बिलासपुर। बारिश का मौसम शुरू हो गया है। शहरों में विकास कार्य या फिर जल निकासी के नाम पर खोदे गए गड्ढे और खुले नाले मासूम बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगे हैं। कालोनियों में खुले निर्माणाधीन गड्ढों और जलभराव के कारण छिप गए नालों में गिरकर बच्चों की जान जाने की दुखद घटनाओं को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है।

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेतावनी के बाद संचालनालय नगरीय प्रशासन ने प्रदेश के प्रदेश के सभी नगर निगम आयुक्त, नगर पालिका और नगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को सुरक्षात्मक कदम उठाने का आदेश जारी किया है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा शासन को भेजे पत्र में जिक्र किया है।


कि बारिश के दौरान खेलते समय या स्कूल आते-जाते समय पैदल चलने वाले बच्चों को जलभराव के कारण छोटे और जानलेवा गहरे गड्ढों का अंतर समझ नहीं आता। आयोग ने बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 13 एवं 15 के तहत बच्चों के “जीवन के अधिकार” की रक्षा के लिए तत्काल रोकथाम के उपाय करने की सिफारिश की है।

निकायों को ये करना है जरुरी

  • सभी नगरीय निकायों में तत्काल सर्वे चलाकर खुले गड्ढों, नालियों और निर्माण स्थलों को चिह्नित करना होगा। गड्ढों की फिलिंग कर या चारों तरफ सुरक्षा घेरे के रूप में बांस-बल्ली की बाड़ी (बैरीकेडिंग) करानी होगी।
  • कालोनियों व निर्माण एजेंसियों को नींव, कालम या किसी भी कारण से खोदे गए गड्ढों को पूरी तरह कवर या सुरक्षित बाउंड्री से बंद कर रखना होगा।
  • अत्यधिक संवेदनशील निर्माणाधीन स्थलों पर ठेकेदारों, एजेंसियों को अनिवार्य रूप से सुरक्षाकर्मी या चौकीदार तैनात करना होगा, जो बच्चों को खतरे से दूर रखेंगे।

हर महीने पेश करनी होगी प्रोग्रेस रिपोर्ट

संचालनालय ने 10 जुलाई 2026 को जारी आदेश में कहा है, भविष्य में होने वाले सभी निर्माण कार्यों में भी इन सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराना होगा। सभी निकायों को हर महीने ‘मासिक पालन प्रतिवेदन’ क्षेत्रीय संयुक्त संचालक कार्यालय के माध्यम से मुख्यालय को भेजना अनिवार्य किया गया है। प्रदेशभर के कलेक्टरों को भी निर्देशित किया गया है कि वे इस संवेदनशील विषय को जिला स्तर की नियमित साप्ताहिक समय-सीमा बैठकों की समीक्षा में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

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