


रायपुर। करीब 6,000 करोड़ रुपये के चर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट के कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान में हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, इंटरपोल के नोटिस के आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने यह कार्रवाई की है। अब भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया तेज कर दी है। भारत और ओमान के बीच प्रत्यर्पण संधि होने के कारण एजेंसियों को उम्मीद है कि जल्द ही उसे भारत लाया जा सकता है।
फर्जी पासपोर्ट से ओमान पहुंचने की आशंका
सूत्रों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर की आखिरी लोकेशन संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में ट्रेस हुई थी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि वह दक्षिण-पूर्व एशिया के किसी देश से जारी फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान पहुंचा हो सकता है। भारतीय एजेंसियां इस संबंध में आधिकारिक दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने में लगी हैं।

दुबई से चलाता था करोड़ों का बेटिंग नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर वर्ष 2019 से फरार चल रहा है। उसने अपने सहयोगी रवि उप्पल के साथ मिलकर दुबई से महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क खड़ा किया था। इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन, पोकर, कार्ड गेम और यहां तक कि चुनावी नतीजों पर भी अवैध सट्टेबाजी संचालित किए जाने के आरोप हैं।
2024 में भी हुई थी गिरफ्तारी, लेकिन बच निकला था
इससे पहले वर्ष 2024 में भी इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर यूएई में सौरभ चंद्राकर को हिरासत में लिया गया था। उस समय भारत ने उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उसे रिहा कर दिया गया था। वहीं उसका सहयोगी रवि उप्पल भी यूएई से फरार हो गया था।
ईडी, सीबीआई और छत्तीसगढ़ पुलिस की संयुक्त जांच
महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और छत्तीसगढ़ पुलिस समेत कई एजेंसियां कर रही हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक है और इससे जुड़े कई वित्तीय लेनदेन तथा हवाला नेटवर्क की भी जांच जारी है।
