

Chhattisgarh Weather Update: इस समय पूरा भारत भीषण गर्मी और जानलेवा लू (Heatwave) की चपेट में है। नौतपा के शुरू होते ही मानो आसमान से आग बरस रही है, जिसने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। सुबह के बजते ही सूरज के तेवर तीखे हो जाते हैं और धूल भरी गर्म हवाएं लोगों को झुलसाने लगती हैं।
देश के कई राज्यों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है, जिससे लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। छत्तीसगढ़ भी इस भीषण तपिश से अछूता नहीं है, जहां सूरज की सीधी मार ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया हैं। इसी बीच मौसम विभाग ने आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे लोगों को राहत मिलने की संभावना है।

रायपुर सहित पूरे प्रदेश में पारे का हाहाकार
अगर बात छत्तीसगढ़ की करें, तो यहां गर्मी ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। राजधानी रायपुर में हाल ही में अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिसने लोगों को उमस और पसीने से बेहाल कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में पारा लगातार 40 डिग्री के पार बना हुआ है।


दोपहर के वक्त सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है और गर्म हवाओं के थपेड़े दोपहिया वाहन चालकों के लिए किसी सजा से कम नहीं हैं। कूलर और एसी भी इस भयंकर गर्मी के आगे सरेंडर करते नजर आ रहे हैं।
मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों ने आने वाले दिनों के लिए राज्य में डबल अलर्ट जारी किया है। एक तरफ जहां प्रदेश के कुछ हिस्सों में गंभीर लू (Heatwave) चलने की चेतावनी दी गई है, वहीं दूसरी तरफ मौसम में अचानक बड़े बदलाव के संकेत भी मिले हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (तूफान) चलने की आशंका है। इसके साथ ही आसमान में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।
क्या गर्मी से मिल जाएगी पूरी तरह निजात?
हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने यह साफ कर दिया है कि इस प्री-मानसून बारिश से लोगों को केवल अस्थायी राहत मिलेगी, गर्मी से पूरी तरह निजात मिलने के आसार अभी नहीं हैं। बारिश के बाद हवा में नमी बढ़ने के कारण उमस (Humidity) और ज्यादा परेशान कर सकती है।
डॉक्टरों ने भी इस बदलते मौसम में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज धूप से अचानक एसी में जाने या बारिश में भीगने से सर्दी-खांसी और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए जब तक मानसून पूरी तरह दस्तक नहीं दे देता, तब तक सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
