


बिलासपुर। गुरुवार रात से शुक्रवार दोपहर साढ़े तीन बजे हुई भारी बारिश ने 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भारी बारिश के कारण शहर में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। पॉश कॉलोनी से लेकर निचली बस्ती, रेलवे ट्रैक डूबे रहे। ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, स्कूलों की हालत बेहद खराब है। स्कूलों में पानी भरा हुआ है। मोहल्लों में घुटनों और कमर से उऊपर तक पानी भरा हुआ है।
पावर ट्रांसफार्मर पानी में डूबे हुए हैं। बिजली आपूर्ति व्यवस्था इन मोहल्लो में रात से ही ठप पड़ी हुई है। हालात बेहद खराब और बदतर है। बारिश की कहर का आलम ये कि सरकंडा, जोरापारा और निचली बस्ती इलाकों में सुबह का चूल्हा नहीं जल पाया है। घरों में पानी भरने के कारण सामान खराब हो गया है। जल भराव की स्थिति के कारण जिला प्रशासन ने एसडीआरएफ की टीम की तैनाती कर दी है।

सरकंडा और चांटीडीह के नीचले इलाके में 40 से अधिक लोगों का रेस्क्यू किया गया। कई जगह से ट्रांसफार्मर डूबने से ब्लैकआउट की स्थिति है। स्कूलों में आज छुट्टी कर दी गई है। रेलवे ट्रैक डूबने से 5 MEMU ट्रेनें रद्द और 3 ट्रेन का रूट बदला गया है। जिले में पिछले 24 घंटे में औसतन 74.7 मिमी बारिश हुई है। सीपत में सबसे ज्यादा 110.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
दोमुहानी में 10 से ज्यादा घर टापू बन गए। जिससे रातभर पानी में परिवार फंसे रहा। वहीं, अरपा चेक डैम की नहर टूटने से देवरीखुर्द, मानिकपुर समेत आसपास के इलाकों में पानी घुस गया। रात में मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को तरबतर कर दिया। लगातार तेज बारिश के कारण कई प्रमुख सड़कों पर नाले का पानी बहने लगा, निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई।
इस बारिश ने नगर निगम की पूरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। रातभर हुई बारिश से शहर के कई मोहल्लों, कॉलोनियों और मुख्य मार्गों पर पानी भर गया। कई जगह सड़क और नाले का अंतर खत्म हो गया, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर के अधिकांश हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप होने से पेयजल संकट भी गहरा गया है। कई ट्रांसफॉर्मर जलमग्न हो गए हैं।
कलेक्टर बंगले में भरा पानी, मोटर पंप से निकलने की कोशिशें
कलेक्टर के बंगले में भी पानी भर गया है, जहां नगर निगम की टीम जल निकासी में जुटी हुई है। निचले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए SDRF की टीम लगातार रेस्क्यू अभियान चला रही है। सरकंडा के बंधवापारा क्षेत्र में दो नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
जिले में 24 घंटे में औसतन 74.7 मिमी बारिश, सीपत में सबसे ज्यादा 110.2 मिमी वर्षा
मानसून की सक्रियता के चलते बिलासपुर जिले में शुक्रवार को औसतन 74.7 मिमी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 110.2 मिमी वर्षा सीपत में रिकॉर्ड हुई।
मस्तूरी: 96.2 मिमी,
सकरी: 95.4 मिमी,
बिलासपुर तहसील: 90.0 मिमी,
तखतपुर: 83.4 मिमी,
रतनपुर: 80.4 मिमी,
पचपेड़ी: 72.5 मिमी,
बोदरी: 67.3 मिमी,
बिल्हा: 67.0 मिमी,
कोटा: 47.2 मिमी,
बेलतरा: 46.0 मिमी,
बेलगहना: 41.2 मिमी
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से अब तक बिलासपुर जिले में 325.1 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत का 92.4 प्रतिशत है। लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है।
दोमुहानी में 10 से ज्यादा घर टापू बने, रातभर पानी में फंसे परिवार
बिलासपुर जिले के दोमुहानी क्षेत्र में बाढ़ का पानी घुसने से 10 से अधिक मकान टापू में तब्दील हो गए हैं। कई परिवार रातभर से घरों में फंसे हुए हैं। इनमें छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जो भूख-प्यास के बीच राहत और बचाव दल का इंतजार कर रहे हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
दोमुहानी इलाके में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने के कारण घरों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई परिवार रातभर से पानी के बीच फंसे हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग सुरक्षित निकाले जाने का इंतजार कर रहे हैं।
जलभराव की स्थिति में सफर के दौरान रहें सावधान
नदी नालों में बने रपटा, निम्न तल की क्रासिंग जिसके ऊपर से पानी बह रहा है। उसमें से बिल्कुल क्रास न करें। श्रीकांत वर्मा मार्ग, महाराणा प्रताप चौक SBR कालेज लेन, गौरव पथ, ईदगाह चौक मार्ग, मस्तूरी मार्ग, भारती नगर मार्ग, आदि जगहों पर जल भराव की स्थिति है। मुंगेली नाका मार्ग, सरकंडा मार्ग में भी कहीं कहीं जल भराव है।
जब तक जल भराव कम न हो कृपया इन मार्गो से परहेज करें। भारी बारिश के मद्देनजर जिला प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने राहत एवं बचाव के निर्देश दिए हैं। कच्चे मकान क्षतिग्रस्त होने पर आरबीसी 6(4) के तहत तत्काल केस बनाकर राहत दिलाने कहा गया है।
