वियतनाम के उत्तर में बसे पहाड़ी इलाकों में एक ऐसी अनोखी परंपरा है जो दुनिया भर के लोगों को हैरान कर देती है. यहां साल में सिर्फ एक बार एक बाजार लगता है, लेकिन यहां सामान बेचने या खरीदने की बजाय लोग अपने पुराने प्रेमियों से मिलने आते हैं. जी हां, आपने सही पढ़ा.

वियतनाम का प्रसिद्ध खौ वाई लव मार्केट या चो तिन्ह खौ वाई एक ऐसा स्थान है जहां बिछड़े हुए प्रेमी-प्रेमिकाएं साल में एक दिन एकत्रित होते हैं, पुरानी यादें शेयर करते हैं, गाने गाते हैं और फिर अपने वर्तमान जीवन में लौट जाते हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई बार उनके वर्तमान पति या पत्नी भी उनके साथ होते हैं, लेकिन कोई जलन या झगड़ा नहीं होता.


पुरानी है परंपरा

यह परंपरा सम्मान, समझ और मानवीय भावनाओं का अनोखा उदाहरण है. यह बाजार वियतनाम के उत्तर में स्थित मेओ वाक जिले के खौ वाई कम्यून में लगता है. पहले यह हा जियांग प्रांत में था, लेकिन प्रशासनिक बदलावों के बाद अब यह तुयेन क्वांग प्रांत का हिस्सा है. यह क्षेत्र डोंग वान कार्स्ट पठार का हिस्सा है, जो यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क के रूप में जाना जाता है.

यहां की पथरीली पहाड़ियां, घुमावदार रास्ते और हरे-भरे घाटियां इस मिलन को और भी रोमांचक बना देते हैं. हर साल तीसरे चंद्र मास की 27 तारीख को यह आयोजन होता है, जो आमतौर पर अप्रैल या मई के महीने में पड़ता है. पहले यह सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम था, लेकिन अब सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ यह दो से तीन दिन तक चलता है. इस अनोखे बाजार की शुरुआत लगभग 100 साल पहले, 1919 के आसपास मानी जाती है.

ऐसे हुई थी शुरुआत

इसकी जड़ें एक दर्द भरी प्रेम कहानी से शुरू होती है. किंवदंती के अनुसार, नुंग जाति के एक युवक बा और गियाई जाति की युवती उत एक-दूसरे से गहरा प्यार करते थे. बा गरीब था लेकिन सुंदर, गाने और बांसुरी बजाने में माहिर था. उत किसी कबीले के सरदार की बेटी थी. दोनों अलग-अलग जातियों से थे और उनके रीति-रिवाज भी अलग थे. परिवारों ने उनके रिश्ते का विरोध किया.

कुछ कहानियों में यह भी कहा जाता है कि दोनों कबीलों के बीच झगड़े शुरू हो गए और खून-खराबा होने लगा. प्रेमी जोड़े ने स्थिति को समझा और फैसला किया कि वे अलग हो जाएंगे ताकि और ज्यादा हिंसा ना हो. लेकिन उन्होंने एक वादा किया. हर साल तीसरे चंद्र मास की 27 तारीख को वे खौ वाई की घाटी में मिलेंगे, एक-दूसरे को गाने सुनाएंगे, साल भर की बातें साझा करेंगे और फिर अपने-अपने घर लौट जाएंगे.

उन्होंने खून की कसम खाई. सालों तक वे इस वादे को निभाते रहे. बुढ़ापे में भी वे यहां आए और अंत में एक-दूसरे की बाहों में ही इस दुनिया से विदा हो गए. स्थानीय लोगों ने उनकी याद में दो मंदिर बनाए – एक ओंग (श्रीमान) और एक बा (श्रीमती). आज भी त्योहार की शुरुआत इन मंदिरों में पूजा-अर्चना से होती है.

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