होम ताजा खबर अजब-गजब वायरल इराक में 4000 साल पुराने शहर की खोज, मिले बिना दफन किए शव! क्या है इसका इतिहास इराक में 4000 साल पुराने शहर की खोज, यहां क्यों मिले बिना दफन किए शव? क्या है इसका इतिहास

इराक के कुर्दिस्तान रीजन में आर्कियोलॉजिस्ट्स ने 4000 साल पुराने एंशिएंट शहर के सबूत ढूंढे हैं. कुर्द कबुर्स्तान नाम की साइट पर खुदाई के दौरान कई चौंकाने वाली चीजे मिली हैं. यहां सीज वारफेयर यानी घेराबंदी वाले युद्ध के निशान साफ देखे जा सकते हैं. यह खोज मेसोपोटामिया की हिस्ट्री को समझने के लिए बहुत अहम मानी जा रही है.

यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल फ्लोरिडा की प्रोफेसर टिफनी अर्ली-स्पाडोनी इस रिसर्च को लीड कर रही हैं. टीम को एरबिल रीजन में पहली बार क्यूनिफॉर्म एडमिनिस्ट्रेटिव टैबलेट्स का बड़ा ग्रुप मिला है. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर तबाही और सामूहिक कब्रों के सबूत भी सामने आए हैं. ये सारी चीजे मिडिल ब्रॉन्ज एज के दौरान शहर के जीवन और उसके पतन की कहानी बताती हैं. इस जगह को एंशिएंट शहर काबरा के रूप में पहचाना जा रहा है.


आर्कियोलॉजिस्ट्स को खुदाई में क्या अहम सबूत मिले हैं?

रिसर्चर्स को लोअर टाउन ईस्ट पैलेस के मलबे से 20 क्यूनिफॉर्म टैबलेट्स मिले हैं. इसके अलावा 100 से ज्यादा एडमिनिस्ट्रेटिव सीलिंग्स भी बरामद हुई हैं. जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी और येल यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स इन चीजों की स्टडी कर रहे हैं. इन टेक्स्ट्स में पैलेस के एडमिनिस्ट्रेटिव रिकॉर्ड्स शामिल हैं. टिफनी अर्ली-स्पाडोनी ने कहा, ‘ज्यादातर टैबलेट्स एडमिनिस्ट्रेटिव हैं और ये उस समय के जीवन की झलक दिखाते हैं.’ एक टैबलेट किसी बड़े अधिकारी ने लिखा था जो काबरा से जुड़ा हो सकता है.

मेसोपोटामिया की इस खोज से क्यों हैरान हैं रिसर्चर्स और क्या है काबरा का रहस्य? (Credit: Kurd Qaburstan Project)

प्राचीन शहर में कैसे हुई थी भयंकर तबाही और घेराबंदी?

गिरे हुए स्ट्रक्चर्स और जली हुई लेयर्स एक सोचे-समझे हमले की तरफ इशारा करते हैं. यह हमला काफी लंबे समय तक चला होगा. टिफनी के मुताबिक मलबे से मिले मिट्टी के बर्तन और जले हुए हिस्से सीज वारफेयर का सबसे स्पष्ट एविडेंस हैं. उत्तरी मेसोपोटामिया में यह अब तक की सबसे बड़ी खोज है. यह तबाही काबरा की घेराबंदी और शमशी अद्दू की जीत के इतिहास से पूरी तरह मेल खाती है.

पैलेस के मलबे में क्यों मिले बिना दफन किए गए शव?

इस भयंकर युद्ध ने इंसानों पर गहरा असर डाला था. मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी की एंड्रिया जुरेक-ओस्ट ने इस पर स्टडी की है. रिसर्चर्स को पैलेस के मलबे में 17 लोगों के अवशेष मिले हैं. टिफनी ने कहा, ‘इन लोगों को दफनाया नहीं गया था और न ही कोई सामान इनके पास मिला.’ ऐसा लगता है कि मौत के बाद उन्हें वहीं छोड़ दिया गया था. इनमें कुछ पैलेस वर्कर्स भी हो सकते हैं.

कुर्द कबुरस्तान में ‘लोअर टाउन ईस्ट पैलेस’ के एक विनाश-स्थल से मिले इंसानी अवशेषों की जगह-संबंधी व्यवस्था. (Credit: Andrea Zurek-Ost/Kurd Qaburstan Project)

टीम ने 4000 साल पुराने शहर का मैप कैसे तैयार किया है?

रिसर्च टीम ने 80 हेक्टेयर से बड़े इलाके का मैग्नेटोमीटर सर्वे पूरा किया है. यह काम यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्दर्न कोलोराडो के एंड्रयू क्रीकमोर के नेतृत्व में हुआ. इस तकनीक से धरती के मैग्नेटिक फील्ड में बदलाव को मापा जाता है. सर्वे में साइट के चारो तरफ एक बहुत बड़ी दीवार का पता चला है. यह दीवार ददूशा के विक्ट्री स्टेल पर बनी आकृतियों से मेल खाती है. इसी वजह से इस जगह को प्राचीन काबरा शहर माना जा रहा है.

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