



बालोद । छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड स्थित एक शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 12 वर्षीय छात्र के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि कक्षा में महज एक मिनट की देरी से पहुंचने पर शिक्षक ने छात्र के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की। छात्र के पिता की शिकायत पर डौंडीलोहारा पुलिस ने संबंधित शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, इस कार्रवाई के बाद शिक्षक संगठनों ने भी बिना विभागीय जांच सीधे एफआईआर दर्ज किए जाने पर आपत्ति जताई है।
बाथरूम से लौटने में हुई थी देरी
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, ग्राम कसही निवासी प्रमोद साहू का 12 वर्षीय पुत्र डौंडीलोहारा के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कक्षा सातवीं का छात्र है। 20 जुलाई को एक पीरियड समाप्त होने के बाद छात्र बाथरूम गया था। परिजनों का आरोप है कि लौटते समय वह लगभग एक मिनट की देरी से कक्षा में पहुंचा।

शिक्षक पर मारपीट का आरोप
शिकायत के मुताबिक, देरी से आने पर शिक्षक लोकेश्वर निषाद ने छात्र की कॉलर पकड़कर कथित रूप से गाली-गलौज की। आरोप है कि शिक्षक ने छात्र की छाती पर हाथ से प्रहार किया और उसका सिर पकड़कर दीवार की ओर टकरा दिया।
परिजनों का कहना है कि घटना के बाद छात्र के सिर में दर्द और सूजन आ गई। रात होने के कारण पहले घर पर ही प्राथमिक उपचार किया गया और अगले दिन उसे डौंडीलोहारा के शासकीय अस्पताल ले जाकर इलाज कराया गया।
छात्र हुआ सहमा, स्कूल जाने से डरने का दावा
शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना के समय कक्षा में मौजूद अन्य विद्यार्थियों ने भी कथित मारपीट और गाली-गलौज की घटना देखी और सुनी। परिजनों का दावा है कि घटना के बाद बच्चा मानसिक रूप से काफी सहम गया है और अब स्कूल जाने से भी डर रहा है।
शिक्षक के खिलाफ FIR दर्ज
छात्र के पिता की शिकायत के आधार पर डौंडीलोहारा पुलिस ने शिक्षक लोकेश्वर निषाद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) और 296 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी
दूसरी ओर, शिक्षक संगठनों ने इस मामले में बिना विभागीय जांच सीधे एफआईआर दर्ज किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी शिक्षक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने से पहले शिक्षा विभाग द्वारा निष्पक्ष विभागीय जांच कराई जानी चाहिए थी। संगठनों ने इसे प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए विरोध जताया है और आवश्यक होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
