रायपुर। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक प्रीति उपाध्याय शुक्ला ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सदस्य मोहम्मद फैज़ खान द्वारा नेहा बोरा के संबंध में की गई आपत्तिजनक एवं लैंगिक टिप्पणियों को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि सार्वजनिक वीडियो में फ़ैज़ ख़ान द्वारा नेहा बोरा के राजनीतिक विचारों का विरोध करते हुए उनके महिला होने और व्यक्तिगत गरिमा को निशाना बनाने वाली टिप्पणियां की गईं।

शिकायत में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच तथा उसके आरएसएस से सार्वजनिक रूप से जुड़े होने का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने महिला आयोग से वीडियो का तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा आरोप सही पाए जाने पर कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।


बालोद विधायक एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी महिला को उसके विचारों के लिए लैंगिक एवं अपमानजनक टिप्पणियों का निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है।

राज्य महिला आयोग को से शिकायत और इस पूरे मामले की जांच करने गईं प्रतिनिधि मंडल में कांग्रेस नेत्री नीलिमा मिश्रा, प्रगति वाजपेयी एवं सबा अली मौजूद रहीं।

पढ़िए आयोग को की गई शिकायत में क्या लिखा है?

मोहम्मद फ़ैज़ ख़ान, जो मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सदस्य हैं, ने एक सार्वजनिक वीडियो में नेहा बोरा के विरुद्ध अत्यंत आपत्तिजनक एवं लैंगिक रूप से अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच को सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संगठन के रूप में वर्णित किया जाता है तथा मंच की सार्वजनिक जानकारी में आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका और डॉ. इंद्रेश कुमार को मंच के संरक्षक के रूप में उल्लेखित किया गया है।

उक्त वीडियो में फ़ैज़ ख़ान ने नेहा बोरा के संबंध में कहा-“नेहा बोरा लड़की नहीं है, स्त्री नहीं है। वह मादा है। इसके बाद उन्होंने कहा-“स्त्री एक मां होती है, एक बहन होती है, एक ख़ाला भी होती है, बेटी भी होती है, सब रूपों में होती है।” और आगे कहा- मादा स्त्री नहीं है। मादा का काम केवल नर को आकर्षित करना है। नेहा बोरा एक मादा है।

उपरोक्त कथनों में नेहा बोरा को स्त्री के रूप में स्वीकार करने से इनकार करते हुए उन्हें “मादा” कहा गया और उसी संदर्भ में “मादा का काम केवल नर को आकर्षित करना है” जैसी टिप्पणी की गई। यह किसी राजनीतिक मतभेद की सामान्य अभिव्यक्ति न होकर एक महिला की गरिमा, सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को लक्ष्य कर की गई लैंगिक एवं व्यक्तिगत टिप्पणी है।

वीडियो में फ़ैज़ ख़ान ने नेहा बोरा द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा विशेष गहन पुनरीक्षण एवं चुनाव संबंधी विषयों पर जवाबदेही की मांग को भी उपहासपूर्ण ढंग से संबोधित किया है। राजनीतिक विचारों से असहमति लोकतांत्रिक अधिकार है, किंतु किसी महिला के विचारों का उत्तर उसके लिंग अथवा शरीर को लक्ष्य बनाकर देना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 79 में किसी महिला की लज्जा या गरिमा का अपमान करने के आशय से शब्द, संकेत अथवा कृत्य से संबंधित दंडात्मक प्रावधान है। अतः मेरा अनुरोध है कि माननीय आयोग उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर इस प्रकरण में उक्त धारा अथवा किसी अन्य लागू वैधानिक प्रावधान की प्रयोज्यता पर आवश्यक कार्रवाई करे।

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