



दुर्ग। एसएसपी विजय अग्रवाल के निर्देश पर दुर्ग पुलिस ने इस वर्ष साइबर अपराध व ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर 1242 म्यूल बैंक खातों पर कार्रवाई की। इस दौरान 117 खाताधारक व 5 म्यूल एजेंट को गिरफ्तार किया गया। लगभग 3 करोड़ की राशि होल्ड कराई गई।
जानिए पूरा मामला
दरअसल, जिले में साइबर अपराध व ऑनलाइन सट्टे के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से 1 जनवरी से 29 जुलाई तक विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पुलिस मुख्यालय तकनीकी सेवा (साइबर), भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), विभिन्न राज्यों से प्राप्त शिकायतों व बैंकिंग संस्थानों से प्राप्त सूचनाओं का तकनीकी व वित्तीय जाँच किया गया।

जांच में यह पाया गया कि साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन सट्टा, कस्टमर केयर फ्रॉड व अन्य साइबर अपराधों से प्राप्त अवैध धनराशि को छिपाने व आगे ट्रांसफर करने के लिए म्यूल बैंक खातों का उपयोग किया जा रहा था।
जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में संचालित बैंक खातों के लेन-देन, केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग लॉग, यूपीआई ट्रांजेक्शन व अन्य डिजिटल साक्ष्यों के परीक्षण के उपरांत 18 प्रकरणों में कुल 1242 म्यूल बैंक खातों की पहचान कर अपराध पंजीबद्ध किए गए। इस कार्रवाई के दौरान अब तक 117 खाताधारकों व 5 म्यूल एजेंटों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
साथ ही विभिन्न साइबर ठगी व ऑनलाइन सट्टा प्रकरणों से संबंधित लगभग 3 करोड़ की डिस्प्यूट राशि होल्ड लगाया गया। वर्तमान में लगभग 2000 अन्य संदिग्ध म्यूल बैंक खातों का तकनीकी व वित्तीय विश्लेषण जारी है। इन खातों से जुड़े खाताधारकों, एजेंटों व अन्य सहयोगियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
जाँच के दौरान यह भी पाया गया है कि कुछ बैंक शाखाओं के अधिकारियों व बैंक प्रबंधकों की भूमिका की जांच जरुरी है। संबंधित अधिकारियों द्वारा खाते खोलने की प्रक्रिया, केवाईसी सत्यापन, संदिग्ध बैंकिंग लेन-देन की निगरानी व नियामकीय प्रावधानों के पालन का परीक्षण किया जा रहा है। जांच में उनकी संलिप्तता प्रमाणित होने पर उन्हें भी आरोपी बनाकर कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे करते थे अपराध
साइबर अपराधी व ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले संगठित गिरोह अवैध धनराशि के स्रोत को छिपाने व उसे अपराधियों तक पहुंचाने के लिए म्यूल बैंक खातों (Mule Accounts) का उपयोग करते थे। इसके लिए गिरोह के सदस्य कमीशन, नौकरी, आसान कमाई अथवा अन्य आर्थिक प्रलोभन देकर लोगों से उनके बैंक खाते प्राप्त करते थे और उनके नाम से नए बैंक खाते खुलवाते थे।
खाताधारकों से बैंक खाते के साथ-साथ एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, सिम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग यूजर आईडी व पासवर्ड, यूपीआई आईडी आदि प्राप्त कर लिए जाते थे। कई मामलों में खाताधारक खुद कमीशन लेकर साइबर अपराधियों के निर्देश पर बैंकिंग लेन-देन करते थे, जबकि अन्य मामलों में संपूर्ण बैंकिंग संचालन अपराधियों द्वारा नियंत्रित किया जाता था।
साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, ऑनलाइन ट्रेडिंग, ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन सट्टा तथा अन्य साइबर अपराधों से प्राप्त धनराशि सबसे पहले इन लेयर-1 में जमा कराई जाती थी। इसके बाद धनराशि को कुछ ही मिनटों में विभिन्न बैंकों के अनेक खातों में छोटे-छोटे हिस्सों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिससे मुख्य स्रोत व अंतिम आरोपी तक पहुंचना कठिन हो जाए।
इसके बाद राशि को एटीएम, यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, नकद निकासी, ई-वॉलेट एवं अन्य डिजिटल माध्यमों से निकालकर मुख्य अपराधियों तक पहुंचाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ म्यूल एजेंट कमीशन लेकर बड़ी संख्या में बैंक खाते उपलब्ध कराने, खाताधारकों की व्यवस्था करने तथा बैंकिंग सुविधाएं साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे थे।
दुर्ग पुलिस द्वारा बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा, आईपी लॉग, यूपीआई ट्रांजेक्शन, केवाईसी दस्तावेज व अन्य तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण कर संपूर्ण मनी ट्रेल (Money Trail) का परीक्षण किया जा रहा है। इसी के आधार पर पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, एजेंटों व सहयोगियों के विरुद्ध भी लगातार कार्रवाई जारी है।
आरोपी का विवरण
कुल गिरफ्तार म्यूल खाताधारक – 117
कुल गिरफ्तार म्यूल एजेंट – 05
उपलब्धि
कुल प्रकरण: 18
कुल म्यूल बैंक खाते: 1242
कुल गिरफ्तार खाताधारक: 117
कुल गिरफ्तार म्यूल एजेंट : 05
लगभग 3 करोड़ की डिस्प्यूट राशि होल्ड (Freeze)
लगभग 2000 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की जांच प्रगति पर
जब्त सामग्री
1. बैंक खातों से संबंधित अभिलेख।
2. एटीएम कार्ड।
3. चेकबुक एवं पासबुक।
4. मोबाइल फोन एवं सिम कार्ड।
5. केवाईसी दस्तावेज।
6. बैंकिंग एवं डिजिटल रिकॉर्ड।
7. अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य।
इन अधिकारियों रही भूमिका
इस कार्रवाई में जिले के समस्त संबंधित थाना प्रभारियों, साइबर सेल, तकनीकी विश्लेषण टीम, विवेचना अधिकारियों एवं थाना स्टाफ द्वारा बैंकिंग ट्रांजेक्शन का विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्य संकलन, मनी ट्रेल की जांच, म्यूल खातों की पहचान, आरोपियों की गिरफ्तारी एवं साइबर नेटवर्क के वित्तीय तंत्र का खुलासा करने में महत्वपूर्ण व सराहनीय भूमिका निभाई।
