रायपुर – छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला राज्य की महत्वाकांक्षी ‘हमर लैब योजना’ में हुए कथित घोटाले से जुड़ा है, जिसमें टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं और शासकीय धन के दुरुपयोग का खुलासा हुआ है।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम
EOW द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं—
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अभिषेक कौशल – डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि., पंचकुला
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राकेश जैन – प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर
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प्रिंस जैन – लाइजनर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि. (शशांक चोपड़ा का रिश्तेदार)
किन धाराओं में दर्ज है मामला
EOW ने आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 409, 120-B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए), 13(2) एवं 7(सी) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में मिलीभगत कर शासकीय राशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया।
‘हमर लैब योजना’ के नाम पर बड़ा खेल
जांच में सामने आया है कि राज्य की जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘हमर लैब योजना’ के तहत जिला अस्पतालों, एफआरयू, सीएचसी, प्राथमिक एवं उप-स्वास्थ्य केंद्रों के लिए मेडिकल उपकरण, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की खरीदी की गई थी।
टेंडर में कार्टलाइजेशन और फर्जी दस्तावेज
EOW की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि
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मोक्षित कॉर्पोरेशन को पुल टेंडरिंग के माध्यम से निविदा दिलाने के लिए
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रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने
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फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर में भाग लिया
तीनों फर्मों के बीच आपसी समन्वय (Cartelization) कर प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया गया।
एक जैसे दस्तावेज, एक जैसा पैटर्न
जांच में यह भी पाया गया कि—
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टेंडर में केवल यही तीन फर्म शॉर्टलिस्ट हुई थीं
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उत्पादों का विवरण, पैक साइज, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स का पैटर्न लगभग समान था
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जिन उत्पादों का नाम स्पष्ट नहीं था, उन्हें भी तीनों फर्मों ने एक जैसा दर्शाया
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कीमतें भी एक ही क्रम में कोट की गईं—सबसे कम मोक्षित कॉर्पोरेशन, फिर RMS और उसके बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज
550 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान
इस सुनियोजित साजिश के चलते मोक्षित कॉर्पोरेशन ने CGMSC को एमआरपी से तीन गुना तक अधिक दरों पर सामग्री की आपूर्ति की, जिससे शासन को करीब 550 करोड़ रुपये की भारी आर्थिक क्षति हुई।
कोर्ट में पेशी, पुलिस रिमांड
गिरफ्तार आरोपियों को 19 जनवरी को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
EOW का साफ संदेश: जांच जारी रहेगी
EOW ने स्पष्ट किया है कि ‘हमर लैब योजना’ जैसे जनहित के कार्यक्रम में हुए घोटाले की गहन जांच जारी है। साक्ष्यों के आधार पर आगे भी जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।