



रायपुर। विष्णु देव सरकार ने धान माफिया पर बड़ा प्रहार करते हुए बिचौलियों के रासते बंद कर दिए हैं। चालू खरीफ सीजन में किसानों को अब पैदावार कम होने पर अतिरिक्त धान का बंदोबस्त नहीं करना पड़ेगा और यही कदम बिचौलियों को खत्म करने के लिए काफी है। इसे ऐसे समझें कि सरकार ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदने का मापदंड तय किया है, मगर किसान को इतना धान देने की बाध्यता नहीं है।
अब किसान यदि 15 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से धान लेकर आता है तो उसे इतने धान का भुगतान बोनस के साथ होगा ही, शेष छह क्विंटल धान का बोनस बैठे- बिठाए किसान के खाते में आ जाएगा। अमूमन राज्य के कुछ इलाकों को छोड़ दें तो वहां पर खेतों में प्रति एकड़ 21 क्विंटल के हिसाब से पैदावार नहीं हो पाती।

जब किसान का धान कम होता है तो वह खुद ही बाहर से अतिरिक्त धान का बंदोबस्त करता है अथवा बिचौलिए खुद सक्रिय हो जाते हैं। इसके लिए किसान करीब 23-2400 रुपय प्रति क्विंटल में धान खरीदता है और परिवहन खर्च सहित धान खरीदी केंद्र पर हुए व्यय के कारण बमुश्किल 400-500 रुपये का फायदा होता है। अब इतने फायदे की रकम सरकार स्वत: देने जा रही है।
अन्नदाताओं के लिए ऐतिहासिक राहत
छत्तीसगढ़ सरकार ने चालू खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में प्रदेश के अन्नदाताओं के हित में एक दूरगामी और कल्याणकारी नीतिगत बदलाव किया है। राज्य के 27.50 लाख से अधिक पंजीकृत कृषकों को अब प्रति एकड़ 21 क्विंटल के निर्धारित मानक के अनुसार सीधी आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
इस नई व्यवस्था का मुख्य आधार यह है कि यदि किसी किसान के खेत में प्राकृतिक आपदा, मौसम की विषमता या सिंचाई संसाधनों की कमी के कारण पैदावार 21 क्विंटल से कम रह जाती है, तब भी उसे आर्थिक नुकसान नहीं झेलना पड़ेगा।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई किसान प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान उपार्जन केंद्र में लाता है, तो उसे बेचे गए धान का निर्धारित मूल्य तो तुरंत मिलेगा ही, साथ ही शेष 6 क्विंटल का तय बोनस भी बिना किसी झंझट के सीधे उसके बैंक खाते में जमा कर दिया जाएगा। सरकार के इस कदम से किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर है, क्योंकि अब उन्हें अपनी आय सुरक्षित होने का पूरा भरोसा मिल चुका है।
बिचौलियों और राइस मिलरों के अवैध नेटवर्क पर करारा प्रहार
सरकार की इस अभिनव योजना ने वर्षों से धान खरीदी के नाम पर फल-फूल रहे बिचौलियों, दलालों और राइस मिलरों के साठगांठ वाले तंत्र की कमर तोड़ दी है। पूर्व की व्यवस्थाओं में जब किसानों की वास्तविक पैदावार तय कोटे से कम होती थी, तब वे बोनस का लाभ उठाने के लिए बिचौलियों के पास जाने को मजबूर होते थे।
बिचौलिए और मिलर बाहर से 2100 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान लाकर किसानों को उपलब्ध कराते थे, जिसे सरकारी समितियों में 3100 रुपये के समर्थन मूल्य पर बेचा जाता था। इस पूरे खेल में वास्तविक किसान को सिर्फ 400 से 500 रुपये का मामूली लाभ मिलता था, जबकि बड़ा मुनाफा बिचौलियों और मिलरों की जेब में चला जाता था।
अब सरकार द्वारा कम धान होने पर भी पूरे कोटे का बोनस स्वत: किसान के खाते में भेजने की व्यवस्था से बाहर से धान खरीदने और फर्जी बिलिंग की पूरी गुंजाइश खत्म हो गई है। इसके साथ ही उपार्जन केंद्रों से उठने वाले धान को वापस घुमाकर बेचने की री-साइक्लिंग प्रक्रिया पर भी पूरी तरह विराम लग गया है।
बिचौलिया तंत्र ध्वस्त होने से सरकारी खजाने को होगी 12 हजार करोड़ की बचत
प्रशासनिक पारदर्शिता और तकनीक आधारित सख्त निगरानी के कारण राज्य सरकार को चालू वित्तीय वर्ष में वित्तीय मोर्चे पर भी अभूतपूर्व सफलता मिलने का अनुमान है। पारदर्शी खरीदी प्रणाली लागू होने से फर्जी पंजीकृत रकबे और बिचौलियों द्वारा खपाए जाने वाले अवैध धान पर नकेल कसी जा चुकी है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में राज्य में 144.92 लाख मीट्रिक टन और वर्ष 2024-25 में लगभग 149.00 लाख मीट्रिक टन धान का रिकॉर्ड उपार्जन हुआ था। इसके बाद कड़े जांच तंत्र और नए नियमों के चलते वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर 141 लाख मीट्रिक टन पर आ गया, जिससे सरकार को लगभग 5 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई थी।
