रायपुर। छत्तीसगढ़ में दशहरा पर्व पर शस्त्र पूजन के बाद फायरिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के बाद अब मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के पुलिस अधीक्षक वायपी सिंह भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।

उनके और उनके बेटे से जुड़ा सरकारी राइफल से कथित फायरिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस मुख्यालय (PHQ) की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, वीडियो की वास्तविक तारीख और फायरिंग की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।


दशहरा पर शस्त्र पूजा के बाद फायरिंग का वीडियो वायरल

जानकारी के मुताबिक, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के पुलिस अधीक्षक वायपी सिंह का एक वीडियो और कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। इनमें शस्त्र पूजन के दौरान एसपी और उनके बेटे को हथियार के साथ देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि शस्त्र पूजा के बाद सरकारी राइफल से फायरिंग की गई। वीडियो में एसपी के बेटे की कथित भागीदारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी हथियार का इस्तेमाल किसी पुलिस अधिकारी के परिवार का सदस्य किस नियम के तहत कर सकता है। हालांकि, पुलिस विभाग के एक वर्ग का कहना है कि वायरल वीडियो इस साल का नहीं, बल्कि पिछले वर्ष का है। राजनांदगांव रेंज के आईजी अजय यादव के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में भी वीडियो पुराना होने की बात सामने आई है। ऐसे में घटना की वास्तविक तारीख और परिस्थितियों की पुष्टि आवश्यक है।

अंकिता शर्मा के बाद दूसरे एसपी पर उठे सवाल

इससे पहले राजनांदगांव की एसपी अंकिता शर्मा का दशहरा के अवसर पर शस्त्र पूजन के बाद एके-47 राइफल से फायरिंग करते वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी थी। भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने भी फायरिंग के तरीके पर आपत्ति जताते हुए सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए थे। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने एसपी अंकिता शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था।

विधायक ने की कार्रवाई की मांग, भूपेश बघेल ने भी उठाए सवाल

मोहला-मानपुर क्षेत्र के विधायक इंद्रशाह मंडावी ने इस मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उन्होंने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक और संबंधित आईजी को पत्र लिखकर घटना की जांच कराने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सोशल मीडिया पर मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि पुलिस अधीक्षक के बेटे को सरकारी हथियार से फायरिंग करने की अनुमति किस आधार पर दी गई। उन्होंने हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों और जवाबदेही का मुद्दा उठाया।

बीएसएफ से राज्य पुलिस सेवा में आए थे वायपी सिंह

वायपी सिंह का करियर सीमा सुरक्षा बल (BSF) से जुड़ा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नक्सल गतिविधियों के दौरान उनकी तैनाती राजनांदगांव क्षेत्र में रही थी। बाद में वे राज्य पुलिस सेवा से जुड़े और उन्हें आईपीएस का दर्जा मिला। मोहला-मानपुर क्षेत्र में वे पहले भी लंबे समय तक पदस्थ रह चुके हैं।

जवाब के बाद तय हो सकती है आगे की कार्रवाई

वायपी सिंह से स्पष्टीकरण मांगे जाने की खबर के बीच अब पुलिस मुख्यालय की अगली कार्रवाई पर नजर है। हालांकि, इस विशेष नोटिस की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से स्पष्ट नहीं हो सकी है। मामले में यह जांच का विषय है कि वीडियो कब बनाया गया, उसमें इस्तेमाल हथियार सरकारी था या नहीं और फायरिंग निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुरूप हुई थी या नहीं। फिलहाल लगातार सामने आ रहे इन वीडियो ने पुलिस विभाग में सरकारी हथियारों के इस्तेमाल, सुरक्षा मानकों और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Share on

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *