रायपुर। छत्तीसगढ़ में आरक्षण के मुद्दे पर संशय अब और गहराने लगा है। राज्यपाल अनुसुइया उइके ने शासन से 10 बिंदुओं पर जवाब मांगा है कि किस आधार पर अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिलाकर 76 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। राजभवन की ओर से जो पत्र शासन को भेजा गया है, उसमें यह खासतौर पर लिखा गया है कि उनके विधिक सलाहकार ने जो अभिमत (ओपिनियन) दिया है, उस आधार पर जानकारियां मांगी है।

हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ में आरक्षण के संबंध में 19 सितंबर को निर्णय लिया। इसमें 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण को असंवैधानिक बताया। इस फैसले के साथ ही छत्तीसगढ़ में आरक्षण की व्यवस्था एक तरह से खत्म हो गई। राज्य सरकार की ओर से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में यह स्पष्ट किया गया कि 29 सितंबर की स्थिति में आरक्षण का कोई रोस्टर क्रियाशील नहीं है। राज्य सरकार की ओर से एक दिसंबर को विधानसभा के विशेष सत्र में आरक्षण संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया गया।


इस पर चर्चा के बाद 2 दिसंबर को संशोधन पारित किया गया। इसमें अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का मिलाकर 76 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसे लेकर राज्य सरकार के पांच मंत्री दो दिसंबर को ही राज्यपाल उइके के पास पहुंचे। तब से लेकर अब तक राज्यपाल के दस्तखत नहीं हुए हैं। अब राज्यपाल ने ये दस सवाल उठाए हैं…

1. क्या अनुसूचित जाति और जनजाति के संबंध में मात्रात्मक विवरण (डाटा) संग्रहित किया गया है।

2. इंदिरा साहनी केस में उल्लेखित विशेष एवं बाध्यकारी परिस्थितियां कौन सी हैं?

3. हाईकोर्ट के आदेश के ढाई महीने बाद ऐसी कौन सी परिस्थितियां बनीं, जिसके आधार पर आरक्षण में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई?

4. अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्ति किस प्रकार राज्य में सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए हैं?

5. छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति और जनजाति के सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक पिछड़ेपन को ज्ञात करने के लिए कौन सी कमेटी बनाई गई?

6. क्वांटिफाएबल डाटा आयोग की रिपोर्ट राजभवन में प्रस्तुत करें।

7. अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन में शासन के विधि एवं विधायी कार्य विभाग का क्या अभिमत है?

8. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संविधान के अनुच्छेद 16(6) के तहत पृथक अधिनियम लाना चाहिए था?

9. अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सदस्य राज्य की सेवाओं में क्या चयनित नहीं हो रहे हैं?

10. क्या 76 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से प्रशासन की दक्षता का ध्यान रखा गया है। इस संबंध में क्या कोई सर्वेक्षण किया गया है?

इंदिरा साहनी केस के आधार पर मांगे तथ्य

राज्यपाल उइके ने इंदिरा साहनी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर कई सवाल किए हैं। राज्यपाल ने लिखा है, इंद्रा साहनी केस के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का प्रतिशत राज्य की सेवाओं में प्रत्येक भर्ती वर्ष के लिए 50 प्रतिशत से अधिक ‘विशेष एवं बाध्यकारी परिस्थितियों’ में ही हो सकता है। छत्तीसगढ़ में इस तरह की विशेष एवं बाध्यकारी परिस्थितियां कौन सी हैं।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह कहा है कि ‘ऐसा कोई विशेष प्रकरण निर्मित नहीं किया गया है, जिसके आधार पर 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा में वृद्धि की जाए।’ राज्यपाल ने पूछा है कि ढाई महीने में ऐसी क्या विशेष परिस्थितियां उत्पन्न हो गई जिसके कारण 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा में वृद्धि की गई है। इसका डाटा प्रस्तुत करें।

इंदिरा साहनी केस के निर्णय के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण होने के लिए यह बताना आवश्यक है कि राज्य के अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के व्यक्ति सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक रूप से संविधान के अनुच्छेद 16(4) में उल्लेखित पिछड़े हुए नागरिकों के वर्ग के रूप में आते हैं, उनका प्रतिनिधित्व राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त नहीं है। इस संबंध में विवरण प्रस्तुत करें कि राज्य के अनुसूचित जनजाति व जाति के व्यक्ति किस प्रकार राज्य में सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए हैं?

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