चालू सीजन में बिचौलियों के पूरी तरह बाहर होने से वास्तविक खरीदी का आंकड़ा घटकर लगभग 125 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। फर्जी खरीदी रुकने और धान की वास्तविक आवक सीमित होने से इस बार छत्तीसगढ़ सरकार को अपने खजाने में करीब 12 हजार करोड़ रुपये की ऐतिहासिक बचत होने की उम्मीद है, जिसका उपयोग राज्य के अन्य विकास कार्यों में किया जाएगा।
कृषक उन्नति योजना: संशोधन को मंजूरी
राज्य मंत्रिपरिषद ने खरीफ-2026 के लिए ‘कृषक उन्नति योजना’ में महत्वपूर्ण संशोधनों को अपनी स्वीकृति दे दी है, जिसके तहत धान फसल पर दी जाने वाली आदान सहायता राशि को प्रति क्विंटल के बजाय अब प्रति एकड़ के मान से पुनर्गठित किया गया है। सरकार के इस कदम से न केवल किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार होगा, बल्कि उन्हें परंपरागत खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण को अपनाने का प्रोत्साहन भी मिलेगा।
किसान अब सिर्फ धान पर निर्भर रहने के बजाय अपनी भूमि पर अन्य व्यावसायिक एवं दलहनी-तिलहनी फसलों की ओर रुख कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, खाते में आने वाली सुरक्षित बोनस राशि से किसान अपनी कृषि पद्धतियों को आधुनिक बना सकेंगे। वे इस पूंजी का उपयोग उन्नत श्रेणी के बीज, मानक उर्वरक, आधुनिक कीटनाशक, कृषि यंत्रीकरण और ड्रिप इरीगेशन जैसी नवीन तकनीकों में निवेश करने के लिए स्वतंत्र होंगे, जिससे भविष्य में प्रति एकड़ कृषि उत्पादकता में भारी वृद्धि होगी।
केंद्र ने 72 रुपये बढ़ाया समर्थन मूल्य
केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये और ग्रेड-ए धान का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जिसमें पिछले वर्ष के मुकाबले 72 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। केंद्र के इस समर्थन मूल्य के ऊपर राज्य सरकार अपनी ‘कृषक उन्नति योजना’ की आदान सहायता मिलाकर किसानों को कुल 3100 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान सुनिश्चित कर रही है।
बीते साल का पंजीयन मान्य
धान खरीदी की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने के लिए तकनीक का व्यापक सहारा लिया गया है। सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए एग्रीस्टेक आईडी से जुड़े पिछले वर्ष के सभी पंजीकृत किसानों को इस बार बिना किसी पृथक पंजीयन के सीधे मान्य कर लिया है, जिससे किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने और समितियों में भौतिक ऋण पुस्तिका जमा करने की झंझट से मुक्ति मिल गई है।
डिजिटल क्रॉप सर्वे के जरिए उपग्रह आधारित तकनीक से धान के बोए गए रकबे का शत-प्रतिशत सटीक ऑनलाइन निर्धारण किया गया है, ताकि रकबे में किसी भी प्रकार की हेरफेर न हो सके। खरीदी केंद्रों पर केवल वास्तविक किसान ही अपनी उपज बेच सकें, इसके लिए बायोमैट्रिक सत्यापन आधारित उपार्जन व्यवस्था लागू की जा रही है।
किसानों की सुविधा और केंद्रों पर भीड़ कम करने के उद्देश्य से इस बार 360 नए उपार्जन केंद्र खोले गए हैं, जिससे अब प्रदेश के कुल 3,100 केंद्रों के माध्यम से सुचारू रूप से धान खरीदी संपन्न की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में बीते पांच वर्षों की धान खरीदी का तुलनात्मक विवरण
यदि पिछले पांच वर्षों में राज्य में धान उपार्जन की स्थिति देखें, तो आंकड़े निरंतर वृद्धि और प्रशासनिक सुधारों की कहानी बयान करते हैं। वर्ष 2021-22 में राज्य के 24 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों से 97.98 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। इसके बाद वर्ष 2022-23 में इतिहास रचते हुए खरीदी का आंकड़ा पहली बार 100 लाख मीट्रिक टन को पार कर 107.52 लाख मीट्रिक टन तक जा पहुंचा।
वर्ष 2023-24 में प्रति एकड़ 20 क्विंटल की सीमा के साथ सर्वकालिक रिकॉर्ड 144.92 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन हुआ, वहीं वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 149.00 लाख मीट्रिक टन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिसके एवज में किसानों को 31,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
बीते वर्ष 2025-26 में 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा और कड़े निगरानी तंत्र के बीच 141.00 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। यद्यपि चालू सीजन 2026-27 के लिए सरकार ने 160 लाख मीट्रिक टन का प्रशासनिक लक्ष्य रखा है, लेकिन बिचौलियों के हटने और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के कारण वास्तविक खरीदी 125 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जिससे राज्य सरकार को वित्तीय स्थिरता और किसानों को सीधा संबल मिलेगा।
