



कोरबा। छत्तीसगढ़ कोरबा जिले के बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र के बलगी खार निवासी 27 वर्षीय दीपक कुमार कंवर ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। चार दिन पहले उसकी बाइक चोरी हो गई थी। पिता ईश्वर सिंह कंवर खेती-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने काफी मेहनत से किस्तों पर बेटे के लिए बाइक खरीदी थी, जो दीपक के लिए केवल एक वाहन नहीं बल्कि रोजमर्रा की जरूरत और परिवार की सबसे बड़ी पूंजी थी।
बाइक चोरी होने के बाद वह हर दिन उसकी तलाश में निकलता और मायूस होकर लौट आता। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने चोरी के मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। उनका कहना है कि चोरी के मामलों में जांच पूरी होने और वाहन का पता नहीं चलने पर ही आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है, जिसके बाद बीमा दावा भी आगे बढ़ पाता है।

इसी अनिश्चितता और लगातार बढ़ती निराशा ने दीपक को भीतर तक तोड़ दिया। रविवार रात खाना खाने के बाद वह अपने कमरे में सोने चला गया। सोमवार सुबह परिजनों ने उसे फंदे पर लटका देखा। सूचना पर बांकी मोंगरा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मर्ग कायम किया।
बांकी मोंगरा थाना प्रभारी चमन सिन्हा ने बताया कि बाइक चोरी की घटना दर्री थाना क्षेत्र की है और उसकी विवेचना वहीं की जा रही है। आत्महत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। उधर दर्री पुलिस बाइक चोरी के मामले में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाई।
इस तरह चलती है कार्रवाई
वाहन चोरी होने पर केवल एफआईआर दर्ज होना ही पर्याप्त नहीं होता। पुलिस जांच के बाद यदि वाहन बरामद नहीं होता तो कोर्ट के समक्ष अनट्रेस्ड (नान-ट्रेसेबल) अंतिम रिपोर्ट पेश की जाती है। इसके बाद ही अधिकांश मामलों में बीमा दावे की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। परिजनों का आरोप है कि यह प्रक्रिया लंबी खिंचने से पीड़ित परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों तरह के दबाव में आ जाता है। हालांकि पुलिस का कहना है कि ऐसी रिपोर्ट जांच पूरी होने और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही तैयार की जाती है। इसमें समय लग सकता है।
सुसाइडल केस में मामले में NCRB की रिपोर्ट चौंकाने वाली
सुसाइडल केस के मामले में राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो NCRB की एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया (एडीएसआइ)-2024 रिपोर्ट की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ में 7,962 लोगों ने आत्महत्या की। वर्ष 2023 में यह संख्या 7,368थी। यानी एक वर्ष में 594 मामलों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
आर्थिक दबाव, पारिवारिक तनाव, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और अचानक उत्पन्न होने वाली विपरीत परिस्थितियां लोगों को ऐसे कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर पारिवारिक सहयोग, सामाजिक संवाद और मनोवैज्ञानिक सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
