जशपुर। सात वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के गंभीर मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी जशपुर की अदालत ने 62 वर्षीय विनोद एक्का उर्फ जशपुरिया उर्फ छोटा दादू को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कांसाबेल थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के 40 दिनों के भीतर न्यायालय का फैसला आया है।

वहीं अभियोग पत्र पेश किए जाने के 23 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी कर सजा सुनाई गई। पुलिस के अनुसार पीड़िता के पिता ने 13 अगस्त 2026 को कांसाबेल थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में सात वर्षीय बच्ची के साथ 9 अगस्त को गलत कृत्य किए जाने की जानकारी दी गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने बच्ची की पहचान गोपनीय रखते हुए प्रकरण की जांच शुरू की।


शिकायत के आधार पर कांसाबेल थाने में अपराध क्रमांक 151/2026 दर्ज किया गया। आरोपी विनोद एक्का के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 एवं 6 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई। प्रकरण की विवेचना थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ताम्रकार ने की। जांच के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण कर नजरी नक्शा तैयार किया गया।

पीड़िता और संबंधित गवाहों के बयान दर्ज करने के साथ चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। इसके अलावा मामले से संबंधित वैज्ञानिक, दस्तावेजी और अन्य आवश्यक साक्ष्यों का संकलन किया गया। आरोपी का भी चिकित्सीय परीक्षण कराया गया।

पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 96, 65(2), 127(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत 2 सितंबर 2026 को न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी जशपुर जनार्दन खरे की अदालत में हुई।

अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो अनुपम कुमार तिर्की ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से पीड़िता सहित कुल 13 साक्षियों का परीक्षण कराया गया। साथ ही प्रकरण से संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। अदालत ने मामले में 24 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए विनोद एक्का को दोषी करार दिया।

आरोपी को बीएनएस की धारा 65(2) के तहत 20 वर्ष सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। धारा 127(2) बीएनएस के तहत एक वर्ष सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। इसके अलावा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी को 20 वर्ष सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई है।

अर्थदंड नहीं चुकाने की स्थिति में पृथक कारावास का प्रावधान किया गया है। न्यायालय के आदेश के अनुसार सभी कारावास की सजाएं साथ-साथ चलेंगी। पुलिस के मुताबिक इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने से न्यायालय का फैसला आने तक केवल 40 दिन लगे। वहीं 2 सितंबर को अभियोग पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद 23 दिनों के भीतर न्यायालय ने फैसला सुनाया।

प्रकरण की विवेचना डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पाटनवार के मार्गदर्शन में की गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि गंभीर और संवेदनशील अपराधों में साक्ष्यों का विधिसम्मत संकलन कर प्रकरणों को शीघ्र न्यायालय में प्रस्तुत करने की कार्रवाई जारी रखी जाएगी।

Share on

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *