



दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. जगह-जगह रामलीला का मंचन होता है और लोग भगवान श्रीराम की विजय का उत्सव मनाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण दहन की परंपरा केवल भारत तक सीमित नहीं है? दुनिया के कई देशों में बसे भारतीय समुदाय के लोग भी दशहरे पर रामलीला और रावण दहन का आयोजन करते हैं.
विदेशों में भी मनाई जाती है विजयादशमी
भारत से बड़ी संख्या में लोग पढ़ाई, नौकरी और कारोबार के सिलसिले में विदेशों में रहते हैं. ये लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए त्योहारों को पूरे उत्साह से मनाते हैं. दशहरा भी ऐसा ही एक त्योहार है, जिसे विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग मिल-जुलकर मनाते हैं. कई जगहों पर रामलीला का मंचन, पूजा-पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और रावण के पुतले का दहन किया जाता है.

श्रीलंका में रामायण से जुड़ी खास मान्यताएं
श्रीलंका का नाम रामायण की कथा से गहराई से जुड़ा हुआ है. रामायण में लंका को रावण का राज्य बताया गया है. हालांकि, श्रीलंका में रावण को लेकर अलग-अलग सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताएं भी देखने को मिलती हैं. इसलिए वहां रावण दहन की परंपरा भारत जैसी हर जगह आम नहीं है. कुछ भारतीय समुदाय दशहरे पर रामलीला और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं.
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में दिखता है भारतीय संस्कृति का रंग
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों को उत्साह के साथ मनाता है. सिडनी, मेलबर्न और ऑकलैंड जैसे शहरों में भारतीय सांस्कृतिक संगठनों की ओर से कई बार रामलीला, धार्मिक कार्यक्रम और सामुदायिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं. इन आयोजनों में भारतीय परिवारों के साथ स्थानीय लोग भी शामिल होते हैं और भारत की परंपराओं को करीब से जानने का अवसर पाते हैं.
अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में भी होते हैं आयोजन
अमेरिका और कनाडा में बसे भारतीय समुदाय के लोग दशहरे पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और रामलीला का आयोजन करते हैं. वहीं, ब्रिटेन के लंदन समेत कई शहरों में भारतीय त्योहारों को मनाने की परंपरा है. इन आयोजनों में बच्चों को रामायण की कहानी सुनाई जाती है और अच्छाई की बुराई पर जीत का संदेश दिया जाता है.
दशहरे का महत्व सिर्फ रावण का पुतला जलाने तक सीमित नहीं है. यह त्योहार अहंकार, अन्याय और बुराई पर सत्य की जीत का संदेश देता है. विदेशों में होने वाले ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति को जीवित रखने के साथ अलग-अलग समुदायों को भी जोड़ते हैं.
