पिछले कुछ सालों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कतर और ओमान जैसे कई मुस्लिम देशों में हिंदू मंदिरों का निर्माण हुआ है. इन देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों और अन्य हिंदू समुदाय के लोगों के लिए पूजा-पाठ की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. लेकिन आज हम आपको भारत के एक ऐसे पड़ोसी देश के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आज भी सार्वजनिक रूप से एक भी हिंदू मंदिर मौजूद नहीं है.

इसके बावजूद भारत, श्रीलंका और नेपाल समेत कई देशों से आए हिंदू प्रवासी वहां रहते हैं और अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब वहां एक भी मंदिर नहीं है, तो आखिर वहां रहने वाले हिंदू पूजा-पाठ कैसे करते हैं? जिस देश के बारे में हम बताने जा रहे हैं, उस देश का नाम है मालदीव.


मालदीव दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां इस्लाम को राजकीय धर्म(State Religion) का दर्जा प्राप्त है. यहां के संविधान के अनुसार केवल मुस्लिम ही देश का नागरिक बन सकता है. साथ ही किसी अन्य धर्म का सार्वजनिक रूप से पालन करना या उसका प्रचार-प्रसार करना अनुमति प्राप्त नहीं है.

इसी वजह से मालदीव में हिंदू मंदिर, चर्च या किसी अन्य गैर-इस्लामिक धर्म का सार्वजनिक पूजा स्थल मौजूद नहीं है. हालांकि, यहां रहने वाले विदेशी हिंदू प्रवासी अपने घरों, अपार्टमेंट या निजी स्थानों पर पूजा-पाठ कर सकते हैं. लेकिन वे सार्वजनिक रूप से धार्मिक आयोजन या पूजा-अर्चना नहीं कर सकते.

क्या मालदीव हमेशा से इस्लामिक देश था?

अब सवाल उठता हे की क्या मालदीव हमेशा से इस्लामिक देश था? ऐसा नहीं है कि मालदीव हमेशा से इस्लामिक राष्ट्र था. इतिहासकारों के मुताबिक, प्राचीन समय में यहां बौद्ध धर्म का बहुत प्रभाव था. इसके अलावा हिंदू संस्कृति और परंपराओं से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रमाण भी मिले हैं.

करीब 12वीं शताब्दी में मालदीव के तत्कालीन शासक ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया. इसके बाद धीरे-धीरे पूरे देश में इस्लाम का प्रसार हुआ और मालदीव एक इस्लामिक राष्ट्र बन गया. आज भी उस दौर की कई प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां और ऐतिहासिक अवशेष मालदीव के नेशनल म्यूजियम में सुरक्षित रखे गए हैं.

भारत का समुद्री पड़ोसी है मालदीव

मालदीव भारत का समुद्री पड़ोसी देश है. दोनों देशों के बीच कोई जमीनी सीमा नहीं है, बल्कि दोनों हिंद महासागर में समुद्री सीमा साझा करते हैं. साल 1976 में भारत और मालदीव के बीच समुद्री सीमा तय करने के लिए एक समझौता हुआ था. मालदीव, भारत के लक्षद्वीप द्वीप समूह के दक्षिण(South) में स्थित है. लक्षद्वीप के मिनीकॉय द्वीप और मालदीव के बीच मौजूद समुद्री रास्ते को ‘8-डिग्री चैनल’ कहा जाता है.

भारत की मुख्य भूमि से मालदीव की दूरी करीब 700 से 1,200 किलोमीटर है, जबकि मिनीकॉय द्वीप से यह सिर्फ 130 किलोमीटर दूर है. मालदीव करीब 1,190 छोटे-बड़े द्वीपों और 26 प्राकृतिक कोरल एटोल (प्रवाल द्वीप समूह) से मिलकर बना है. इसकी राजधानी माले(Male) है, जो देश का सबसे बड़ा शहर भी है.

क्षेत्रफल के हिसाब से मालदीव एशिया के सबसे छोटे देशों में गिना जाता है. इसकी सबसे खास बात यह है कि यह समुद्र तल से औसतन सिर्फ 1.5 मीटर ऊंचा है. इसी वजह से इसे दुनिया का सबसे कम ऊंचाई वाला देश भी कहा जाता है. हिंद महासागर के बीच स्थित होने के कारण समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से भी मालदीव का काफी महत्व माना जाता है.

क्या मालदीव में सभी धर्मों को बराबर की आजादी मिलती है?

मालदीव में धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. देश के नागरिकों के लिए इस्लाम का पालन करना अनिवार्य है और किसी अन्य धर्म को सार्वजनिक रूप से अपनाने या उसका प्रचार करने की अनुमति नहीं है. यही वजह है कि यहां मंदिर, चर्च या अन्य गैर-इस्लामिक धार्मिक स्थलों के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाती.

हालांकि, विदेशी पर्यटक और प्रवासी अपने निजी आवास या होटल के कमरों में अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं. लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजन करना या धर्म प्रचार करना कानून के तहत प्रतिबंधित है. मालदीव में रहने वाले हिंदू प्रवासी अपनी धार्मिक परंपराओं को पूरी तरह छोड़ते नहीं हैं.

वे अपने घरों में छोटी-सी पूजा की जगह बनाकर नियमित रूप से पूजा-पाठ करते हैं और निजी स्तर पर अपने धार्मिक अनुष्ठान निभाते हैं। हालांकि, मंदिरों की तरह सार्वजनिक पूजा या बड़े धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं होती. यही वजह है कि दुनिया के कई मुस्लिम देशों में हिंदू मंदिर बनने के बावजूद मालदीव आज भी इस मामले में एक अलग उदाहरण माना जाता है.

भारतीय पर्यटकों की पसंदीदा विदेशी डेस्टिनेशन में शामिल है मालदीव

मालदीव लंबे समय से भारतीय पर्यटकों की पसंदीदा विदेशी पर्यटन स्थलों में से एक रहा है. यहां का साफ नीला समुद्र, सफेद रेत वाले समुद्र तट, लग्जरी वॉटर विला और शांत वातावरण हर साल हजारों भारतीयों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. खासकर हनीमून, फैमिली वेकेशन और लग्जरी ट्रिप के लिए मालदीव सबसे लोकप्रिय ऑप्शन में गिना जाता है.

भारत से मालदीव पहुंचना भी काफी आसान है. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोच्चि जैसे शहरों से माले के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं. इसी वजह से कम समय में विदेशी छुट्टियां मनाने के इच्छुक भारतीयों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बनी हुई है. कोविड-19(Covid-19) महामारी के बाद जब कई देशों में यात्रा पर प्रतिबंध थे, तब मालदीव ने सबसे पहले पर्यटकों के लिए अपने दरवाजे खोले थे.

उस दौरान बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक यहां पहुंचे थे और भारत मालदीव के सबसे बड़े पर्यटन बाजारों में शामिल हो गया था. इसके अलावा बॉलीवुड सितारे, क्रिकेटर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी अक्सर अपनी छुट्टियां मनाने मालदीव जाते हैं. उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आम लोगों के बीच भी इस देश की लोकप्रियता और बढ़ी है.

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