपर की तरफ किया जाता है, उसमें यहां जमीन पर ही निर्माण करके पूरी संरचना को धीरे-धीरे ऊपर उठाने का तरीका अपनाया जाता है.
