बस्तर। जिले में लोन दिलाने का झांसा देकर एक महिला से साइबर ठगी का मामला सामने आया है। अनजान नंबर से आए कॉल के बाद महिला को मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड कराया गया और इसके बाद कथित लोन प्रक्रिया के नाम पर उससे रकम वसूली गई। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद साइबर जांच शुरू की गई।

प्रारंभिक जांच में महिला को कॉल करने वाले नंबर का कनेक्शन पाकिस्तान से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि केवल नंबर के आधार पर पाकिस्तान में बैठे किसी साइबर ठग या बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की संलिप्तता की पुष्टि अभी नहीं हुई है। जानकारी के मुताबिक पीड़ित महिला के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उसे लोन उपलब्ध कराने की बात कही।


बातचीत के दौरान लोन की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर महिला को एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया। महिला ने कॉल करने वाले के बताए अनुसार ऐप डाउनलोड कर लिया। इसके बाद उससे अलग-अलग प्रक्रिया के नाम पर रकम मांगी गई। बताया जा रहा है कि महिला से करीब एक-दो हजार रुपये की राशि वसूली गई। ठगी का संदेह होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और साइबर स्तर पर जांच शुरू की गई।

जांच में पाकिस्तान से जुड़ा बताया गया नंबर

साइबर जांच के दौरान पुलिस ने उस नंबर के संबंध में तकनीकी जानकारी जुटाई, जिससे महिला को कॉल किया गया था। जांच में उक्त नंबर का कनेक्शन पाकिस्तान से जुड़ा होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ाया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नंबर का वास्तविक उपयोग कहां से और किस व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था।

इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसी नंबर या इसी तरीके से अन्य लोगों को भी लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाया गया है। हालांकि किसी नंबर का पाकिस्तान से जुड़ा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि कॉल वास्तव में पाकिस्तान से ही की गई थी। इंटरनेट कॉलिंग, वर्चुअल नंबर और नंबर स्पूफिंग जैसी तकनीकों के कारण कॉल के वास्तविक स्रोत का पता लगाने के लिए विस्तृत तकनीकी जांच जरूरी होती है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

छोटी रकम के पीछे बड़े नेटवर्क की भी जांच

मामले में ठगी की रकम करीब एक-दो हजार रुपये बताई जा रही है। रकम कम होने के बावजूद पुलिस का ध्यान ठगी के तरीके, इस्तेमाल किए गए ऐप और कॉलिंग नंबर पर है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं बड़ी संख्या में लोगों से छोटी-छोटी रकम वसूलने के लिए इसी तरह का तरीका तो इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

मामले में भारतीय मुद्रा और पाकिस्तानी मुद्रा के मूल्य के अंतर का भी जिक्र सामने आया है। हालांकि मुद्रा रूपांतरण या ठगी की रकम के आधार पर किसी संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह की मौजूदगी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। किसी नेटवर्क से संबंध होने या नहीं होने की पुष्टि तकनीकी जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।

संदिग्ध नंबर ब्लॉक कराने भेजे

पुलिस ने जांच के दौरान सामने आए संबंधित संदिग्ध नंबरों को ब्लॉक कराने के लिए भेजा है। साथ ही मामले की जानकारी नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर भी रिपोर्ट किए जाने की बात सामने आई है। साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध मोबाइल नंबर, वेबसाइट, ऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों के संबंध में शिकायत दर्ज कराने के लिए सरकारी स्तर पर साइबर अपराध रिपोर्टिंग व्यवस्था उपलब्ध है।

अनजान ऐप डाउनलोड करने से बचें

पुलिस ने लोगों से लोन, निवेश, इनाम, पैसे दोगुने करने या सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर आने वाले अनजान कॉल से सावधान रहने की अपील की है। किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड करने या संदिग्ध लिंक खोलने से बचने की सलाह दी गई है।

बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन और अन्य गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। फिलहाल पुलिस कॉलिंग नंबर, ऐप और इस ठगी से जुड़ी अन्य कड़ियों की जांच कर रही है।

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