रायपुर/ छत्तीसगढ़ में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 500 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध कोल लेवी और वसूली मामले में शिकंजा कस दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में EOW ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए 12 नामजद आरोपियों के खिलाफ लगभग 9500 पन्नों का पूरक अभियोग पत्र (चालान) विशेष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। इस पूरक चालान में अवैध वसूली, पैसों के लेन-देन, संपत्ति में निवेश और राजनीतिक फंडिंग से जुड़े कई अहम खुलासे किए गए हैं।

चालान में शामिल मुख्य बिंदु

  • विशाल दस्तावेज: 12 आरोपियों के खिलाफ लगभग 9500 पन्नों का विस्तृत चालान मय दस्तावेजों के पेश किया गया है।
  • कोयला और पैलेट वसूली: कोयला परिवहन पर 25 रुपये प्रति टन और आयरन पैलेट परिवहन पर 100 रुपये प्रति टन की अवैध वसूली का विवरण शामिल है।
  • डिजिटल सबूत और पत्राचार: सीएम हाउस के नाम से विश्राम गृहों की बुकिंग, आदेश जारी करने से जुड़े डिजिटल साक्ष्य, और बालको व अंबुजा कंपनी के पत्राचार को आधार बनाया गया है।
  • फंड का इस्तेमाल: अवैध वसूली के पैसों को राजनीतिक कार्यों, भूमि-वाशरी की खरीदी और नकद लेन-देन में इस्तेमाल किए जाने के तथ्य सामने आए हैं।
  • कार्रवाई का क्रम: इस बहुचर्चित प्रकरण में पूर्व में एक मुख्य और पांच पूरक चालान पहले ही पेश किए जा चुके हैं।

किन 12 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुआ चालान?

इस पूरक चालान में जिन 12 प्रमुख लोगों की भूमिका को स्पष्ट किया गया है, उनमें राम गोपाल अग्रवाल, देवेन्द्र सिंह यादव, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव राय, जयप्रकाश मौर्य, पियूष कुमार साहू, जोगेन्दर सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल और राहुल मिश्रा शामिल हैं।


जांच में सामने आए अहम खुलासे

  • कोयला परिवहन से अवैध वसूली का तंत्र:

    जांच में यह सामने आया कि सूर्यकांत तिवारी ने तत्कालीन अधिकारियों और सहयोगियों के साथ मिलकर कारोबारियों से 25 रुपये प्रति टन अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई थी। जुलाई 2020 में एक आदेश के जरिए ऑनलाइन ई-परमिट जारी होने से पहले जिला खनिज अधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य कर दिया गया था, जिससे अवैध वसूली का पूरा खेल संचालित होता था। जब्त डायरियों, व्हाट्सएप चैट और बैंक ट्रांजैक्शन से इन पैसों के निवेश के पुख्ता सबूत मिले हैं।

  • सीएम हाउस के नाम पर विश्राम गृहों की बुकिंग:

    जांच के दौरान अनुराग दीवान के मोबाइल से डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि बिना किसी ठोस राजस्व हानि के नियमों में बदलाव किया गया। सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगी जब वसूली व्यवस्था लागू कराने जिलों में जाते थे, तो उनके ठहरने के लिए विश्राम गृहों में ‘सीएम हाउस’ के नाम से बुकिंग कराई जाती थी।

  • आयरन पैलेट परिवहन से 100 रुपये प्रति टन की वसूली:

    कोयले के अलावा लौह अयस्क पैलेट परिवहन से भी 100 रुपये प्रति टन अवैध वसूली के प्रमाण मिले हैं। तत्कालीन संचालक (भौमिकी एवं खनिकर्म) जयप्रकाश मौर्य द्वारा पैलेट उद्योगपतियों की बैठक लेकर यह रकम सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।

    चालान में शामिल आरोपियों की भूमिका

    1. राम गोपाल अग्रवाल- गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं “C PARTY” के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है।
    2. देवेन्द्र सिंह यादव- भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹3 करोड़ ;तीन करोड़ रुपयेद्ध दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है।
    3. विनोद तिवारी- विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है।

    4. रामप्रताप सिंह- जब्त डायरियों में “R P Singh” एवं “RP” नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है।
    5. चंद्रदेव प्रसाद राय- तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के तथ्य मिले हैं। इसके अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा उन्हें आभूषण उपलब्ध कराए जाने का विवरण भी चालान में शामिल है।
    6. जयप्रकाश मौर्य- तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹1 करोड़ (लगभग एक करोड़ रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग के मामलों में उसके साथ संपर्क रखने तथा अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। पैलेट उद्योगपतियों को ₹100 प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने का विवरण भी उनके विरुद्ध चालान में शामिल है।
    7. पियूष कुमार साहू- पियूष कुमार साहू की भूमिका अपनी बहन रानू साहू को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने में पाई गई है। परिवार से संबंधित 13 संपत्तियों की खरीदी में बैंक खातों से भुगतान के अलावा रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान भी किया गया। रकम के लेन-देन और संपत्ति खरीदी में उनके तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया।
    8. जोगेन्दर सिंह- जोगेन्दर सिंह, सूर्यकांत तिवारी के व्यावसायिक भागीदार थे। विवेचना में जय अम्बे रोड लाइन्स के माध्यम से नकद रकम की व्यवस्था करने तथा अपनी फर्मों के खातों से बैंक प्रविष्टियां उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका पाई गई है। सात फर्मों को भेजी गई लगभग ₹40 करोड़ (लगभग चालीस करोड़ रुपये) की राशि और उससे संबंधित लेन-देन का विवरण भी चालान में दिया गया है।
    9. अनुराग चौरसिया- अनुराग चौरसिया की भूमिका सौम्या चौरसिया को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम फ्लैट और भूमि खरीदी में लगाने में पाई गई है। इसके लिए मोटल मधुबन तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया। इन खातों में प्राप्त रकम, आगे किए गए भुगतान और संपत्तियों में निवेश का विवरण चालान में शामिल है।
    10. दीपेश टांक- दीपेश टांक की भूमिका भूमि सौदे में रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद रकम प्राप्त करने तथा नकद रकम को कृषि आय के रूप में दर्शाने में पाई गई है। भूमि विक्रय के बाद भी वे ओम एग्रो फार्म के कार्यों एवं भुगतान से जुड़े रहे। अवैध रकम को भूमि और फार्म के कार्यों में लगाने तथा उसे वैध आय दर्शाने से संबंधित तथ्य चालान में दिए गए हैं।
    11. सुनील कुमार अग्रवाल- इंद्रमणि समूह के सुनील कुमार अग्रवाल की भूमिका सूर्यकांत तिवारी की ओर से भेजी गई नकद रकम अपने यहां रखने, उससे आगे भुगतान करने तथा वाशरी खरीदी में निवेश कराने में पाई गई है। इंद्रमणि समूह से संबंधित लेन-देन, वाशरी एवं भूमि खरीदी और नकद रकम के उपयोग का विवरण चालान में शामिल है।
    12. राहुल मिश्रा- राहुल मिश्रा, सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी निर्माण परियोजनाओं में कार्य करते थे। विवेचना में उनके पास बड़ी नकद रकम रखे जाने तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे निखिल चंद्राकर के माध्यम से सूर्यकांत तिवारी को वापस उपलब्ध कराए जाने के तथ्य मिले हैं। निर्माण कार्यों के भुगतान और नकद रकम सुरक्षित रखने में उनकी भूमिका का विवरण चालान में दिया गया है।

फिलहाल, इस प्रकरण में अन्य संभावित संदेहियों और शेष लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने के लिए अग्रिम विवेचना अभी भी जारी है।

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