बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बलौदाबाजार में हुए बहुचर्चित हिंसा और आगजनी मामले में आरोपी अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने तीनों की जमानत याचिका को खारिज कर दी थी। अजय यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जमानत की गुहार लगाई है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

पढ़िए हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की थी जमानत याचिका?

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास के सिंगल बेंच ने 19 मई 2026 को आवेदकों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, आवेदक अमित बघेल और अजय यादव छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के पदाधिकारी हैं, उन पर सात से आठ हजार लोगों की भीड़ को भड़काने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस बल पर जानलेवा हमले का गंभीर आरोप है।


हिंसा के कारण बलौदाबाजार-भाटापारा जिला और मुख्यालय में शांति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई और लगभग 13-15 करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ। अमित बघेल के खिलाफ 17, अजय यादव के खिलाफ 13 और दिनेश कुमार वर्मा के खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है। गंभीर तथ्यों, अपराध की गंभीरता और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखते हुए हाई कोर्ट ने आवेदकों को जमानत देने से इंकार कर दिया था।

हाई कोर्ट के फैसले को SLP के जरिए सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका SLP दायर कर जमानत की मांग की है। याचिका की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। एसएलपी की अगली सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित कर दी है ।

पढ़िए क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2024 में बलौदाबाजार के गिरौदपुरी धाम में जैतखाम को नुकसान पहुंचाने के विरोध में 10 जून 2024 को उग्र प्रदर्शन हुआ था । इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टोरेट और एसपी कार्यालय परिसर में जमकर तोड़फोड़, आगजनी और सरकारी व निजी वाहनों को फूंक दिया था । पुलिस ने इस मामले में अलग-अलग धाराओं और गंभीर अपराधों के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

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